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आखिर कहां गए भदोही के 28 लाख पौधे

Wed, 22 Apr 2020 04:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2020 04:03 PM IST
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Where did Bhadohi's 28 lakh plants go
भदोही जिले के मोरवा नदी के किनारे सूखे पड़े पौधे। - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर (भदोही)। नौ अगस्त 2018 को पौधरोपण महाकुंभ के अंतर्गत जब भदोही जिले में 19 लाख पौधों को लगाने का प्रशासनिक दावा किया गया तो उम्मीद जताई जा रही थी कि इनमें से आधी पौध भी अगर जिंदा रह गई तो भदोही जिले का शून्य वन क्षेत्र के आंकड़े का कलंक धुल जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। 2019 के जुलाई-अगस्त में भी नौ लाख से अधिक पौधे लगाने के बावजूद जिले का वन क्षेत्र शून्य ही रहा। यही नहीं दो साल में 28 लाख पौधे लगने के दावे के बाद भी वृक्ष आच्छादित क्षेत्र (ट्री-कवर एरिया) भी केवल 0.3 फीसदी तक ही पहुंच पाया। अब सवाल उठता है कि इतनी बड़ी तादाद में कराए गए पौधरोपण का क्या हुआ। क्या जो पौधे लगाए गए, उन्हें बचाया नहीं जा सका। या बचाया भी गया तो कितने फीसदी। अथवा महज आंकड़ों की बाजीगरी के बूते पौधरोपण के कागजी घोड़े ही दौड़ाए गए।
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पूरी दुनिया विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर धरती को बचाने और हरियाली बिखेर कर इसकी धानी चुनर सहेजने को लेकर ढोल पीट रही है। लॉकडाउन के चलते सोशल मीडिया पर भी बैठे-बिठाए जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है। मगर, मखमली कालीनों के लिए दुनिया भर में मशहूर भदोही जिले में धरती के सबसे खूबसूरत आभूषण हरियाली को दबे पांव कुचला जा रहा है। काशी और प्रयागराज जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक नगरों के मध्य स्थित इस सैंडविच जिले की हरियाली बेनूर होती दिख रही है। यहां पेड़-पौधों की संख्या गिनती की होकर रह गई है। फॉरेस्ट सर्वे रिपोर्ट-2019 के मुताबिक 1015 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले भदोही जिले में ट्री-कवर एरिया महज 3.12 वर्ग किमी है। वनक्षेत्र है ही नहीं। इससे जिले में पौधरोपण अभियानों की सफलता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। जब हरियाली ही नहीं रहेगी तो धरती की सुरक्षा का आधार क्या रहेगा।
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देखरेख के अभाव में सूखते हैं पौधे: डीएफओ
ज्ञानपुर। भदोही जिले के प्रभागीय वनाधिकारी आलोक सक्सेना कहते हैं कि पौधरोपण अभियान में अलग-अलग विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी जाती है। अपने विभाग की तरफ से मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि वन विभाग जो पौधे लगाता है, उनमें से ज्यादातर पौधे बचे रहते हैं। मगर दूसरे विभागों की ओर से कराए गए पौधरोपण के बचने की गारंटी नहीं दे सकता। क्योंकि वह केवल पौधे लगाकर भूल जाते हैं। जबकि पौधों की देखरेख भी बेहद जरूरी है, नहीं तो वह नष्ट हो जाएंगे। यही वजह है कि कम पौधे बच रहे हैं।
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जुलाई-अगस्त में फिर लगेंगे नौ लाख पौधे
ज्ञानपुर। इस वर्ष जुलाई-अगस्त में फिर भदोही जिले में लगभग नौ लाख पौधे लगाए जाएंगे। शासन से वन विभाग को इसका लक्ष्य मिल चुका है। इनमें से तीन लाख पौधे वन विभाग लगवाएगा, जबकि शेष छह लाख पौधे लगाने की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों की रहेगी। डीएफओ के मुताबिक पौधरोपण के जरिए हरियाली बिखेरने का प्रयास किया जाएगा।
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