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पेट्रोल छिड़कर तीन परिजनों की मौत के हवाले करने का प्रकरण
Updated Tue, 01 Aug 2017 12:43 AM IST
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नजीबाबाद। होटल कारोबारी मो. यूनुस का परिवार उस दिन को नहीं भूला पा रहा जब अपने ही खून ने परिवार के गहरी नींद में सो रहे तीन सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया था। जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा अपने पुत्र सहित तीन को मौत की नींद सुलाने के आरोपी मो.इरफान उर्फ नाका को फांसी की सजा सुनाने के फैसले को पीड़ित परिवार ने इंसाफ मिलने की बात कही है।
मोहल्ला मुगलूशाह की घनी आबादी के बीच होटल कारोबारी हाजी मो. यूनुस का परिवार रहता है। मो. यूनुस के अपराधी प्रवृत्ति से जुड़े भतीजे मो.इरफान पुत्र स्व.अय्यूब ने 4/5 अगस्त 2014 को देर रात एक ऐसी घटना को अंजाम दिया था जिसमें परिवार ही नहीं नगर सहम गया था। मो. इरफान ने अपने दो सगे भाईयों नौशाद 24 वर्ष, इरशाद 22 वर्ष तथा अपने 16 वर्षीय पुत्र इस्लामुद्दीन को सोते समय कमरे में पेट्रोल छिड़कर आग के हवाले कर दिया था। आधी रात घटी घटना में चीखपुकार सुनकर जब तक कमरा खोला गया तब तक तीनों बुरी तरह आग से झुलस गए थे। गंभीर रूप से झुलस इरशाद ने 8 अगस्त को, नौशाद ने 18 अगस्त को और इस्लामुद्दीन ने 19 अगस्त 2014 को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया के अस्पताल में दम तोड़ दिया था। मृतक नौशाद घटना से कुछ ही दिन पहले अरब से नजीबाबाद आया था। 11 दिन के भीतर तीन मौत से मो. यूनुस का परिवार बुरी तरह टूट गया। मामले की पैरवी कर रहे मो. यूनुस कहते हैं कि इरफान को फांसी की सजा देकर न्यायालय ने उनके साथ इंसाफ किया है। उधर आरोपी के भाई मो.शाहनवाज उर्फ शानू का कहना है कि उनके बड़े मो.इरफान ने परिवार पर जो कहर बरपाया था उसकी सजा फांसी ही थी। शाहनवाज का कहना है कि इरफान को अपने पुत्र सहित तीन परिजनों की जान लेने के बावजूद कोई मलाल नहीं था।
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मोहल्ला मुगलूशाह की घनी आबादी के बीच होटल कारोबारी हाजी मो. यूनुस का परिवार रहता है। मो. यूनुस के अपराधी प्रवृत्ति से जुड़े भतीजे मो.इरफान पुत्र स्व.अय्यूब ने 4/5 अगस्त 2014 को देर रात एक ऐसी घटना को अंजाम दिया था जिसमें परिवार ही नहीं नगर सहम गया था। मो. इरफान ने अपने दो सगे भाईयों नौशाद 24 वर्ष, इरशाद 22 वर्ष तथा अपने 16 वर्षीय पुत्र इस्लामुद्दीन को सोते समय कमरे में पेट्रोल छिड़कर आग के हवाले कर दिया था। आधी रात घटी घटना में चीखपुकार सुनकर जब तक कमरा खोला गया तब तक तीनों बुरी तरह आग से झुलस गए थे। गंभीर रूप से झुलस इरशाद ने 8 अगस्त को, नौशाद ने 18 अगस्त को और इस्लामुद्दीन ने 19 अगस्त 2014 को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया के अस्पताल में दम तोड़ दिया था। मृतक नौशाद घटना से कुछ ही दिन पहले अरब से नजीबाबाद आया था। 11 दिन के भीतर तीन मौत से मो. यूनुस का परिवार बुरी तरह टूट गया। मामले की पैरवी कर रहे मो. यूनुस कहते हैं कि इरफान को फांसी की सजा देकर न्यायालय ने उनके साथ इंसाफ किया है। उधर आरोपी के भाई मो.शाहनवाज उर्फ शानू का कहना है कि उनके बड़े मो.इरफान ने परिवार पर जो कहर बरपाया था उसकी सजा फांसी ही थी। शाहनवाज का कहना है कि इरफान को अपने पुत्र सहित तीन परिजनों की जान लेने के बावजूद कोई मलाल नहीं था।
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