खुदा ने यह सिफत दुनिया की हर औरत को बख्शी है, कि वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते हैं। कुख्यात अपराधी आदित्य राणा के एनकाउंटर में ढेर होने के बाद श्यामो देवी की छलकती बूढ़ी आंखों को बड़ा सुकून मिला।
अपने दोनों बेटों का सीना आदित्य की गोलियों से छलनी होता देखने वाली श्यामो ने इसे बेबस मां की बददुआ का नतीजा और कुदरत का इंसाफ करार दिया। कहा जीते जी मुझे जिंदा लाश बनाने वाले आदित्य के खत्म होने के साथ ही अब कलेजे को ठंडक मिली है। रुआंसी हालत में दोनों बेटों को याद कर कहा कि उनकी आत्मा को भी आज शांति मिली होगी।
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एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के गांव राणानंगला निवासी 75 वर्षीय श्यामो देवी ने कहा कि तीन दशक पूर्व पति की मौत के बाद उसके दोनों पुत्र मुकेश व राकेश ही उनके बुढ़ापे की लाठी थी। जिनके सहारे मुझे जीने की आस लगी हुई थी, लेकिन आदित्य राणा ने बिना किसी कसूर के मेरे दोनों पुत्रों को मौत के घाट उतार दिया था।
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दोनों पुत्रों की मौत के सदमे में किसी मां के लिए जीना कितना मुश्किल होता है। अब अपने पोतों के चेहरों में अपने पुत्रों की छवि देख कर बुढ़ापा काट रही हूं। आदित्य की मौत की खबर से आज उनके पुत्रों की आत्मा को शांति जरूर मिली होंगी।
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पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा आदित्य का शव
पोस्टमार्टम के बाद आदित्य राणा का शव देर शाम उसके गांव राणानंगला पहुंचा। बृहस्पतिवार को पुलिस की मौजूदगी में आदित्य राणा का अंतिम संस्कार होगा। पुलिस मुठभेड़ में आदित्य राणा की मौत के बाद पुलिस ने उसके शव का पोस्टमार्टम कराया। जिसके बाद परिजन उसके शव को अपने साथ ले गए। आदित्य राणा का शव शाम 6:40 पर उसके गांव राणानंगला पहुंचा।
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आदित्य राणा का भाई चन्द्रवीर उर्फ बिटटू 22 मार्च को पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के बाद से ही जेल में बंद है। आदित्य के पिता राजपाल सिंह अपनी बेटी मोनिका के साथ लखनऊ में रहते हैं।