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कागजों पर ही निपटा दिया क्षयरोगी खोज का कार्य
Updated Tue, 09 Jan 2018 11:33 PM IST
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नींदडू़ (बिजनौर) । क्षय रोगियों की पहचान के लिए जहां सरकार सतत प्रयास कर रही है, वहीं कर्मचारियों की लापरवाही से अभियान प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। मरीजों की पहचान के लिए बलगम के सैंपल इकट्ठा करने में लगी टीमों ने कई घरों में जाए बिना कागजों में जांच पूरी कर दी। कार्यक्रम प्रभारी चिकित्साधिकारी ने लापरवाही को गंभीरता से लेने की बात कही है। उधर, सुपरवाइजर ने कस्बे में दो केस पॉजीटिव पाए जाने की पुष्टि की है।
गौरतलब है कि सरकार ने क्षय रोगियों का पता लगाने के लिए 27 दिसंबर से 05 जनवरी तक घर-घर जाकर संक्रमित लोगों के बलगम का टेस्ट कराना सुनिश्चित किया गया था। नींदडू़ में 12 कर्मचारियों की चार टीमें लगाई गई थीं। टीम में शामिल कर्मचारियों को हर दरवाजे पर वस्तु स्थिति को अंकित करना था। जामा मसजिद क्षेत्र के कई घरों में टीम पहुंची ही नहीं। महबूब अहमद, नूर अहमद, मसरूर अहमद, मोहम्मद जफर, नसीम अहमद, इस्लामुद्दीन, बुंदू और वजीर अहमद आदि ने बताया कि टीबी रोग की पहचान के लिए उनके घर कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं आया, जबकि घर के बाहर दरवाजे पर उपस्थिति दर्ज कर दी गई। इस बाबत पूछे जाने पर टीबी कार्यक्रम के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर अशोक कुमार साहू ने कुछ घरों में कर्मचारियों के नहीं पहुंचने पर खेद जताया और अगले चरण में कोई घर नहीं छूटने का विश्वास दिलाया। उनके मुताबिक दस दिन की जांच के दौरान 110 व्यक्तियों के बलगम की जांच कराई गई। उनमें दो केस पॉजीटिव पाए गए। दोनों रोगियों का इलाज शुरू कर दिया गया है। दूसरी ओर पीएचसी धामपुर और क्षयरोग कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पीके गुप्ता ने स्वास्थ्य कर्मियों ने कुछ घरों में जाए बिना खानापूर्ति करने को गंभीर मामला बताते हुए उनसे पूछताछ की बात कही है। उन्होंने कहा कि मार्च में होने वाले दूसरे चरण के क्षय रोगी खोज अभियान में सभी घरों में जांच का कार्य कराया जाएगा।
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गौरतलब है कि सरकार ने क्षय रोगियों का पता लगाने के लिए 27 दिसंबर से 05 जनवरी तक घर-घर जाकर संक्रमित लोगों के बलगम का टेस्ट कराना सुनिश्चित किया गया था। नींदडू़ में 12 कर्मचारियों की चार टीमें लगाई गई थीं। टीम में शामिल कर्मचारियों को हर दरवाजे पर वस्तु स्थिति को अंकित करना था। जामा मसजिद क्षेत्र के कई घरों में टीम पहुंची ही नहीं। महबूब अहमद, नूर अहमद, मसरूर अहमद, मोहम्मद जफर, नसीम अहमद, इस्लामुद्दीन, बुंदू और वजीर अहमद आदि ने बताया कि टीबी रोग की पहचान के लिए उनके घर कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं आया, जबकि घर के बाहर दरवाजे पर उपस्थिति दर्ज कर दी गई। इस बाबत पूछे जाने पर टीबी कार्यक्रम के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर अशोक कुमार साहू ने कुछ घरों में कर्मचारियों के नहीं पहुंचने पर खेद जताया और अगले चरण में कोई घर नहीं छूटने का विश्वास दिलाया। उनके मुताबिक दस दिन की जांच के दौरान 110 व्यक्तियों के बलगम की जांच कराई गई। उनमें दो केस पॉजीटिव पाए गए। दोनों रोगियों का इलाज शुरू कर दिया गया है। दूसरी ओर पीएचसी धामपुर और क्षयरोग कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पीके गुप्ता ने स्वास्थ्य कर्मियों ने कुछ घरों में जाए बिना खानापूर्ति करने को गंभीर मामला बताते हुए उनसे पूछताछ की बात कही है। उन्होंने कहा कि मार्च में होने वाले दूसरे चरण के क्षय रोगी खोज अभियान में सभी घरों में जांच का कार्य कराया जाएगा।
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