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ग्राम प्रधान ने प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रों से लिए 30-30 हजार रुपये
Updated Mon, 08 Jan 2018 12:50 AM IST
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बरूकी/बिजनौर। ग्राम प्रधान ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए गांव के जरूरतमंद परिवारों से रिश्वत लेने की शिकायत पर सीडीओ डा.इंद्रमणि त्रिपाठी व डीपीआरओ मनीष कुमार गांव जांच करने पहुंचे। गांव वालों ने सीडीओ के सामने ग्राम प्रधान की शिकायत की। इस मामले में पीएनबी के शाखा प्रबंधक की भी संलिप्तता रही। ग्राम प्रधान व शाखा प्रबंधक के खिलाफ ब्लॉक की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है।
जरूरतमंदों को घर मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई जा रही है। योजना में पात्रों का चयन ग्राम प्रधान द्वारा किया जाता है। ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल की ग्राम पंचायत फरीदपुर मान उर्फ पमड़ावली के गांव वालों ने ग्राम प्रधान द्वारा योजना में रिश्वत लेकर नाम देने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत आला अधिकारियों से की गई थी। रविवार को सीडीओ डा.इंद्रमणि त्रिपाठी व डीपीआरओ मनीष कुमार ने खुद गांव जाकर आरोपों की जांच की। जांच में पता चला कि छह परिवारों को योजना का लाभ दिलाया गया है। योजना का लाभ लेने वाले जय सिंह, रेशमा, गीता, शोभा, उमा, बाला ने बताया कि ग्राम प्रधान सिद्धार्थ चौधरी ने उनसे योजना में मकान बनवाने के 30-30 हजार रुपये लिए थे। रुपये न देने पर योजना में शामिल न करने की धमकी दी थी। अपने परिवार को छत देने के लिए उन्हें मजबूरी में ग्राम प्रधान को 30-30 हजार रुपये देने पड़े। गांव वालों ने बताया कि ग्राम प्रधान उनके खाते से पैसे निकालने के लिए बैंक साथ ले जाता था। उन्हें बैंक के बाहर खड़ा किया गया उनके खाते से मैनेजर ने रुपये निकालकर प्रधान को दे दिए। डीपीआरओ मनीष कुमार का कहना है कि योजना के बदले रुपये मांगना गंभीर अपराध है। ग्राम प्रधान व शाखा प्रबंधक के खिलाफ इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। वहीं इस जांच के दौरान ग्राम प्रधान सिद्धार्थ चौधरी मौके पर मौजूद नहीं था।
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जरूरतमंदों को घर मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई जा रही है। योजना में पात्रों का चयन ग्राम प्रधान द्वारा किया जाता है। ब्लॉक मोहम्मदपुर देवमल की ग्राम पंचायत फरीदपुर मान उर्फ पमड़ावली के गांव वालों ने ग्राम प्रधान द्वारा योजना में रिश्वत लेकर नाम देने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत आला अधिकारियों से की गई थी। रविवार को सीडीओ डा.इंद्रमणि त्रिपाठी व डीपीआरओ मनीष कुमार ने खुद गांव जाकर आरोपों की जांच की। जांच में पता चला कि छह परिवारों को योजना का लाभ दिलाया गया है। योजना का लाभ लेने वाले जय सिंह, रेशमा, गीता, शोभा, उमा, बाला ने बताया कि ग्राम प्रधान सिद्धार्थ चौधरी ने उनसे योजना में मकान बनवाने के 30-30 हजार रुपये लिए थे। रुपये न देने पर योजना में शामिल न करने की धमकी दी थी। अपने परिवार को छत देने के लिए उन्हें मजबूरी में ग्राम प्रधान को 30-30 हजार रुपये देने पड़े। गांव वालों ने बताया कि ग्राम प्रधान उनके खाते से पैसे निकालने के लिए बैंक साथ ले जाता था। उन्हें बैंक के बाहर खड़ा किया गया उनके खाते से मैनेजर ने रुपये निकालकर प्रधान को दे दिए। डीपीआरओ मनीष कुमार का कहना है कि योजना के बदले रुपये मांगना गंभीर अपराध है। ग्राम प्रधान व शाखा प्रबंधक के खिलाफ इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। वहीं इस जांच के दौरान ग्राम प्रधान सिद्धार्थ चौधरी मौके पर मौजूद नहीं था।
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