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14 सेनानियों ने सहीं जेल यातनाएं
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नींदडू में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम में स्मरणीय योगदान के लिए राष्ट?
- फोटो : BIJNOR
मनकुआं की तीन महिलाओं समेत 14 सेनानियों ने सही जेल की यातनाएं
नींदडू़। स्वतंत्रता के आंदोलन में मनकुआं (बिजनौर) से जिन 14 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भाग लिया उनमें किशोर व तीन महिलाएं भी थी। 13 अक्तूबर 1929 को डॉ. लाखन सिंह अपनी माता हरदेई, किशोर मनोहर सिंह अपनी माता फूलवती देवी व प्रवीण सिंह अपनी माता युद्धिया देवी के साथ गांधी जी के विचार सुनने के लिए पैदल केएम इंटर कॉलेज धामपुर गए थे। गांधी के विचारों से प्रभावित डॉ. लाखन सिंह को 1932, 1942 और 1943 में जेल भेजा गया। उनके पौत्र कीर्ति कुमार ने बताया कि वह करीब तीन वर्ष जेल में रहे। अदालत ने रुपये 150 का आर्थिक दंड लगाया। जुर्माना नहीं देने पर दो बार कुर्की की गई। महिलाओं के आभूषण, घर के बर्तन, चारपाई, तख्त, किवाड़, चौखटें, छत की कड़ियां, रथ, बेलगाड़ी एवं पशु आदि कुर्क किया गया। डा. साहब की माता हरदेई पत्नी फतेह सिंह को 1933 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
किशोर मनोहर सिंह (17) को निषेधाज्ञा तोड़ने के जुर्म में जेल भेजा गया। पौत्र चेतन कुमार ने बताया कि मनोहर सिंह को घारा 188 आईपीसी के तहत 18 जनवरी 1932 से छह अगस्त 1932 तक बिजनौर, लखनऊ, मुजफ्फर नगर, बरेली कारावास में रखा गया। रुपये 160 जुर्माना लगाया गया। अवयस्क थे, इसलिए बच्चा जेल में बान बंटने का कार्य दिया गया। उनकी माता फूलवती देवी पत्नी मोखी सिंह को 1933 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अर्थदंड वसूलने के लिए घर का सारा सामान कुर्क किया गया। प्रवीण सिंह ने 25 फरवरी 1932 से एक सितंबर 1932 तक बरेली व मुरादाबाद जेल में छह महीने चार दिन की सजा काटी। घर वालों को उत्पीड़न से बचाने के लिए प्रताप सिंह पुत्र श्री शिवराज सिंह निवासी बांस खेड़ा थाना काशीपुर जिला नैनीताल के रूप में जेल यात्रा की। पौत्र देवराज सिंह बताते हैं कि शासन को नाम बदलने का पता लग गया। आर्थिक दंड नहीं भरने के कारण कुर्की की गई। उनकी माता युद्धिया देवी भी 1933 में अन्य महिलाओं के साथ जेल गईं।
मनकुआं के गुलजारी सिंह 1932 में, बिहारी सिंह 1932 व 41 में, अमृत लाल 1932 व 41 में, रंजीत सिंह 1932 व 41 में, बसंत सिंह 1941 में, रघुवीर सिंह 1941 में एवं शिवदयाल सिंह 1932 में जेल गए तथा यातनाएं सहीं। आजादी के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मान स्वरूप अशोक चिंह से सुसज्जित ताम्रपत्र प्रदान किए गए। ताम्रपत्र पर स्वतंत्रता के पच्चीसवें वर्ष के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में स्मरणीय योगदान के लिए राष्ट्र की ओर से प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने यह ताम्रपत्र भेंट किया, लिखा है।
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नींदडू़। स्वतंत्रता के आंदोलन में मनकुआं (बिजनौर) से जिन 14 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भाग लिया उनमें किशोर व तीन महिलाएं भी थी। 13 अक्तूबर 1929 को डॉ. लाखन सिंह अपनी माता हरदेई, किशोर मनोहर सिंह अपनी माता फूलवती देवी व प्रवीण सिंह अपनी माता युद्धिया देवी के साथ गांधी जी के विचार सुनने के लिए पैदल केएम इंटर कॉलेज धामपुर गए थे। गांधी के विचारों से प्रभावित डॉ. लाखन सिंह को 1932, 1942 और 1943 में जेल भेजा गया। उनके पौत्र कीर्ति कुमार ने बताया कि वह करीब तीन वर्ष जेल में रहे। अदालत ने रुपये 150 का आर्थिक दंड लगाया। जुर्माना नहीं देने पर दो बार कुर्की की गई। महिलाओं के आभूषण, घर के बर्तन, चारपाई, तख्त, किवाड़, चौखटें, छत की कड़ियां, रथ, बेलगाड़ी एवं पशु आदि कुर्क किया गया। डा. साहब की माता हरदेई पत्नी फतेह सिंह को 1933 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
किशोर मनोहर सिंह (17) को निषेधाज्ञा तोड़ने के जुर्म में जेल भेजा गया। पौत्र चेतन कुमार ने बताया कि मनोहर सिंह को घारा 188 आईपीसी के तहत 18 जनवरी 1932 से छह अगस्त 1932 तक बिजनौर, लखनऊ, मुजफ्फर नगर, बरेली कारावास में रखा गया। रुपये 160 जुर्माना लगाया गया। अवयस्क थे, इसलिए बच्चा जेल में बान बंटने का कार्य दिया गया। उनकी माता फूलवती देवी पत्नी मोखी सिंह को 1933 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अर्थदंड वसूलने के लिए घर का सारा सामान कुर्क किया गया। प्रवीण सिंह ने 25 फरवरी 1932 से एक सितंबर 1932 तक बरेली व मुरादाबाद जेल में छह महीने चार दिन की सजा काटी। घर वालों को उत्पीड़न से बचाने के लिए प्रताप सिंह पुत्र श्री शिवराज सिंह निवासी बांस खेड़ा थाना काशीपुर जिला नैनीताल के रूप में जेल यात्रा की। पौत्र देवराज सिंह बताते हैं कि शासन को नाम बदलने का पता लग गया। आर्थिक दंड नहीं भरने के कारण कुर्की की गई। उनकी माता युद्धिया देवी भी 1933 में अन्य महिलाओं के साथ जेल गईं।
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मनकुआं के गुलजारी सिंह 1932 में, बिहारी सिंह 1932 व 41 में, अमृत लाल 1932 व 41 में, रंजीत सिंह 1932 व 41 में, बसंत सिंह 1941 में, रघुवीर सिंह 1941 में एवं शिवदयाल सिंह 1932 में जेल गए तथा यातनाएं सहीं। आजादी के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मान स्वरूप अशोक चिंह से सुसज्जित ताम्रपत्र प्रदान किए गए। ताम्रपत्र पर स्वतंत्रता के पच्चीसवें वर्ष के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में स्मरणीय योगदान के लिए राष्ट्र की ओर से प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने यह ताम्रपत्र भेंट किया, लिखा है।

नींदडू के लाखन सिंह।- फोटो : BIJNOR

नींदडू के प्रवीण सिह।- फोटो : BIJNOR

नींदडू के मनोहर सिंह।- फोटो : BIJNOR

नींदडू के रंजीत सिंह।- फोटो : BIJNOR
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