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दूसरी जगह बसाने की मांग कर रहे कालागढ़वासी
Updated Mon, 01 Oct 2018 12:01 AM IST
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दूसरी जगह बसाने की मांग कर रहे कालागढ़वासी
कालागढ़। एनजीटी के आदेशों के बाद लोग नगर से पलायन को मजबूर हो गई है। इन परिवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उन्हें किसी दूरी जगह बसाने की मांग की है।
कालागढ़ को सन 1960-70 में बसाया गया था। यहां बड़े पैमाने में सरकारी भवन बनाए गए। इन मकानों को सरकारी कर्मचारियों को दिया गया था। लेकिन धीरे धीरे सभी वर्ग मजदूर, व्यापारी इन भवनों में काबिज हो गए। दशकों से ये परिवार इन मकानों में रह रहे हैं। अब एनजीटी ने इन भवनों को खाली कराकर तोड़ने के आदेश दिए हैं। यह जमीन वन विभाग को दी जा रही है। प्रशासन ने इन मकानों को खाली कराने का काम शुरू कर दिया है। मकानों में रह रहे परिवारों में हड़कंप मचा हुआ है। परिवारों में रहने वाले पवन यादव, सुशील, अजय, राकेश कुमार आदि का कहना है कि उनका जन्म कालागढ़ में ही हुआ। उत्तर प्रदेश राज्य पुर्नगठन के बाद से ही यहां की जनता के बुरे दिन शुरू हो गए। उन्हें यहां से निकाला जा रहा है। लेकिन उनके दूसरी जगह बसाने की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश किसी भी राज्य की सरकार उनका साथ नहीं दे रही है। वोट लेने वाले नेता भी उन्हें भूल गए हैं। उधर, धार्मिक स्थलों के बारे में भी प्रशासन कोई स्पष्ट जवाब न दे पाया है। जबकि यहां पर गुरुद्वारा, मंदिर, मस्जिद, कब्रिस्तान सभी कुछ है। पहले हुई बेदखली की कार्रवाई के दौरान इन स्थलों को सुरक्षा दी जाती रही है। वर्तमान प्रशासन इस ओर से भी आंखें मूंदे है।
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कालागढ़। एनजीटी के आदेशों के बाद लोग नगर से पलायन को मजबूर हो गई है। इन परिवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उन्हें किसी दूरी जगह बसाने की मांग की है।
कालागढ़ को सन 1960-70 में बसाया गया था। यहां बड़े पैमाने में सरकारी भवन बनाए गए। इन मकानों को सरकारी कर्मचारियों को दिया गया था। लेकिन धीरे धीरे सभी वर्ग मजदूर, व्यापारी इन भवनों में काबिज हो गए। दशकों से ये परिवार इन मकानों में रह रहे हैं। अब एनजीटी ने इन भवनों को खाली कराकर तोड़ने के आदेश दिए हैं। यह जमीन वन विभाग को दी जा रही है। प्रशासन ने इन मकानों को खाली कराने का काम शुरू कर दिया है। मकानों में रह रहे परिवारों में हड़कंप मचा हुआ है। परिवारों में रहने वाले पवन यादव, सुशील, अजय, राकेश कुमार आदि का कहना है कि उनका जन्म कालागढ़ में ही हुआ। उत्तर प्रदेश राज्य पुर्नगठन के बाद से ही यहां की जनता के बुरे दिन शुरू हो गए। उन्हें यहां से निकाला जा रहा है। लेकिन उनके दूसरी जगह बसाने की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश किसी भी राज्य की सरकार उनका साथ नहीं दे रही है। वोट लेने वाले नेता भी उन्हें भूल गए हैं। उधर, धार्मिक स्थलों के बारे में भी प्रशासन कोई स्पष्ट जवाब न दे पाया है। जबकि यहां पर गुरुद्वारा, मंदिर, मस्जिद, कब्रिस्तान सभी कुछ है। पहले हुई बेदखली की कार्रवाई के दौरान इन स्थलों को सुरक्षा दी जाती रही है। वर्तमान प्रशासन इस ओर से भी आंखें मूंदे है।
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