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सेकिंड सटर डे का अवकाश होने के बाद भी किसानों का छठवें दिन भी पशुओं के साथ तहसील पर कब्जा
Updated Sat, 13 Oct 2018 11:54 PM IST
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पशुओं के साथ तहसील पर डटे रहे किसान
धामपुर। भाकियू कार्यकर्ताओं का शनिवार को भी तहसील पर पूरी तरह से कब्जा रहा। किसान तहसीलदार कार्यालय के बाहर पशुओं के साथ धरने पर डटे है। किसानों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार की नीति को किसान विरोधी बताया। किसानों ने कहा कि आश्वासन पर नहीं, स्थायी रूप से मांग पूरी होने पर ही वह यहां से उठेंगे। भाकियू जिलाध्यक्ष ने निदान न होने पर 15 अक्तूबर को धामपुर में धरने को महापंचायत में बदलने का एलान कर दिया है।
अफजलगढ़ के किसानों ने सेकेंड सटर-डे के कारण तहसील में अवकाश होने के बाद भी धरने पर डटे रहे। तहसील अध्यक्ष देवराज सिंह ने कहा कि जब तक उनकी समस्या का निदान नहीं होगा, किसान यहां से नहीं उठेंगे। उनके द्वारा भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत को घटना के बारे में अवगत करा दिया गया है। प्रशासन, भाजपा सरकार के दबाव में जानबूझकर किसानों को कुचलने का प्रयास कर रहा है। जब किसान 70 सालों से जिस जमीन पर खेतीबाड़ी कर 2008 तक जमीन की फर्द लेते रहे हैं तो इसके बाद उन्हें फर्द क्यों नहीं दी जा रही है। फर्द के न मिलने से 50 गांवों के 10 हजार किसानों के गन्ना सट्टे बंद होने से संबंधित किसानों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। जब उनका गन्ने की आपूर्ति नहीं होगी, तो वे ऐसे में जी कर क्या करेंगे। अभी तो वह अपने पशुओं को लेकर तहसील में आए हैं। रविवार से महिलाएं भी धरने पर पहुंचने शुरू हो जाएंगी। ब्लाक अध्यक्ष दर्शन सिंह फौजी, हरिराज सिंह, गजेंद्र सिंह टिकैत, कविराज सिंह ने कहा कि किसानों को प्रशासन की बंदर घुड़की में आकर घबराने की जरूरत नहीं है। उनका लक्ष्य किसानों की एक-एक समस्या का निदान कराना है। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भाजपा की यूपी और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने सरकार पर भाजपा विरोधी होने का आरोप लगाते हुए अबकी बार लोकसभा चुनाव में सत्ता से बाहर करने का संकल्प लेकर गांव-गांव में विरोध करने को एलान किया। धरने में रामकुमार, रघुवीर सिंह जाट, दीवान सिंह, रणजीत सिंह, अशोक कुमार, सतीश कुमार, बलकरन सिंह, संजीव कुमार, क्षेत्रपाल सिंह, श्याम सिंह, रामस्वरूप सिंह, कृपाल सिंह, दीप सिंह, शीशराम सिंह, फूल सिंह, लक्ष्मण सैनी रहे।
ठंड व भूख की चपेट में आने से दो गाय बीमार
किसानों ने कहा कि जब वह पशुओं के साथ तहसील में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो उनके और पशुुओं के खाने की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए। पर बार-बार अवगत कराने के बाद भी एसडीएम कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य और तहसीलदार भान सिंह ने दो दिन बाद भी पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था नहीं कराई। ठंड की चपेट में आने से तहसील में बंधे उनकी दो गाय बीमार हो गई, जबकि प्रदेेेश और केंद्र की भाजपा सरकार गायों का माता मान कर उनकी पूजा करने बात कहती है। उनके बार बार बताने के बाद भी बीमार पशुओं का उपचार नहीं कराया गया।
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चारा नहीं मिला तो अपना निवाला पशुओं को खिलाया: तहसील अध्यक्ष
तहसील अध्यक्ष देवराज सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से पशु चारे की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में किसानों ने रोटी पशुओं को खिलाई। चेताया कि यदि उनके किसी पशु की भूख से या फिर ठंड की चपेट में आने से मौत हो गई तो वह बर्दाश्त नहीं करेंगे।
पशु बीमार हो रहे हैं तो घर ले जाए: तहसीलदार
तहसीलदार भान सिंह का कहना है कि यदि ठंड और भूख से पशु बीमार हो रहे हैं तो किसान इन्हें तहसील से अपने घरों को लेकर चले जाए। प्रशासन के पास इस प्रकार से चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। किसानों की शुक्रवार को डीएम से समस्याओं के निदान की मांग को लेकर वार्ता हुई थी। समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कल रविवार का अवकाश है। सोमवार को ही समाधान के बारे में ही निष्कर्ष निकलने की संभावना बन सकती है।
