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डीएम की फटकार के बाद भी स्वास्थ्य अधिकारियों ने बच्चों को नहीं कराया भर्ती
Updated Fri, 10 Nov 2017 11:59 PM IST
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दो दिन बाद भी भर्ती नहीं कराए बच्चे
बिजनौर। डीएम की फटकार के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। दो दिन बीत जाने के बाद भी अधिकारियों ने लापरवाही के चलते बीस हजार अतिकुपोषित बच्चों में से पोषण पुनर्वास केंद्र में एक भी बच्चे को भर्ती नहीं कराया है।
जिले में पिछले माह के अंतिम सप्ताह में वजन दिवस मनाया गया था। इसके अंतर्गत हुए सर्वे में जिले में करीब बीस हजार अतिकुपोषित बच्चे मिले हैं। शासन-प्रशासन शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए सख्त है और इसके लिए कई प्रकार की योजना भी चला रखी हैं। डीएम जगतराज ने मंगलवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में लापरवाही बरतने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों फटकार लगाई थी। उन्होंने एमओआईसी (मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज) को सख्त निर्देश दिए थे कि वे अपने क्षेत्रों के अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराएं। लेकिन डीएम की फटकार के बाद भी स्वास्थ्य अधिकारी जागने को तैयार नहीं है। दो दिन बीत जाने के बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र पर एक भी बच्चे को भर्ती नही कराया गया।
केंद्र में एक अक्तूबर से 10 नवंबर तक मात्र सात बच्चे ही भर्ती हुए हैं। अंतिम बच्चों 12 दिन पहले भर्ती हुआ था। कार्यक्रम में महिला बाल विकास एवं पोषाहार विभाग द्वारा स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों से कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है और उनकी रिपोर्ट आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) की टीम को भेजी जाती है। आरबीएसके की टीम अपनी रिपोर्ट क्षेत्रीय एमओआईसी को देती है। एमओआईसी पीएचसी, सीएचसी से गाड़ी उपलब्ध कराकर बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराते है। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक पर दो गाड़िया भी दी गई है।
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15 दिन भर्ती रहने के दौरान बच्चे के खान-पान का ध्यान रखा जाता है और उसको सही होने के बाद घर भेज दिया जाता है। सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल ने बताया कि अतिकुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने के लिए एमओआईसी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बैठक ली गई थी। उनको निर्देश दिए गए है कि वह शीघ्र की अपने क्षेत्रों से बच्चों को भर्ती कराएं।
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बिजनौर। डीएम की फटकार के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। दो दिन बीत जाने के बाद भी अधिकारियों ने लापरवाही के चलते बीस हजार अतिकुपोषित बच्चों में से पोषण पुनर्वास केंद्र में एक भी बच्चे को भर्ती नहीं कराया है।
जिले में पिछले माह के अंतिम सप्ताह में वजन दिवस मनाया गया था। इसके अंतर्गत हुए सर्वे में जिले में करीब बीस हजार अतिकुपोषित बच्चे मिले हैं। शासन-प्रशासन शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए सख्त है और इसके लिए कई प्रकार की योजना भी चला रखी हैं। डीएम जगतराज ने मंगलवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में लापरवाही बरतने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों फटकार लगाई थी। उन्होंने एमओआईसी (मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज) को सख्त निर्देश दिए थे कि वे अपने क्षेत्रों के अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराएं। लेकिन डीएम की फटकार के बाद भी स्वास्थ्य अधिकारी जागने को तैयार नहीं है। दो दिन बीत जाने के बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र पर एक भी बच्चे को भर्ती नही कराया गया।
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केंद्र में एक अक्तूबर से 10 नवंबर तक मात्र सात बच्चे ही भर्ती हुए हैं। अंतिम बच्चों 12 दिन पहले भर्ती हुआ था। कार्यक्रम में महिला बाल विकास एवं पोषाहार विभाग द्वारा स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों से कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है और उनकी रिपोर्ट आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) की टीम को भेजी जाती है। आरबीएसके की टीम अपनी रिपोर्ट क्षेत्रीय एमओआईसी को देती है। एमओआईसी पीएचसी, सीएचसी से गाड़ी उपलब्ध कराकर बच्चों को जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराते है। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक पर दो गाड़िया भी दी गई है।
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15 दिन भर्ती रहने के दौरान बच्चे के खान-पान का ध्यान रखा जाता है और उसको सही होने के बाद घर भेज दिया जाता है। सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल ने बताया कि अतिकुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने के लिए एमओआईसी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बैठक ली गई थी। उनको निर्देश दिए गए है कि वह शीघ्र की अपने क्षेत्रों से बच्चों को भर्ती कराएं।