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जिला अस्पताल में चमकी बुखार के लिए दस बेड रिजर्व
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बिजनौर। चमकी बुखार और अन्य संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन अलर्ट हो गया है। इससे निजात पाने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने दस बेड रिजर्व किए हैं। चिकित्सकों की मानें तो अभी तक जिले में एक भी चमकी बुखार का केस सामने नहीं आया है, लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर दस बेड सुरक्षित किए गए हैं।
चिकित्सकों के अनुसार चमकी बुखार से बच्चों के मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। इसके लक्षण बहुत हल्के और फ्लू जैसे होते हैं। बुखार मांसपेशी या जोड़ों का दर्द, थकान या कमजोरी और सिरदर्द होने लगता है। अगर समय पर इलाज नहीं मिल पाता है तो इंसेफेलाइटिस अथवा चमकी बुखार से भ्रमित सोच, दौरे, इंद्रियों या गतिविधियों की समस्याओं, याददाश्त, दृष्टि, बोलने और सुनने की शक्ति क्षीण होने लगती है। साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत होती है। आमतौर पर यह वायरल संक्रमण के कारण होता है। यह आमतौर पर एंटी वायरल और एंटी इंफ्लेमेंटरी दवाओं से ठीक होता है। यह बीमारी आमतौर पर दस साल तक के बच्चों पर अधिक असर डालती है। ऐसे में लापरवाही बिल्कुल भी न करें और रोगी को तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। संक्रामक रोगों की होने की कोई उम्र नहीं होती। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन अलर्ट हो गया है। इसके लिए दस बेड रिजर्व कराए गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. सुखवीर सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में कुल 106 बेड हैं। इनमें से दस चमकी बुखार और अन्य संक्रामक रोगों के लिए रिजर्व कराए गए हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल पूरी तरह से तैयार है। पर्याप्त मात्रा में इमरजेंसी में 24 घंटे चिकित्सक और दवाएं उपलब्ध हैं।
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चिकित्सकों के अनुसार चमकी बुखार से बच्चों के मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। इसके लक्षण बहुत हल्के और फ्लू जैसे होते हैं। बुखार मांसपेशी या जोड़ों का दर्द, थकान या कमजोरी और सिरदर्द होने लगता है। अगर समय पर इलाज नहीं मिल पाता है तो इंसेफेलाइटिस अथवा चमकी बुखार से भ्रमित सोच, दौरे, इंद्रियों या गतिविधियों की समस्याओं, याददाश्त, दृष्टि, बोलने और सुनने की शक्ति क्षीण होने लगती है। साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत होती है। आमतौर पर यह वायरल संक्रमण के कारण होता है। यह आमतौर पर एंटी वायरल और एंटी इंफ्लेमेंटरी दवाओं से ठीक होता है। यह बीमारी आमतौर पर दस साल तक के बच्चों पर अधिक असर डालती है। ऐसे में लापरवाही बिल्कुल भी न करें और रोगी को तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। संक्रामक रोगों की होने की कोई उम्र नहीं होती। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन अलर्ट हो गया है। इसके लिए दस बेड रिजर्व कराए गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. सुखवीर सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में कुल 106 बेड हैं। इनमें से दस चमकी बुखार और अन्य संक्रामक रोगों के लिए रिजर्व कराए गए हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल पूरी तरह से तैयार है। पर्याप्त मात्रा में इमरजेंसी में 24 घंटे चिकित्सक और दवाएं उपलब्ध हैं।
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