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धामपुर। भाकियू कार्यकर्ताओं का शनिवार को भी तहसील पर पूरी तरह से कब्जा रहा। किसान तहसीलदार कार्यालय के बाहर पशुओं के साथ धरने पर डटे है। किसानों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार की नीति को किसान विरोधी बताया। किसानों ने कहा कि आश्वासन पर नहीं, स्थायी रूप से मांग पूरी होने पर ही वह यहां से उठेंगे। भाकियू जिलाध्यक्ष ने निदान न होने पर 15 अक्तूबर को धामपुर में धरने को महापंचायत में बदलने का एलान कर दिया है।
अफजलगढ़ के किसानों ने सेकेंड सटर-डे के कारण तहसील में अवकाश होने के बाद भी धरने पर डटे रहे। तहसील अध्यक्ष देवराज सिंह ने कहा कि जब तक उनकी समस्या का निदान नहीं होगा, किसान यहां से नहीं उठेंगे। उनके द्वारा भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत को घटना के बारे में अवगत करा दिया गया है। प्रशासन, भाजपा सरकार के दबाव में जानबूझकर किसानों को कुचलने का प्रयास कर रहा है। जब किसान 70 सालों से जिस जमीन पर खेतीबाड़ी कर 2008 तक जमीन की फर्द लेते रहे हैं तो इसके बाद उन्हें फर्द क्यों नहीं दी जा रही है। फर्द के न मिलने से 50 गांवों के 10 हजार किसानों के गन्ना सट्टे बंद होने से संबंधित किसानों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। जब उनका गन्ने की आपूर्ति नहीं होगी, तो वे ऐसे में जी कर क्या करेंगे। अभी तो वह अपने पशुओं को लेकर तहसील में आए हैं। रविवार से महिलाएं भी धरने पर पहुंचने शुरू हो जाएंगी। ब्लाक अध्यक्ष दर्शन सिंह फौजी, हरिराज सिंह, गजेंद्र सिंह टिकैत, कविराज सिंह ने कहा कि किसानों को प्रशासन की बंदर घुड़की में आकर घबराने की जरूरत नहीं है। उनका लक्ष्य किसानों की एक-एक समस्या का निदान कराना है। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भाजपा की यूपी और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने सरकार पर भाजपा विरोधी होने का आरोप लगाते हुए अबकी बार लोकसभा चुनाव में सत्ता से बाहर करने का संकल्प लेकर गांव-गांव में विरोध करने को एलान किया। धरने में रामकुमार, रघुवीर सिंह जाट, दीवान सिंह, रणजीत सिंह, अशोक कुमार, सतीश कुमार, बलकरन सिंह, संजीव कुमार, क्षेत्रपाल सिंह, श्याम सिंह, रामस्वरूप सिंह, कृपाल सिंह, दीप सिंह, शीशराम सिंह, फूल सिंह, लक्ष्मण सैनी रहे।
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ठंड व भूख की चपेट में आने से दो गाय बीमार
किसानों ने कहा कि जब वह पशुओं के साथ तहसील में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो उनके और पशुुओं के खाने की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए। पर बार-बार अवगत कराने के बाद भी एसडीएम कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य और तहसीलदार भान सिंह ने दो दिन बाद भी पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था नहीं कराई। ठंड की चपेट में आने से तहसील में बंधे उनकी दो गाय बीमार हो गई, जबकि प्रदेेेश और केंद्र की भाजपा सरकार गायों का माता मान कर उनकी पूजा करने बात कहती है। उनके बार बार बताने के बाद भी बीमार पशुओं का उपचार नहीं कराया गया।
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चारा नहीं मिला तो अपना निवाला पशुओं को खिलाया: तहसील अध्यक्ष
तहसील अध्यक्ष देवराज सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से पशु चारे की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में किसानों ने रोटी पशुओं को खिलाई। चेताया कि यदि उनके किसी पशु की भूख से या फिर ठंड की चपेट में आने से मौत हो गई तो वह बर्दाश्त नहीं करेंगे।
पशु बीमार हो रहे हैं तो घर ले जाए: तहसीलदार
तहसीलदार भान सिंह का कहना है कि यदि ठंड और भूख से पशु बीमार हो रहे हैं तो किसान इन्हें तहसील से अपने घरों को लेकर चले जाए। प्रशासन के पास इस प्रकार से चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। किसानों की शुक्रवार को डीएम से समस्याओं के निदान की मांग को लेकर वार्ता हुई थी। समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कल रविवार का अवकाश है। सोमवार को ही समाधान के बारे में ही निष्कर्ष निकलने की संभावना बन सकती है।