{"_id":"5ba7e07e867a5501332a66ae","slug":"171537728638-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागज पर उतारा इंजन-चेसिस नंबर और हो गया फिटनेस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागज पर उतारा इंजन-चेसिस नंबर और हो गया फिटनेस
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:20 AM IST
विज्ञापन
अमरोहा। वाहनों की इंटीरियर से लेकर इंजन की सेहत समेत तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जाने का नियम है, लेकिन वाहनों की सेहत परखने के लिए परिवहन विभाग में कोई वर्कशॉप ही नहीं बनी है। इसके चलते वाहनों की फिटनेस के नाम पर महज इंजन और चेसिस नंबर कागज पर उतारकर फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते हैं। वो भी बिना आरई के।
परिवहन विभाग में वाहनों की सेहत को परखकर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का काम संभागीय निरीक्षक के जिम्मे होता है, लेकिन अमरोहा के परिवहन कार्यालय में अभी तक आरआई की तैनाती ही नहीं है। कार्यालय में फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का काम फिलहाल एआरटीओ प्रशासन देख रहे हैं। यहां वर्कशॉप न होने के कारण फिटनेस के लिए कार्यालय पर आने वाले वाहनों के चेसिस नंबर और इंजन नंबर कागज पर उगाकर कर्मचारी अधिकारियों को थमा देते हैं। इसके बाद हल्के वाहनों से 600 रुपये और भारी वाहनों से 800 रुपये पूरे साल की फीस के हिसाब से प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। इसमें फिटनेस के नियमों का पालन न किए जाने से आए दिन हादसों को बढ़ावा मिल रहा है।
फिटनेस में स्पष्ट दिखायी देनी चाहिए टायरों की गुड्डी
अमरोहा। वाहनों की फिटनेस के समय लाईट, इंडीकेटर और रेडियम से लेकर इंजन की उम्र और धुएं में कार्बन स्तर तक की जांच की जाती है। इसके अलावा फिटनेस में वाहन का पूरा मैकेनिकल चेक करके इंटीरियर में चालक के केबिन और यात्रियों की सीटों की स्थिति भी देखी जाती है। मुरादाबाद के आरआई अशोक कुमार ने बताया कि वाहन के टायरों की स्थिति भी फिटनेस का अहम हिस्सा है। फिटनेस के समय टायरों की गुड्डी के उभार स्पष्ट दिखायी देने चाहिए। घिसी हुई गुड्डी के टायरों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने का नियम नहीं है।
विज्ञापन
परमिट पाने को कराते हैं फिटनेस
अमरोहा। बसों को प्राइवेट रूट पर चलाने के लिए परिवहन विभाग से परमिट की जरूरत होती है। विभाग परमिट तभी देता है जबकि वाहन को सड़कों पर दौड़ाने के लिए फिट घोषित किया होता है। इसके लिए फिटनेस सर्टिफिकेट की बस संचालकों को दरकार होती है। अपनी उम्र पूरी कर चुकी बसों को विभाग हर पांच साल के बाद अगले पांच साल के लिए परमिट जारी करता रहता है। लेकिन परमिट जारी करने के लिए विभाग ने हर साल फिटनेस करानी की शर्त लागू की हुई है। परमिट मिलने के बाद लगातार पांच पांच साल तक फिटनेस कराने पर ही अगले पांच साल के लिए विभाग प्राइवेट बसों के परमिट जारी करता है। इसलिए मजबूरी में बस संचालकों को परमिट पाने के खातिर फिटनेस करानी पड़ती है।
विज्ञापन
परिवहन विभाग में वाहनों की सेहत को परखकर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का काम संभागीय निरीक्षक के जिम्मे होता है, लेकिन अमरोहा के परिवहन कार्यालय में अभी तक आरआई की तैनाती ही नहीं है। कार्यालय में फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का काम फिलहाल एआरटीओ प्रशासन देख रहे हैं। यहां वर्कशॉप न होने के कारण फिटनेस के लिए कार्यालय पर आने वाले वाहनों के चेसिस नंबर और इंजन नंबर कागज पर उगाकर कर्मचारी अधिकारियों को थमा देते हैं। इसके बाद हल्के वाहनों से 600 रुपये और भारी वाहनों से 800 रुपये पूरे साल की फीस के हिसाब से प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। इसमें फिटनेस के नियमों का पालन न किए जाने से आए दिन हादसों को बढ़ावा मिल रहा है।
विज्ञापन
फिटनेस में स्पष्ट दिखायी देनी चाहिए टायरों की गुड्डी
अमरोहा। वाहनों की फिटनेस के समय लाईट, इंडीकेटर और रेडियम से लेकर इंजन की उम्र और धुएं में कार्बन स्तर तक की जांच की जाती है। इसके अलावा फिटनेस में वाहन का पूरा मैकेनिकल चेक करके इंटीरियर में चालक के केबिन और यात्रियों की सीटों की स्थिति भी देखी जाती है। मुरादाबाद के आरआई अशोक कुमार ने बताया कि वाहन के टायरों की स्थिति भी फिटनेस का अहम हिस्सा है। फिटनेस के समय टायरों की गुड्डी के उभार स्पष्ट दिखायी देने चाहिए। घिसी हुई गुड्डी के टायरों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने का नियम नहीं है।
विज्ञापन
परमिट पाने को कराते हैं फिटनेस
अमरोहा। बसों को प्राइवेट रूट पर चलाने के लिए परिवहन विभाग से परमिट की जरूरत होती है। विभाग परमिट तभी देता है जबकि वाहन को सड़कों पर दौड़ाने के लिए फिट घोषित किया होता है। इसके लिए फिटनेस सर्टिफिकेट की बस संचालकों को दरकार होती है। अपनी उम्र पूरी कर चुकी बसों को विभाग हर पांच साल के बाद अगले पांच साल के लिए परमिट जारी करता रहता है। लेकिन परमिट जारी करने के लिए विभाग ने हर साल फिटनेस करानी की शर्त लागू की हुई है। परमिट मिलने के बाद लगातार पांच पांच साल तक फिटनेस कराने पर ही अगले पांच साल के लिए विभाग प्राइवेट बसों के परमिट जारी करता है। इसलिए मजबूरी में बस संचालकों को परमिट पाने के खातिर फिटनेस करानी पड़ती है।