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ांच माह में 43 बच्चों की मां की कोख में मौत
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:15 AM IST
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बिजनौर। जिला महिला अस्पताल में पांच माह में जन्म लेने से पहले ही करीब 43 नवजात की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद महिला अस्पताल का स्टाफ प्रसव के दौरान कोई खास सावधानी नहीं बरतता है। अप्रशिक्षित स्टाफ से डिलीवरी करा देता है।
सीएसएस डा. आभा वर्मा के अनुसार जिला महिला अस्पताल में एक साल में करीब चार हजार सामान्य व 1500 ऑपरेशन से नवजात बच्चों का जन्म होता है। जिला महिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अगस्त से दिसंबर तक 43 बच्चों की जन्म से पहले ही मां के पेट में मौत हो चुकी है। हालांकि जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान व बाद जन्म लेने वाले नवजात बच्चों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं हैं। सीएमएस डा. वर्मा के मुताबिक सभी बच्चों की मौत की जानकारी अल्ट्रासाउंड में ही पता चल गया था।
जिले में 169 चिकित्सक के सापेक्ष तैनात हैं मात्र 55 चिकित्सक
14 के सापेक्ष मात्र आठ चिकित्सक तैनात
जिला महिला अस्पताल में 14 चिकित्सकों के पद हैं। उनके सापेक्ष सिर्फ आठ ही चिकित्सक तैनात हैं। हालांकि बाल रोग विशेषज्ञ का पद अभी तक खाली है। जिले में भी 169 पदों के सापेक्ष मात्र 55 चिकित्सक तैनात हैं।
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जिला महिला अस्पताल में 11 सरकारी व तीन संविदा के पद हैं। सरकारी पदों पर सीएमएस डा.आभा वर्मा, डा.पुष्पलता समी, डा.एफसी वर्मा, डा.प्रीतिराज व डा.नीरजा शुक्ला तैनात हैं। डा. अपराजिता चौधरी, ऊषा सिंह व डा. रुमाना संविदा पर तैनात हैं। जिला महिला अस्पताल में पिछले दो माह से बाल रोग विशेषज्ञ में तैनात नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञ डा.बाबू सिंह सेवानिवृत्त होने के बाद अक्तूबर में काम छोड़कर बिजनौर से चले गए हैं। जिले में चिकित्सकों के 169 पद हैं, लेकिन मात्र 55 चिकित्सक ही तैनात व 84 पद रिक्त हैं। दस चिकित्सक त्यागपत्र दे चुके हैं और 18 चिकित्सक बिना सूचना दिए ही अनुपस्थित हैं। दो चिकित्सकों को शासन ने निलंबित कर दिया है।
नजीबाबाद में अस्पताल चलाती है सीएमएस
सीएमएस डा.आभा वर्मा पर आरोप है कि वे नजीबाबाद क्षेत्र में निजी अस्पताल चलाती हैं। इसके कारण वह महिला अस्पताल में पूरा समय नहीं देती है। मंगलवार को हुई डीएम की प्रेसवार्ता में डीएम के समक्ष भी यह मुद्दा उठा। डीएम ने इसके भी जांच के आदेश दिए हैं।
जिला महिला अस्पताल में 14 घंटों के भीतर पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार की दोपहर डीएम ने घटना के संबंध में पत्रकार से वार्ता की। पत्रकार वार्ता के दौरान कुछ लोगों ने इस संबंध में बताया कि जिला महिला अस्पताल हंगामा करने वाले परिजनों का आरोप था कि सीएमएस डा.आभा वर्मा नजीबाबाद में सरकारी अस्पताल के निकट अपना अस्पताल चलाती है। इसके कारण वह जिला महिला अस्पताल में कम समय देती है। डीएम ने प्रेसवार्ता में बताया कि अगर ऐसा है तो इस मामले की जांच भी कराई जाएगी। अगर शिकायत सही पाई गई तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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सीएसएस डा. आभा वर्मा के अनुसार जिला महिला अस्पताल में एक साल में करीब चार हजार सामान्य व 1500 ऑपरेशन से नवजात बच्चों का जन्म होता है। जिला महिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अगस्त से दिसंबर तक 43 बच्चों की जन्म से पहले ही मां के पेट में मौत हो चुकी है। हालांकि जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान व बाद जन्म लेने वाले नवजात बच्चों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं हैं। सीएमएस डा. वर्मा के मुताबिक सभी बच्चों की मौत की जानकारी अल्ट्रासाउंड में ही पता चल गया था।
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जिले में 169 चिकित्सक के सापेक्ष तैनात हैं मात्र 55 चिकित्सक
14 के सापेक्ष मात्र आठ चिकित्सक तैनात
जिला महिला अस्पताल में 14 चिकित्सकों के पद हैं। उनके सापेक्ष सिर्फ आठ ही चिकित्सक तैनात हैं। हालांकि बाल रोग विशेषज्ञ का पद अभी तक खाली है। जिले में भी 169 पदों के सापेक्ष मात्र 55 चिकित्सक तैनात हैं।
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जिला महिला अस्पताल में 11 सरकारी व तीन संविदा के पद हैं। सरकारी पदों पर सीएमएस डा.आभा वर्मा, डा.पुष्पलता समी, डा.एफसी वर्मा, डा.प्रीतिराज व डा.नीरजा शुक्ला तैनात हैं। डा. अपराजिता चौधरी, ऊषा सिंह व डा. रुमाना संविदा पर तैनात हैं। जिला महिला अस्पताल में पिछले दो माह से बाल रोग विशेषज्ञ में तैनात नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञ डा.बाबू सिंह सेवानिवृत्त होने के बाद अक्तूबर में काम छोड़कर बिजनौर से चले गए हैं। जिले में चिकित्सकों के 169 पद हैं, लेकिन मात्र 55 चिकित्सक ही तैनात व 84 पद रिक्त हैं। दस चिकित्सक त्यागपत्र दे चुके हैं और 18 चिकित्सक बिना सूचना दिए ही अनुपस्थित हैं। दो चिकित्सकों को शासन ने निलंबित कर दिया है।
नजीबाबाद में अस्पताल चलाती है सीएमएस
सीएमएस डा.आभा वर्मा पर आरोप है कि वे नजीबाबाद क्षेत्र में निजी अस्पताल चलाती हैं। इसके कारण वह महिला अस्पताल में पूरा समय नहीं देती है। मंगलवार को हुई डीएम की प्रेसवार्ता में डीएम के समक्ष भी यह मुद्दा उठा। डीएम ने इसके भी जांच के आदेश दिए हैं।
जिला महिला अस्पताल में 14 घंटों के भीतर पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार की दोपहर डीएम ने घटना के संबंध में पत्रकार से वार्ता की। पत्रकार वार्ता के दौरान कुछ लोगों ने इस संबंध में बताया कि जिला महिला अस्पताल हंगामा करने वाले परिजनों का आरोप था कि सीएमएस डा.आभा वर्मा नजीबाबाद में सरकारी अस्पताल के निकट अपना अस्पताल चलाती है। इसके कारण वह जिला महिला अस्पताल में कम समय देती है। डीएम ने प्रेसवार्ता में बताया कि अगर ऐसा है तो इस मामले की जांच भी कराई जाएगी। अगर शिकायत सही पाई गई तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।