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हटाने के आदेश के बावजूद पालिका में सवा दो साल काम करते रहे 11 सफाई कर्मचारी

Sun, 29 Nov 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 11:30 PM IST
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11 employees continue to work even after the High Court adjournment
बढ़ापुर। शासन के नगर पंचायत के 11 सफाई कर्मियों को हटाने के आदेश पर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश सवा जो साल पहले निरस्त हो गया और उसके बाद भी ये सफाई कर्मी कार्य करते रहे। इनमें दो सफाई कर्मी सेवानिवृत्त हो गए है, जिनमें एक ने अपनी उम्र के आधार पर सेवानिवृत्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दी और उसकी पैरवी के लिए ईओ हाईकोर्ट पहुंचे तो जानकारी हुई कि इनकी नियुक्ति पर दिया गया स्थगन आदेश ही निरस्त हो गया है। इसके बाद इन्हें हटाया गया है।
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वर्ष 1989 से 1994 के दौरान नगर पंचायत के तत्कालीन चेयरमैन नरेंद्र कुमार अग्रवाल के कार्यकाल में 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। वर्ष 2003 में प्रशासन की ओर से कराई गई जांच में इनकी नियुक्ति को अवैध माना गया। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई। तत्कालीन डीएम राजाराम उपाध्याय ने शासन के आदेश पर इन कर्मचारियों को हटाने के आदेश किए। इस आदेश के खिलाफ हटाए गए कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इनकी रिट संख्या 33692/2003 में कर्मचारियों के पक्ष में स्थगन आदेश पारित कर दिया था तब से ये कर्मचारी नौकरी कर रहे थे। हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2018 को स्थगन आदेश निरस्त कर दिया। जिसका पता ना कर्मचारियों को चला और न ही नगर पंचायत प्रशासन को। ये 11 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी स्थगन आदेश निरस्त होने के बाद भी लगातार कार्य करते रहे और वेतन और पेंशन पाते रहे। अब अधिशासी अधिकारी सेवाराम राजभर ने 25 नवंबर को इन 11 कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया है। इस संबंध में प्रभावित कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में अपील करने की बात कही है। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष शराफत हुसैन ने बोर्ड में प्रस्ताव पारित कर कर्मचारियों को बहाल करने व इस मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।
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हटाए गए कर्मचारियों से होगी रिकवरी
बढ़ापुर। ईओ सेवाराम राजभर का कहना है कि कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में जो स्थगन आदेश दिया था वह निरस्त होने पर कर्मचारियों को हटाया गया है। उनसे पहले नगर पंचायत में कुछ ही माह के अंतराल पर ईओ बदलते रहे है। स्थगन आदेश का पता नहीं चलने का कारण भी यही रहा होगा। उन्होंने सेवा से हटाए गए कर्मचारियों से इस अवधि में दिए गये वेतन की रिकवरी कराने की बात कही है।
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ऐसे चला हाईकोर्ट के आदेश का पता
ईओ सेवाराम राजभर ने बताया कि दो कर्मचारी सुरेंद्र व शफीक सेवानिवृत्त हो गए। शफीक ने अपनी उम्र को लेकर उच्च न्यायालय में अपने रिटायरमेंट को लेकर चुनौती दी, जिसके बाद ईओ नगर पंचायत की ओर से अपना पक्ष रखने उच्च न्यायालय पहुंचे, तब जाकर अधिवक्ता से इन कर्मचारियों के पक्ष में जारी स्थगन आदेश के निरस्त होने का पता चला।
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