Meerut गांव में घुसा 150 किलो का मगरमच्छ, ग्रामीणों में मची अफरा-तफरी, दो घंटे बाद वन विभाग ने किया रेस्क्यू
मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र के बड़ी चामरोध गांव में गंगा नदी से भटककर करीब 150 किलो का मगरमच्छ पहुंच गया। ग्रामीणों में दहशत के बीच वन विभाग ने दो घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू कर उसे गंगा नदी में छोड़ दिया।
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हस्तिनापुर में शुक्रवार देर रात बड़ी चामरोध गांव में एक विशाल मगरमच्छ के घुस आने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। बताया गया कि यह मगरमच्छ गंगा नदी से भटककर सोती नदी के रास्ते गांव तक पहुंच गया था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू किया।
झाड़ियों में छिप गया मगरमच्छ, टीम को करना पड़ा घेराव
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय के नेतृत्व में पहुंची टीम को शुरुआत में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। मगरमच्छ झाड़ियों के बीच छिप गया था, जिससे उसे ढूंढना और पकड़ना मुश्किल हो गया।
टीम ने झाड़ियों की कटाई कर इलाके की घेराबंदी की और रणनीतिक तरीके से मगरमच्छ को एक सुरक्षित दिशा में नियंत्रित किया। वन विभाग के मुताबिक मगरमच्छ पूरी तरह वयस्क और आक्रामक अवस्था में था, इसलिए बेहद सावधानी के साथ ऑपरेशन चलाया गया।
2.25 मीटर लंबा और 150 किलो वजनी मगरमच्छ
करीब दो घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया। पकड़े गए मगरमच्छ की लंबाई करीब 2.25 मीटर और वजन लगभग 150 किलोग्राम बताया गया है। रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को दोबारा गंगा नदी में सुरक्षित छोड़ दिया।
मार्श क्रोकोडाइल प्रजाति का था मगरमच्छ
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय के अनुसार पकड़ा गया मगरमच्छ नर प्रजाति का मार्श क्रोकोडाइल था। यह प्रजाति नदियों, तालाबों और दलदली क्षेत्रों में पाई जाती है और आमतौर पर मछलियों, पक्षियों व छोटे जीवों का शिकार करती है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गंगा नदी का पारिस्थितिकी तंत्र जैव विविधता से समृद्ध है, जहां मगरमच्छ, घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन, कछुए और कई जल पक्षी पाए जाते हैं। वन विभाग द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण और रेस्क्यू के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।