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कभी भी गिर सकता है उझारी की पाठशाला का भवन
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:13 AM IST
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उझारी (अमरोहा)। प्राथमिक विद्यालय उझारी का भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है जोकि, कभी गिर सकता है। इसके बाद भी प्रशासन और विभाग स्कूल की सुध लेने को तैयार नहीं है। शायद किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
तहसील क्षेत्र कुछ प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल ऐसे भी है जो अपनी जर्जर हालत पर आंसू बहा रहे हैं उनमे से एक है उझारी का प्राथमिक विद्यालय प्रथम। उझारी के प्राथमिक विद्यालय प्रथम का बरामदा खतरे से खाली नहीं है। इसकी छत से सीमेंट के टुकड़े गिरने की बात काफी पुरानी हो चुकी है। शिक्षा विभाग के आला अफसरों को अवगत कराने की बात की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि इस विषय में लिखित और मौखिक शिकायत विभाग के प्रशासनिक अफसरों से करते करते वह थक चुके है लेकिन नतीजा सिफर ही निकला है। इस बारे में सहायक बेसिक शिक्षा अधिकरी को अवगत कराया तो उन्होंने बजट नहीं होने की बात कही। विद्यालय की छत की मरम्मत नहीं होने के कारण मासूम स्कूली बच्चे टूटी हुई छत के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। विद्यालय के बरामदे की छत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शिक्षा विभाग नामांकन पर तो जोर दे रहा है मगर लगता है जैसे विद्यालय की हालत सुधारने की तरफ उसका कोई ध्यान नहीं है। जबकि इस विद्यालय में इस समय एक सौ बारह बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
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तहसील क्षेत्र कुछ प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल ऐसे भी है जो अपनी जर्जर हालत पर आंसू बहा रहे हैं उनमे से एक है उझारी का प्राथमिक विद्यालय प्रथम। उझारी के प्राथमिक विद्यालय प्रथम का बरामदा खतरे से खाली नहीं है। इसकी छत से सीमेंट के टुकड़े गिरने की बात काफी पुरानी हो चुकी है। शिक्षा विभाग के आला अफसरों को अवगत कराने की बात की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि इस विषय में लिखित और मौखिक शिकायत विभाग के प्रशासनिक अफसरों से करते करते वह थक चुके है लेकिन नतीजा सिफर ही निकला है। इस बारे में सहायक बेसिक शिक्षा अधिकरी को अवगत कराया तो उन्होंने बजट नहीं होने की बात कही। विद्यालय की छत की मरम्मत नहीं होने के कारण मासूम स्कूली बच्चे टूटी हुई छत के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। विद्यालय के बरामदे की छत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शिक्षा विभाग नामांकन पर तो जोर दे रहा है मगर लगता है जैसे विद्यालय की हालत सुधारने की तरफ उसका कोई ध्यान नहीं है। जबकि इस विद्यालय में इस समय एक सौ बारह बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
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