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बीत गए 16 साल, पूरा नहीं हुआ माइनर का निर्माण
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हल्दौर क्षेत्र में अधूरा सल्लाहपुर माइनर।
- फोटो : BIJNOR
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बीत गए 16 साल, पूरा नहीं हुआ नौ माइनर का निर्माण
बिजनौर। साल 2006 में सल्लाहपुर माइनर का निर्माण चालू हुआ, अब 16 साल बीत चुके हैं लेकिन माइनर में पानी नहीं आ सका। जिसकी वजह रही निर्माण बीच-बीच में पूरा नहीं होना। कहीं जमीन नहीं मिली, तो कहीं पुल नहीं बने। नहर से सिंचाई की आस लगाए बैठे किसानों का सपना भी अधर में लटका है। सिर्फ सल्लापुर माइनर ही नहीं बल्कि आठ और माइनर सूखी हैं।
जनपद में सिंचाई के लिए पूर्वी गंगा नहर परियोजना साल 1977 में तैयार हुई। उस वक्त इसकी मूल लागत 88 करोड़ रुपये आंकी गई। साल 1980 में केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद नहरों का जाल बिछाया गया। मुख्य नहर के साथ पांच शाखा नहर बनाते हुए इनके माइनर व अल्पिकाओं का निर्माण किया गया। अल्पिकाओं के बनाने का नंबर बाद में आया। इसी तरह साल 2006 में सल्लाहपुर माइनर बनाई जाने लगी। ताज्जुब की बात यह है कि तब से लेकर आज तक इस माइनर का निर्माण अभी तक अधर में लटका हुआ है। इसके अलावा आठ और माइनर अधर में लटकी हुई है। जिनका निर्माण अधर में लटका है, ये सभी सिंचाई खंड बिजनौर के कार्यक्षेत्र में आती हैं।
क्या बोले किसान
अभी तक नहीं आया पानी
गांव सल्लाहपुर के रहने वाले किसान विनीत ने बताया कि नहटौर शाखा नहर से सल्लाहपुर माइनर की खुदाई साल 2006 में शुरू हुई थी, जिससे नसीरपुर नैन सिंह तक के किसानों की सिंचाई होनी थी। अभी तक इसमें पानी नहीं आया।
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पानी से नहीं आने से उग गई झाड़
किसान प्रशांत कुमार ने बताया कि माइनर में पानी नहीं आने से झाड़ी उग आई हैं। माइनर का निर्माण पूरा नहीं होने से किसान परेशान हैं। नहर खेत के पास होने के बाद भी सिंचाई नहीं हो पाती।
पानी आने का कर रहे इंतजार
सल्लाहपुर के रहने वाले धनुराज ने बताया कि पिछले 10 से 12 सालों से किसान माइनर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। कई बार शिकायत की भी कई गई, इसके बाद भी माइनर का निर्माण पूरा नहीं हो पाया।
माइनर बनने का कोई लाभ नहीं
सुनील कुमार का कहना है कि गर्मी के मौसम में सिंचाई की सबसे ज्यादा जरुरत होती है। ऐसे में बिजली भी धोखा दे देती है। माइनर बनने का भी क्षेत्र के किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है। पता नहीं कब तक पानी आएगा।
पूर्वी गंगा नहर पर एक नजर...
मुख्य नहर की लंबाई 48.55 किमी.
पांच शाखाएं 155 किमी.
वितरण प्रणाली 1367 किमी.
वर्जन::
दस माइनर पिछले बीस साल से अटके हुए थे। मुआवजे को लेकर इन माइनर में बीच बीच में गैप बना हुआ था। प्रयास करते हुए एक माइनर के गैप को खत्म करते हुए चालू कर दिया गया है। अभी नौ माइनर का पूरा होना बाकी रह गया है। ये सभी जमीन नहीं मिलने के कारण अटके हुए हैं।
- विकास अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड
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बिजनौर। साल 2006 में सल्लाहपुर माइनर का निर्माण चालू हुआ, अब 16 साल बीत चुके हैं लेकिन माइनर में पानी नहीं आ सका। जिसकी वजह रही निर्माण बीच-बीच में पूरा नहीं होना। कहीं जमीन नहीं मिली, तो कहीं पुल नहीं बने। नहर से सिंचाई की आस लगाए बैठे किसानों का सपना भी अधर में लटका है। सिर्फ सल्लापुर माइनर ही नहीं बल्कि आठ और माइनर सूखी हैं।
जनपद में सिंचाई के लिए पूर्वी गंगा नहर परियोजना साल 1977 में तैयार हुई। उस वक्त इसकी मूल लागत 88 करोड़ रुपये आंकी गई। साल 1980 में केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद नहरों का जाल बिछाया गया। मुख्य नहर के साथ पांच शाखा नहर बनाते हुए इनके माइनर व अल्पिकाओं का निर्माण किया गया। अल्पिकाओं के बनाने का नंबर बाद में आया। इसी तरह साल 2006 में सल्लाहपुर माइनर बनाई जाने लगी। ताज्जुब की बात यह है कि तब से लेकर आज तक इस माइनर का निर्माण अभी तक अधर में लटका हुआ है। इसके अलावा आठ और माइनर अधर में लटकी हुई है। जिनका निर्माण अधर में लटका है, ये सभी सिंचाई खंड बिजनौर के कार्यक्षेत्र में आती हैं।
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क्या बोले किसान
अभी तक नहीं आया पानी
गांव सल्लाहपुर के रहने वाले किसान विनीत ने बताया कि नहटौर शाखा नहर से सल्लाहपुर माइनर की खुदाई साल 2006 में शुरू हुई थी, जिससे नसीरपुर नैन सिंह तक के किसानों की सिंचाई होनी थी। अभी तक इसमें पानी नहीं आया।
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पानी से नहीं आने से उग गई झाड़
किसान प्रशांत कुमार ने बताया कि माइनर में पानी नहीं आने से झाड़ी उग आई हैं। माइनर का निर्माण पूरा नहीं होने से किसान परेशान हैं। नहर खेत के पास होने के बाद भी सिंचाई नहीं हो पाती।
पानी आने का कर रहे इंतजार
सल्लाहपुर के रहने वाले धनुराज ने बताया कि पिछले 10 से 12 सालों से किसान माइनर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। कई बार शिकायत की भी कई गई, इसके बाद भी माइनर का निर्माण पूरा नहीं हो पाया।
माइनर बनने का कोई लाभ नहीं
सुनील कुमार का कहना है कि गर्मी के मौसम में सिंचाई की सबसे ज्यादा जरुरत होती है। ऐसे में बिजली भी धोखा दे देती है। माइनर बनने का भी क्षेत्र के किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ है। पता नहीं कब तक पानी आएगा।
पूर्वी गंगा नहर पर एक नजर...
मुख्य नहर की लंबाई 48.55 किमी.
पांच शाखाएं 155 किमी.
वितरण प्रणाली 1367 किमी.
वर्जन::
दस माइनर पिछले बीस साल से अटके हुए थे। मुआवजे को लेकर इन माइनर में बीच बीच में गैप बना हुआ था। प्रयास करते हुए एक माइनर के गैप को खत्म करते हुए चालू कर दिया गया है। अभी नौ माइनर का पूरा होना बाकी रह गया है। ये सभी जमीन नहीं मिलने के कारण अटके हुए हैं।
- विकास अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड