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मौसम ने बदला मिजाज, बढ़ी धुकधुकी
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी के मौसम का मिजाज बुधवार को अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छा गए और हल्की हवाएं चलने से मौसम का मिजाज नरम हो गया। इससे खेत और खलिहान में काटकर फसल छोड़ने वाले किसान चिंतित हो गए। दूसरी ओर गेहूं आदि की बुवाई कर सिंचाई का इंतजार कर रहे किसानों ने थोड़ी राहत महसूस की।
मौसम का मिजाज बुधवार को अचानक बदला। सुबह हुई तो आसमान में बादल छाए हुए थे। थोड़ी देर धूप बिखेरने के बाद सूर्यदेव बादलों की ओट में छिप गए और दोपहर बाद तक लुकाछिपी का खेल चलता रहा। इससे मौसम का मिजाज बिगड़ा गया। जानकार अगले 24 से 48 घंटे के दौरान बारिश होने की संभावना से भी इनकार नहीं कर रहे थे। इससे गेहूं की बुवाई के बाद पहली सिंचाई का इंतजार कर रहे किसानों ने तो राहत की सांस ली, लेकिन खेत-खलिहान में काटकर छोड़ी गई फसल की चिंता में तमाम किसान बेहाल हो गए। उनका कहना था कि अगर ऐसा हुआ तो समस्या बढ़ जाएगी। साथ ही जिन निचले में पिछले दिनों हुई बारिश के कारण अब तक जलभराव है और वहां की फसल नहीं कट पाई है, उनकी चिंता और बढ़ गई। उनका कहना था कि लगातार पानी से उनकी बची-खुची फसल अब सड़ जाएगी। किसान कड़ेदीन ने कहा कि जलनिकासी न होने से अब तक खेतों में पानी भरा है। उन खेतों के सूखने की संभावना फिलहाल नहीं दिखती। बारिश हो गई तो मुश्किलें और बढ़ेंगी।
उधर कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि इस मौसम की बारिश ज्यादा नुकसानदेय नहीं होगी। थोड़ी बारिश से गेहूं और आलू की फसलों के लिए फायदा ही रहेगा। अगर ज्यादा बारिश हुई तो खेत-खलिहान में पकी फसलों को नुकसान हो सकता है।
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मौसम का मिजाज बुधवार को अचानक बदला। सुबह हुई तो आसमान में बादल छाए हुए थे। थोड़ी देर धूप बिखेरने के बाद सूर्यदेव बादलों की ओट में छिप गए और दोपहर बाद तक लुकाछिपी का खेल चलता रहा। इससे मौसम का मिजाज बिगड़ा गया। जानकार अगले 24 से 48 घंटे के दौरान बारिश होने की संभावना से भी इनकार नहीं कर रहे थे। इससे गेहूं की बुवाई के बाद पहली सिंचाई का इंतजार कर रहे किसानों ने तो राहत की सांस ली, लेकिन खेत-खलिहान में काटकर छोड़ी गई फसल की चिंता में तमाम किसान बेहाल हो गए। उनका कहना था कि अगर ऐसा हुआ तो समस्या बढ़ जाएगी। साथ ही जिन निचले में पिछले दिनों हुई बारिश के कारण अब तक जलभराव है और वहां की फसल नहीं कट पाई है, उनकी चिंता और बढ़ गई। उनका कहना था कि लगातार पानी से उनकी बची-खुची फसल अब सड़ जाएगी। किसान कड़ेदीन ने कहा कि जलनिकासी न होने से अब तक खेतों में पानी भरा है। उन खेतों के सूखने की संभावना फिलहाल नहीं दिखती। बारिश हो गई तो मुश्किलें और बढ़ेंगी।
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उधर कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि इस मौसम की बारिश ज्यादा नुकसानदेय नहीं होगी। थोड़ी बारिश से गेहूं और आलू की फसलों के लिए फायदा ही रहेगा। अगर ज्यादा बारिश हुई तो खेत-खलिहान में पकी फसलों को नुकसान हो सकता है।
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