{"_id":"5a3aaccf4f1c1b502b8b5ba2","slug":"151513794767-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य विभाग पर नह शिशु मृत्यु दर के आंकड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वास्थ्य विभाग पर नह शिशु मृत्यु दर के आंकड़े
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में शिशु मृत्यु दर के कोई आंकड़े मौजूद नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नहीं पता कि जिले में हर साल कितने शिशुओं की मृत्यु होती है। इससे अनुमान लगा सकते हैं कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने कार्यों के कितने ईमानदार है।
शासन ने जच्चा-बच्चा मृत्यु दर रोकने के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शासन के निर्देशों पर कोई अमल तक नहीं करते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हादसों से कोई सबक नहीं लेते है। जिला महिला अस्पताल में अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा प्रसव कराने के कारण 14 घंटों के भीतर पांच नवजात बच्चों की मौत हो गई। घटना ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शिशु मृत्यु दर क्या रोकेंगे, उन्हें तो जिले के शिशु मृत्यु दर के आंकड़े तक नहीं पता है। स्वास्थ्य विभाग पर सिर्फ मातृ मृत्यु दर के ही आंकड़े उपलब्ध हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कैसे शिशु मृत्यु दर पर रोक लगाएंगे यह सोचने वाली बात है। हालांकि जिला महिला अस्पताल से प्रत्येक माह की रिपोर्ट बनाकर सीएमओ कार्यालय को भेजी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शिशु मृत्यु दर की रिपोर्ट भी शासन को नहीं भेजते हैं।
सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने बताया कि वह लखनऊ में हैं। जब बिजनौर आएंगे तभी शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों के बारे में बताएंगे। उनका कहना है कि वैसे आंकड़े तो जिला महिला अस्पताल में होते हैं। उधर, महिला अस्पताल के सूत्रों का यह कहना है कि उनके यहां इस तरह के कोई आंकड़े नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शासन ने जच्चा-बच्चा मृत्यु दर रोकने के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शासन के निर्देशों पर कोई अमल तक नहीं करते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हादसों से कोई सबक नहीं लेते है। जिला महिला अस्पताल में अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा प्रसव कराने के कारण 14 घंटों के भीतर पांच नवजात बच्चों की मौत हो गई। घटना ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शिशु मृत्यु दर क्या रोकेंगे, उन्हें तो जिले के शिशु मृत्यु दर के आंकड़े तक नहीं पता है। स्वास्थ्य विभाग पर सिर्फ मातृ मृत्यु दर के ही आंकड़े उपलब्ध हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कैसे शिशु मृत्यु दर पर रोक लगाएंगे यह सोचने वाली बात है। हालांकि जिला महिला अस्पताल से प्रत्येक माह की रिपोर्ट बनाकर सीएमओ कार्यालय को भेजी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शिशु मृत्यु दर की रिपोर्ट भी शासन को नहीं भेजते हैं।
विज्ञापन
सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने बताया कि वह लखनऊ में हैं। जब बिजनौर आएंगे तभी शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों के बारे में बताएंगे। उनका कहना है कि वैसे आंकड़े तो जिला महिला अस्पताल में होते हैं। उधर, महिला अस्पताल के सूत्रों का यह कहना है कि उनके यहां इस तरह के कोई आंकड़े नहीं है।
विज्ञापन