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शहीदों के परिवार के साथ आए जिले के किसान
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शहीदों के परिवार के साथ आए किसान
बिजनौर। भारत द्वारा एयर स्ट्राइक के बाद जिले के लोगों में जोश है। भुगतान के लिए आंदोलन करने वाले किसान भी खुलकर भारतीय सेना के साथ हैं। भारतीय किसान यूनियन ने गन्ना बकाया पर मिलने वाला करीब 42 करोड़ का भुगतान शहीद सैनिकों को देने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में गन्ना मंत्री सुरेश राणा को संबोधित एक ज्ञापन मंडलायुक्त यशवंत राव को दिया है।
जिले के नौजवान और किसान कभी भी देश के काम आने से पीछे नहीं हटे हैं। कारगिल युद्ध हो या फिर दंतेवाड़ा में हुए हमले, जिले के जवानों ने पराक्रम दिखाकर व अपनी शहादत से सभी को गौरांवित किया। 14 फरवरी को पुलवामा में हुए हमले में सैनिकों की शहादत के बाद से सभी में गुस्सा है। लोगों ने मोबाइल एप से शहीदों के परिवारों की आर्थिक मदद की थी। अब जिले के किसान भी शहीदों के परिवारों के साथ आ गए हैं। नियम के अनुसार किसान को गन्ने का भुगतान 14 दिन के अंदर मिलना चाहिए। अगर किसान को 14 दिन में भुगतान नहीं मिलता तो उस पर मिल को ब्यॉज देना होता है। जिले के किसानों का पिछले साल के गन्ना बकाया का ब्याज 39 करोड़ व इस साल के गन्ना बकाया का ब्याज तीन करोड़ रुपये बैठता है। दो साल का 42 करोड़ का ब्याज बनता है। भारतीय किसान यूनियन ने जिले के किसानों की ओर से यह राशि शहीदों के परिवारों को देने का प्रस्ताव रखा है। उधर, भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार सैनिक से ही देश होता है। किसानों के परिवार के बच्चे ही फौज में हैं। किसान अपने परिवारों के बच्चों को किसी भी मुश्किल में अकेला नहीं छोड़ेंगे। किसानों का पिछले सालों का जो भी ब्याज बनता है वह शहीदों के परिवारों को दिया जाए। अगर इसके लिए कोई औपचारिकता पूरी करनी है तो किसान इसके लिए भी तैयार हैं।
यह है नियम
केन एक्ट में प्रावधान है कि किसान को गन्ना भुगतान गन्ना मिल को देने के 14 दिन के अंदर मिले। अगर भुगतान न हो तो किसान को बैंक में चल रही ब्याज दर के अनुसार ब्याज मिले। इस फार्मूले के अनुसार किसानों का मिलों पर 42 करोड़ का भुगतान बनता है।
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बिजनौर। भारत द्वारा एयर स्ट्राइक के बाद जिले के लोगों में जोश है। भुगतान के लिए आंदोलन करने वाले किसान भी खुलकर भारतीय सेना के साथ हैं। भारतीय किसान यूनियन ने गन्ना बकाया पर मिलने वाला करीब 42 करोड़ का भुगतान शहीद सैनिकों को देने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में गन्ना मंत्री सुरेश राणा को संबोधित एक ज्ञापन मंडलायुक्त यशवंत राव को दिया है।
जिले के नौजवान और किसान कभी भी देश के काम आने से पीछे नहीं हटे हैं। कारगिल युद्ध हो या फिर दंतेवाड़ा में हुए हमले, जिले के जवानों ने पराक्रम दिखाकर व अपनी शहादत से सभी को गौरांवित किया। 14 फरवरी को पुलवामा में हुए हमले में सैनिकों की शहादत के बाद से सभी में गुस्सा है। लोगों ने मोबाइल एप से शहीदों के परिवारों की आर्थिक मदद की थी। अब जिले के किसान भी शहीदों के परिवारों के साथ आ गए हैं। नियम के अनुसार किसान को गन्ने का भुगतान 14 दिन के अंदर मिलना चाहिए। अगर किसान को 14 दिन में भुगतान नहीं मिलता तो उस पर मिल को ब्यॉज देना होता है। जिले के किसानों का पिछले साल के गन्ना बकाया का ब्याज 39 करोड़ व इस साल के गन्ना बकाया का ब्याज तीन करोड़ रुपये बैठता है। दो साल का 42 करोड़ का ब्याज बनता है। भारतीय किसान यूनियन ने जिले के किसानों की ओर से यह राशि शहीदों के परिवारों को देने का प्रस्ताव रखा है। उधर, भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार सैनिक से ही देश होता है। किसानों के परिवार के बच्चे ही फौज में हैं। किसान अपने परिवारों के बच्चों को किसी भी मुश्किल में अकेला नहीं छोड़ेंगे। किसानों का पिछले सालों का जो भी ब्याज बनता है वह शहीदों के परिवारों को दिया जाए। अगर इसके लिए कोई औपचारिकता पूरी करनी है तो किसान इसके लिए भी तैयार हैं।
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यह है नियम
केन एक्ट में प्रावधान है कि किसान को गन्ना भुगतान गन्ना मिल को देने के 14 दिन के अंदर मिले। अगर भुगतान न हो तो किसान को बैंक में चल रही ब्याज दर के अनुसार ब्याज मिले। इस फार्मूले के अनुसार किसानों का मिलों पर 42 करोड़ का भुगतान बनता है।
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