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विजय के गढ़ में विपुल का सिक्का, तोड़ा 20 साल का रिकार्ड
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ज्ञानपुर विधानसभा से जीते भाजपा-निषाद गठबंधन प्रत्याशी विपुल दुबे को माला पहनाते समर्थक।
- फोटो : BHADOHI
पूर्वांचल की वीआईपी सीटों में शामिल भदोही जिले की ज्ञानपुर सीट पर इस बार कई रिकार्ड टूटे हैं। यहां भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी के उम्मीदवार विपुल दूबे ने केवल विजय मिश्र के गढ़ में अपना सिक्का ही नहीं जमाया, बल्कि बीते 20 साल का रिकार्ड भी तोड़ दिया। उन्होंने बाहुबली विधायकों में शुमार चार बार विधायक रहे विजय मिश्र और पूर्व मंत्री सपा नेता राम किशोर बिंद को पटखनी दी है। विपुल के आगे दोनों बड़े नेता न तो अपनी सियासत बचा सके और न ही अपनी राजनीतिक विरासत किसी को सौंप सके।
2002 के चुनाव में ज्ञानपुर सीट से सपा के उम्मीदवार बने विजय मिश्र ने जीत की शुरूआत की थी। उसके बाद चार बार लगातार जीते। किसी की भी लहर रही हो लेकिन यहां से विजय मिश्रा ही जीतते थे। 2007 में जब बसपा की लहर थी तब भी जीते और 2012 में सपा, 2017 के मोदी लहर में भी विजय मिश्र ही जीते, लेकिन इस बार उनकी एक नहीं चली। जेल से ही चुनाव लड़े, लेकिन विपुल ने उन्हें ऐसी पटखनी दी कि तीसरे नंबर पर चले गए। इस चुनाव में विजय मिश्र की पुत्री और उनकी पत्नी दोनों प्रचार कर रहीं थीं। विजय की विरासत को संभालने की तैयारी थी, लेकिन संभाल नहीं सकी। वहीं हाल राम किशोर बिंद का भी था। 74 वर्ष की उम्र में वह पुन: विधायक बनने के लिए मैदान में थे, लेकिन सपना टूट गया।
ये रिकार्ड टूटे -
1- 2002, 2007, 2012 और 2017 में चार चुनावों में लगातार विजय मिश्रा विधायक बने। उन्हें हराने के लिए राजनीतिक दलों ने एक से बढ़कर एक दांव खेला था, लेकिन नहीं चला। इस बार विपुल ने रिकार्ड तोड़ दिया।
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2- दो दशक से यहां किसी की लहर नहीं चली थी। लहर के विपरीत परिणाम आता था, लेकिन इस बार योगी-मोदी फैक्टर का असर दिखा, भाजपा के सहयोगी दल को जीत मिली।
3- महज चालीस साल की उम्र में विधायक बने वह भी दो-दो बड़े नेताओं केे पराजित करके। जनपद सृजन के बाद पहला ऐसा मौका है जब इतनी कम उम्र का प्रत्याशी विधायक बना।
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2002 के चुनाव में ज्ञानपुर सीट से सपा के उम्मीदवार बने विजय मिश्र ने जीत की शुरूआत की थी। उसके बाद चार बार लगातार जीते। किसी की भी लहर रही हो लेकिन यहां से विजय मिश्रा ही जीतते थे। 2007 में जब बसपा की लहर थी तब भी जीते और 2012 में सपा, 2017 के मोदी लहर में भी विजय मिश्र ही जीते, लेकिन इस बार उनकी एक नहीं चली। जेल से ही चुनाव लड़े, लेकिन विपुल ने उन्हें ऐसी पटखनी दी कि तीसरे नंबर पर चले गए। इस चुनाव में विजय मिश्र की पुत्री और उनकी पत्नी दोनों प्रचार कर रहीं थीं। विजय की विरासत को संभालने की तैयारी थी, लेकिन संभाल नहीं सकी। वहीं हाल राम किशोर बिंद का भी था। 74 वर्ष की उम्र में वह पुन: विधायक बनने के लिए मैदान में थे, लेकिन सपना टूट गया।
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ये रिकार्ड टूटे -
1- 2002, 2007, 2012 और 2017 में चार चुनावों में लगातार विजय मिश्रा विधायक बने। उन्हें हराने के लिए राजनीतिक दलों ने एक से बढ़कर एक दांव खेला था, लेकिन नहीं चला। इस बार विपुल ने रिकार्ड तोड़ दिया।
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2- दो दशक से यहां किसी की लहर नहीं चली थी। लहर के विपरीत परिणाम आता था, लेकिन इस बार योगी-मोदी फैक्टर का असर दिखा, भाजपा के सहयोगी दल को जीत मिली।
3- महज चालीस साल की उम्र में विधायक बने वह भी दो-दो बड़े नेताओं केे पराजित करके। जनपद सृजन के बाद पहला ऐसा मौका है जब इतनी कम उम्र का प्रत्याशी विधायक बना।