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योजना में शामिल हर परिवार के यहां बिजली और एलपीजी कनेक्शन की होगी जांच
Updated Thu, 08 Jun 2017 12:31 AM IST
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बिजली और एलपीजी कनेक्शन की होगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लाभ ले रहे परिवारों के सत्यापन में उनके घर में बिजली और एलपीजी के कनेक्शन की जानकारी अनिवार्य रूप से ली जाएगी। यह जानकारी शासन को भेजी जाएगी। जिन परिवारों में ये दोनों कनेक्शन होंगे, उनको मिलने वाले केरोसिन पर कटौती की कैंची चल सकती है।
हर परिवार को अनाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्यान्ना सुरक्षा अधिनियम योजना का संचालन किया है। इसमें पात्र परिवारों को दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं और तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल दिया जाता है। इन सभी परिवारों को केरोसिन भी दिया जाता है। योजना में समय-समय पर पात्रता की जांच होती रहती है।
अब तक 40 हजार से अधिक अपात्र परिवारों को योजना से बाहर किया जा चुका है। सत्यापन कार्य में पात्र परिवारों के यहां बिजली और एलपीजी कनेक्शन की जानकारी एकत्र की जा रही है। शासन की मंशा ऐसे परिवारों को दिए जा रहे केरोसिन पर कटौती करने की है, जिनके यहां पहले से ही एलपीजी और बिजली कनेक्शन हैं। ऐसे परिवारों को मिलने वाले केरोसिन पर कटौती होने से सरकार को बहुत लाभ होगा।
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पौने छह लाख हैं पात्र परिवार
जिले में करीब पौने छह लाख पात्र परिवार हैं। इस योजना में सभी परिवारों को राशन के साथ-साथ केरोसिन भी दिया जाता है। हर परिवार को दो-दो लीटर केरोसिन दिया जाता है। मेरठ के भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने हर महीने केेरोसिन में करोड़ों रुपये के गोलमाल का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। पत्र में लिखा गया था कि घर में बिजली और एलपीजी कनेक्शन होने के बाद भी परिवारों को केरोसिन दिया जा रहा है। इसके बाद शासन ने इस मामले में जांच में तेजी लाई है। उधर, जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह के अनुसार योजना में शामिल हर परिवार के यहां एलपीजी और बिजली कनेक्शन की जांच की जा रही है। इन परिवारों का केरोसिन काटने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जो भी निर्देश मिलेंगे, उनका अनुपालन किया जाएगा।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लाभ ले रहे परिवारों का होगा सत्यापन
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अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लाभ ले रहे परिवारों के सत्यापन में उनके घर में बिजली और एलपीजी के कनेक्शन की जानकारी अनिवार्य रूप से ली जाएगी। यह जानकारी शासन को भेजी जाएगी। जिन परिवारों में ये दोनों कनेक्शन होंगे, उनको मिलने वाले केरोसिन पर कटौती की कैंची चल सकती है।
हर परिवार को अनाज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्यान्ना सुरक्षा अधिनियम योजना का संचालन किया है। इसमें पात्र परिवारों को दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं और तीन रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल दिया जाता है। इन सभी परिवारों को केरोसिन भी दिया जाता है। योजना में समय-समय पर पात्रता की जांच होती रहती है।
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अब तक 40 हजार से अधिक अपात्र परिवारों को योजना से बाहर किया जा चुका है। सत्यापन कार्य में पात्र परिवारों के यहां बिजली और एलपीजी कनेक्शन की जानकारी एकत्र की जा रही है। शासन की मंशा ऐसे परिवारों को दिए जा रहे केरोसिन पर कटौती करने की है, जिनके यहां पहले से ही एलपीजी और बिजली कनेक्शन हैं। ऐसे परिवारों को मिलने वाले केरोसिन पर कटौती होने से सरकार को बहुत लाभ होगा।
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पौने छह लाख हैं पात्र परिवार
जिले में करीब पौने छह लाख पात्र परिवार हैं। इस योजना में सभी परिवारों को राशन के साथ-साथ केरोसिन भी दिया जाता है। हर परिवार को दो-दो लीटर केरोसिन दिया जाता है। मेरठ के भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने हर महीने केेरोसिन में करोड़ों रुपये के गोलमाल का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। पत्र में लिखा गया था कि घर में बिजली और एलपीजी कनेक्शन होने के बाद भी परिवारों को केरोसिन दिया जा रहा है। इसके बाद शासन ने इस मामले में जांच में तेजी लाई है। उधर, जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह के अनुसार योजना में शामिल हर परिवार के यहां एलपीजी और बिजली कनेक्शन की जांच की जा रही है। इन परिवारों का केरोसिन काटने के कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जो भी निर्देश मिलेंगे, उनका अनुपालन किया जाएगा।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का लाभ ले रहे परिवारों का होगा सत्यापन