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संक्रमित माताओं के 30 बच्चों ने एचआईवी को पछाड़ा

Mon, 30 Nov 2020 11:20 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2020 11:20 PM IST
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30 children of mothers infected with safe delivery become AIDS free
अनुज कुमार शर्मा
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बिजनौर। अहाना प्रोजेक्ट के तहत जिले में जुलाई माह से अब तक लगभग 30 बच्चे सुरक्षित प्रसव से एड्स से आजादी पा चुके हैं। एड्स पीड़ित मां से जन्मे बच्चे को एचआईवी पॉजिटिव होने से रोकने में ममता हेल्थ इंस्टीटयूट फॉर मदर एंड चाइल्ड संस्था प्रोजेक्ट अहाना के तहत मार्च 2018 से काम कर रही है। तब से लेकर 111 में से 108 बच्चों को इस लाइलाज बीमारी एचआईवी से बचाया जा चुका है।
सामान्य प्रसव की स्थिति में शत प्रतिशत एचआईवी संक्रमित मां से बच्चे में यह बीमारी आने की संभावना रहती है। शासन के निर्देश पर एड्स पीड़ितों में सकारात्मक ऊर्जा भरने के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट अहाना के साइलेंट वॉरियर्स ने इस वर्ष कोरोना जैसी महामारी में भी 30 बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव होने से बचाने में कामयाबी हासिल की। एड्स पीड़ित मां से बच्चे तक एचआईवी संक्रमण पहुंचने से रोकने में ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड संस्था प्रोजेक्ट अहाना के तहत 2018 से बड़ा काम कर रही है। जिले के प्रोजेक्ट ऑफिसर मोहम्मद रफी तुर्क व फील्ड ऑफिसर सुमित कुमार इस काम में लगे हैं। मोहम्मद रफी ने बताया कि एचआईवी पॉजीटिव महिला की प्रसूति से तीन महीने पहले से ही एआरटी की दवाई शुरू की जाताी है। संस्थागत प्रसव के समय सेफ डिलीवरी किट के माध्यम से डिलीवरी कराई जाती है। उन्होंने बताया कि प्रसव के आधा घंटा बाद से 24 घंटे के भीतर बच्चे को चिकित्सक की मौजूदगी में नेब्रासिन नामक दवाई दी जाती है। अधिकतम पांच दिन के भीतर यह डोज देनी होती है। इसके ठीक 45 दिन बाद सीपीटी की दवाई दी जाती है। फिर बच्चे का टेस्ट होता है, जो दिल्ली भेजा जाता है। वहां से पॉजिटिव या फिर नेगेटिव का पता चलता है। ऐसे मामलों में 18 महीने तक दवाई चलती है।
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जिला अस्पताल में लिंक एआरटी सेंटर से इन्हें दवाई दिलाई जाती है और बराबर मां-बाप की काउंसलिंग भी करनी होती है। मार्च 2018 से अब तक ऐसे 30 बच्चों की माताओं के सामने उन्हें लेकर जिला अस्पताल तक पहुंचने की समस्या आ खड़ी हुई। ऐसे में मोहम्मद रफी और सुमित ने एआरटी सेंटर से सभी की दो-दो महीने की दवाई लेकर अप्रैल और मई में इन एचआईवी संक्रमितों के घरों तक पहुंचाने का काम किया और उनकी काउंसलिंग भी की। इसमें ये कामयाब भी हुए और जांच में ये बच्चे निगेटिव आए। ये सभी बच्चे अब स्वस्थ हैं।
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सेफ किट के साथ सकुशल डिलीवरी भी कराई संपन्न
बिजनौर। मोहम्मद रफी बताते हैं कि सभी एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं के वे पहले से संपर्क में रहते हैं। ऐसी एक महिला को जिला अस्पताल तक लाना संभव नहीं हुआ तो चांदपुर के एक निजी अस्पताल में सेफ डिलीवरी किट के साथ उक्त महिला की डिलीवरी भी कराई गई। उसके बच्चे का भी नियमानुसार इलाज कराया जा रहा है।
108 बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव बनने से बचाया
बिजनौर। इस प्रोजेक्ट के तहत मार्च 2018 से अब तक एचआईवी पॉजिटिव मां से पैदा होने वाले 111 में से 108 बच्चों को एचआईवी पॉजीटिव बनने से ये लोग बचा चुके हैं। मोहम्मद रफी तुर्क के मुताबिक सिर्फ तीन बच्चे एचआईवी पॉजिटिव रहे, वह भी इसलिए कि बच्चे के जन्म के छह माह बाद माताओं ने संपर्क किया था।

कोट
-नि:संदेह प्रोजेक्ट अहाना के तहत कोरोना काल में ममता संस्था के इन वॉरियर्स ने बहुत ही सराहनीय काम किया है। एआरटी सेंटर से दवाएं लेकर लगातार एचआईवी संक्रमितों तक पहुंचाते रहे और इनके बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव बनने से बचाने का बड़ा कार्य किया।
डॉ. बीएस रावत, जिला क्षय रोग अधिकारी/नोडल अधिकारी एचआईवी/एड्स बिजनौर
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