Encounter in Bijnor: 21 दिन, आठ गिरफ्तारी...गुर्गों की जुबां ने नेस्तनाबूद कर दी आदित्य और गैंग डी-27 की कहानी
बिजनौर जनपद में आदित्य राणा के एनकाउंटर के बाद उसके कारनामों की चर्चा है। पुलिस ने मात्र 21 दिन में आदित्य के आठ हमराज मुठभेड़ में दबोचे थे। बस फिर क्या था। खाकी के सामने खुली गुर्गों की जुबां ने आदित्य और उसके गैंग डी-27 की कहानी नेस्तनाबूद कर दी।
विस्तार
सात महीने से फरार चल रहे आदित्य तक पहुंचने के लिए पुलिस ने रणनीति बदल ली, बीते 21 दिनों में आदित्य के आठ मददगारों को दबोच लिया। आदित्य समझ नहीं पाया कि आखिर पुलिस चाह क्या रही है। बस यही रणनीति आदित्य के काल का कारण बन गई और इसी के साथ दस वर्षों से खौफ का पर्याय बने कुख्यात का खात्मा हो गया।
प्रदेश के टॉप टेन बदमाशों में शुमार ढाई लाख के इनामी बदमाश आदित्य राणा को ढेर करने का पूरा तानाबाना पहले ही बुना जा चुका था। पुलिस ने पहले निशाना उसके हमराज गुर्गों को बनाया गया। नतीजा बीते कुछ दिनों के भीतर ही एक के बाद एक हुई मुठभेड़ों में उसके आठ खास राजदार पुलिस के शिकंजे में फंस गए। इसके साथ ही अपराध की दुनिया में आदित्य का वजूद और आतंक भी कमजोर होता गया।
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गुर्गों की भीड़ से दूर अलग थलग पड़ा आदित्य जान की सलामती के लिए एक से दूसरी जगह पनाह लेता रहा। इसके उलट गुर्गों की खुलती जुबां के चलते आदित्य कब पुलिस के बुने जाल में फंस गया, खुद उसे भी भनक तक नहीं लग सकी।
करीबियों की किलेबंदी और मददगारों पर वार कर पुलिस ने उसके आपराधिक साम्राज्य की लगातार फैलती जड़ों को पूरी तरह-तहस नहस कर दिया।
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पुलिस अभिरक्षा से दो बार फरार हुआ था आदित्य
कुख्यात आदित्य राणा न्यायालय में पेशी पर लाए जाने के दौरान दो बार पुलिस हिरासत से फरार हो चुका है। वर्ष 2017 में फरार होने के उसने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था।
इसके बाद शिवाला कला के एक मामले में 23 अगस्त 22 को बिजनौर पेशी से लौटते वक्त जिला शाहजहांपुर के थाना रामचंद्र मिशन में पुलिस हिरासत से फरार हो गया था।16 सितम्बर 2022 को ढाई लाख का इनाम घोषित किया गया था। साथ ही उसे प्रदेश की अपराध माफिया की सूची में शामिल किया गया था।
22 मार्च को पुलिस की गिरफ्त से बचा था आदित्य
स्योहारा पुलिस ने 22 मार्च को मुठभेड़ में आदित्य राणा के भाई ग्राम प्रधान चन्द्रवीर उर्फ बिटटू को बोलेरो सहित गिरफ्तार किया था, जबकि अंधेरे का फायदा उठा कर आदित्य राणा व उसके दो साथी फरार हो गए थे।
उसके 24 घंटे बाद ही पुलिस ने गांव न्यामताबाद के जंगल में मुठभेड़ के दौरान आदित्य राणा के चार करीबियों राजेश पुत्र फूल सिंह गांव रतनपुरा, निक्की पुत्र पूरन गांव बमनोली, अनुराग पुत्र राजवीर गांव रैनी थाना स्योहारा व जय कुमार पुत्र बृजपाल गांव सलेमपुर कांठ मुरादाबाद को गिरफ्तार किया था।
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नितिन ने आदित्य को दिए थे 15 हजार रुपये
तीन अप्रैल को नूरपुर पुलिस ने गांव तेलीपुरा की नहर पर मुठभेड़ के बाद आदित्य राणा के दो करीबियों कुलदीप पुत्र गजेन्द्र निवासी गांव खेरपुर थाना चांदपुर व पीयूष पुत्र यशपाल निवासी गांव पूरेना थाना नूरपुर को दो तमंचों सहित गिरफ्तार किया था। आदित्य राणा ने फरारी के बाद दोनों बदमाशों के घर शरण ली थी।
पांच अप्रैल की दोपहर नहटौर पुलिस ने आदित्य राणा के करीबी नितिन चौधरी पुत्र रामवीर सिंह निवासी भीकनपुर थाना छजलैट मुरादाबाद को घेराबंदी कर तमंचे सहित गिरफ्तार किया था। नितिन पर आदित्य को फरार कराने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप था। नितिन ने ही आदित्य को फरार होने से पहले पंद्रह हजार रुपये दिए थे।