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सुबह तुरबतों और दोपहर बाद इमामबाड़ों से निकला ताजियों का जुलूस
Updated Mon, 02 Oct 2017 02:07 AM IST
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लकड़ा में मजलिस के बाद गौहर ने कराया जंजीर का मातम
अंजुमने तहफ्फुजे अजादारी के तत्वावधान में निकाले गए जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
दस मुहर्रम पर सुबह तुरबतों व दोपहर एक बजे बाद ताजियों का जुलूस निकला। प्रत्येक इमामबाड़े से जुलूस बरामद हुआ। लकड़ा में मजलिस के बाद जंजीर का मातम किया गया।
आज का दिन आशूर का दिन है। इसी दिन कर्बला में इमाम हुसैन को यजीद की फौज ने उनके 72 साथियों के साथ शहीद कर दिया। इमाम हुसैन के काफिले में सबसे पहले हजरत हुर जंग के लिए गए और शहीद हुए। इसके बाद हजरत इमाम हुसैन के दोस्त, रिश्तेदार एक-एक होकर जंग के लिए जाते रहे और शहीद होते रहे। अंत में हजरत अब्बास, भाई और हजरत अली अकबर के बेटे भी शहीद हो गए। इमाम हुसैन के एक बेटे हजरत जैनुलाबेदीन जो बीमार थे, जंग करने नहीं जा सकते थे जो जिंदा बचे। बाकी इमाम हुसैन के छह माह के बच्चे हजरत अली असगर तक को शहीद कर दिया गया। इमाम हुसैन की शहादत के बाद कर्बला में आंधियां चलने लगी। कायनात के बादशाह को कत्ल कर दिया गया। हजरत जैनब, इमाम हुसैन की बहन और सभी औरतों का रो-रोकर बुरा हाल था। एक कोहराम मचा था।
रविवार की सुबह छह बजे तुरबतों के जुलूस का निकलना शुरू हुआ जो इमामबाड़ा नूरन, दानिशमंदान, शफातपोता, काजीजादा, हक्कानी, गुजरी, लकड़ा, जाफरी, पचदरा से निकाली गईं और कर्बला में जाकर दफन हुईं। इमामबाड़ा लकड़ा में प्रात: दस बजे मजलिस बरपा हुई और दुलदुल निकाला गया। गौहर ने जंजीर का मातम कराया। दोपहर एक बजे ताजियों का जुलूस शुरू हुआ जो मोहल्ला अहमदनगर, लकड़ा, सट्टी, हक्कानी, सद्दो, मजापोता, बगला, जाफरी, चाहगौरी, शफातपोता, गंज, लाल मस्जिद से निकाल गए। इनमें शफातपोता का ताजिया 34 फिट की ऊंचाई का था जिसके लिए बिजली के तार काटे गए। यह तालिया नौबतखाना, काजीजादा, खारी कुआ, चाहगौरी, दानिशमंदान, बगला, कोतवाली, दरबारे कलां, कटकुई होते हुए अपने-अपने इमामबाड़े को वापस हो गए। जुलूस का संचालन अंजुमने रजाकाराने हुसैनी के सदर शाने मुज्तबा, जनरल सेकेट्री खुर्शीद हैदर जैदी, जिया एजाज, हुसैन हैदर, शाने मेंहदी, अफजाल मुनाजिर, सै.रजी, नजीर हैदर, चंदन, इकबाल, तकी, गुलाम सज्जाद आदि ने किया। जुलूस की निगरानी अंजुमने तहफ्फुजे अजादारी के सदर वकारुल हसनैन खां व जनरल सेकेट्री हुसैन अब्बास कर रहे थे।
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अंजुमने तहफ्फुजे अजादारी के तत्वावधान में निकाले गए जुलूस
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
दस मुहर्रम पर सुबह तुरबतों व दोपहर एक बजे बाद ताजियों का जुलूस निकला। प्रत्येक इमामबाड़े से जुलूस बरामद हुआ। लकड़ा में मजलिस के बाद जंजीर का मातम किया गया।
आज का दिन आशूर का दिन है। इसी दिन कर्बला में इमाम हुसैन को यजीद की फौज ने उनके 72 साथियों के साथ शहीद कर दिया। इमाम हुसैन के काफिले में सबसे पहले हजरत हुर जंग के लिए गए और शहीद हुए। इसके बाद हजरत इमाम हुसैन के दोस्त, रिश्तेदार एक-एक होकर जंग के लिए जाते रहे और शहीद होते रहे। अंत में हजरत अब्बास, भाई और हजरत अली अकबर के बेटे भी शहीद हो गए। इमाम हुसैन के एक बेटे हजरत जैनुलाबेदीन जो बीमार थे, जंग करने नहीं जा सकते थे जो जिंदा बचे। बाकी इमाम हुसैन के छह माह के बच्चे हजरत अली असगर तक को शहीद कर दिया गया। इमाम हुसैन की शहादत के बाद कर्बला में आंधियां चलने लगी। कायनात के बादशाह को कत्ल कर दिया गया। हजरत जैनब, इमाम हुसैन की बहन और सभी औरतों का रो-रोकर बुरा हाल था। एक कोहराम मचा था।
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रविवार की सुबह छह बजे तुरबतों के जुलूस का निकलना शुरू हुआ जो इमामबाड़ा नूरन, दानिशमंदान, शफातपोता, काजीजादा, हक्कानी, गुजरी, लकड़ा, जाफरी, पचदरा से निकाली गईं और कर्बला में जाकर दफन हुईं। इमामबाड़ा लकड़ा में प्रात: दस बजे मजलिस बरपा हुई और दुलदुल निकाला गया। गौहर ने जंजीर का मातम कराया। दोपहर एक बजे ताजियों का जुलूस शुरू हुआ जो मोहल्ला अहमदनगर, लकड़ा, सट्टी, हक्कानी, सद्दो, मजापोता, बगला, जाफरी, चाहगौरी, शफातपोता, गंज, लाल मस्जिद से निकाल गए। इनमें शफातपोता का ताजिया 34 फिट की ऊंचाई का था जिसके लिए बिजली के तार काटे गए। यह तालिया नौबतखाना, काजीजादा, खारी कुआ, चाहगौरी, दानिशमंदान, बगला, कोतवाली, दरबारे कलां, कटकुई होते हुए अपने-अपने इमामबाड़े को वापस हो गए। जुलूस का संचालन अंजुमने रजाकाराने हुसैनी के सदर शाने मुज्तबा, जनरल सेकेट्री खुर्शीद हैदर जैदी, जिया एजाज, हुसैन हैदर, शाने मेंहदी, अफजाल मुनाजिर, सै.रजी, नजीर हैदर, चंदन, इकबाल, तकी, गुलाम सज्जाद आदि ने किया। जुलूस की निगरानी अंजुमने तहफ्फुजे अजादारी के सदर वकारुल हसनैन खां व जनरल सेकेट्री हुसैन अब्बास कर रहे थे।
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