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जटिल व्यवस्था के आगे बेबस किसान
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ज्ञानपुर/दुर्गागंज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के हित को लेकर भले ही घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर इसका पुरसाहाल नहीं है। केसीसी से लेकर ऋण आदि लेना लोहे के चने चबाने जैसा है। कमीशनखोरी के आगे किसान हारकर घर बैठ जाते हैं।
जिले में दो लाख से अधिक पंजीकृत किसान हैं। पीएम किसान योजना से जुड़ने के बाद करीब 40 हजार किसानों ने केसीसी बनवाया, लेकिन बैंकों से ऋण गिने चुने किसानों को ही मिल पाता है। किसान को उद्यमी बनाने की मुहिम पहले से गर्त में जाती दिख रही है। चकहर दयाल के किसान सोहनलाल ने थ्रेशर रोटावेटर, राइसमिल ले लिए और अब उनको अनुदान की आवश्यकता हैं। मंदी में संजीवनी साबित होने वाली छूट की प्रक्रिया इतनी जटिल हो गई है कि लाभ नहीं मिल सका। कमोबेश अन्य किसान को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। केसीसी का भी यही हाल है।
किसानों से केसीसी के लिए आवेदन मांगे गए थे लेकिन अभी तक 10 फीसदी किसानों को केसीसी से जोड़ा नहीं जा सका। जिनकी केसीसी बनी है बैंक उन्हें लाभ नहीं दे रहे। अर्जुनपुर के किसान संदीप कुमार,रमेश चन्द्र ने बताया बैंक ऑफ बड़ौदा सुरियावां में केसीसी का आवेदन जमा किया था। केवल 10 हजार दिया गया, उतने में कौन सा व्यवसाय शुरू करे। इसी तरह अभोली ब्लॉक के अभोली, गंगारामपुर, दानुपुर, गुवाली, आनंद डीह, के किसानों ने कृषि विभाग में फार्म जमा करके बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं। किसी को लोन नहीं मिला। एक तरफ बिजली और डीजल की मार और दूसरी तरफ कृषि विभाग संग बैंकों की जटिलता में ही फंसकर रह जा रहे है। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि विभाग की तरफ से पूरा सहयोग किसानों का किया जाता है। बैंकों की तरफ से लापरवाही की जाती है। जिससे किसानों को परेशान होना पड़ता है।
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जिले में दो लाख से अधिक पंजीकृत किसान हैं। पीएम किसान योजना से जुड़ने के बाद करीब 40 हजार किसानों ने केसीसी बनवाया, लेकिन बैंकों से ऋण गिने चुने किसानों को ही मिल पाता है। किसान को उद्यमी बनाने की मुहिम पहले से गर्त में जाती दिख रही है। चकहर दयाल के किसान सोहनलाल ने थ्रेशर रोटावेटर, राइसमिल ले लिए और अब उनको अनुदान की आवश्यकता हैं। मंदी में संजीवनी साबित होने वाली छूट की प्रक्रिया इतनी जटिल हो गई है कि लाभ नहीं मिल सका। कमोबेश अन्य किसान को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। केसीसी का भी यही हाल है।
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किसानों से केसीसी के लिए आवेदन मांगे गए थे लेकिन अभी तक 10 फीसदी किसानों को केसीसी से जोड़ा नहीं जा सका। जिनकी केसीसी बनी है बैंक उन्हें लाभ नहीं दे रहे। अर्जुनपुर के किसान संदीप कुमार,रमेश चन्द्र ने बताया बैंक ऑफ बड़ौदा सुरियावां में केसीसी का आवेदन जमा किया था। केवल 10 हजार दिया गया, उतने में कौन सा व्यवसाय शुरू करे। इसी तरह अभोली ब्लॉक के अभोली, गंगारामपुर, दानुपुर, गुवाली, आनंद डीह, के किसानों ने कृषि विभाग में फार्म जमा करके बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं। किसी को लोन नहीं मिला। एक तरफ बिजली और डीजल की मार और दूसरी तरफ कृषि विभाग संग बैंकों की जटिलता में ही फंसकर रह जा रहे है। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि विभाग की तरफ से पूरा सहयोग किसानों का किया जाता है। बैंकों की तरफ से लापरवाही की जाती है। जिससे किसानों को परेशान होना पड़ता है।
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