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भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन आज
अमर उजाला ब्यूरो, भदोही
Updated Mon, 07 Aug 2017 12:03 AM IST
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girls buying rakhi
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भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन को लेकर जिले में तैयारी तेज हो गई है। रविवार को जिले भर के बाजारों में मिठाई और राखी खरीदने के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी। तरह-तरह की राखियों संग बहनों ने मिठाईयां खरीदी। भाई भी रक्षाबंधन पर अपनी बहनों को देने के लिए गिफ्ट की खरीदारी की।
चंद्रगहण लगने से राखी बांधने का शुभ समय इस बार थोड़े समय के लिए ही होगा।
सावन मास के पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व की तैयारी वैसे तो एक सप्ताह से चल रही है। जो बहनें अपने भाइयों से दूर रह रही हैं वह डाक के माध्यम से राखियां भेज चुकी हैं । रविवार को ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, जंगीगंज, सुरियावां, मोढ़, चौरी समेत अन्य बाजारों में खरीदारी को लेकर भीड़ रही। वैसे इस त्यौहार को लेकर कई कथानक हैं। लेकिन वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है। कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में निहित होती है।
आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ला का कहना है कि च्रदग्रहण के चलते इस बार राखी बांधने का समय सुबह 11:04 से शुरू होकर दोपहर 01:28 बजे तक ही है। उसके बाद चंद्रग्रहण शुरू हो जाएगा। हिंदू पंचांग के मुताबिक, श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाले इस त्योहार पर बहन अपने भाई की कलाई पर अपना संपूर्ण प्यार रक्षा (राखी) के रूप में बांध कर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती है, जिसके बाद भाई कुछ उपहार देकर भविष्य में संकट के समय सहायता और रक्षा देने का वचन देता है।
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रक्षाबंधन को लेकर बहनों में उत्साह
लालानगर। रक्षाबंधन पर्व को लेकर बहनों में खासा उत्साह है। बहनें भाई की कलाई में राखी बांधने के लिए आकर्षक राखियां खरीद रही हैं। छात्रा माला दुबे बताती हैं कि इस बार वो अपने भाई को सरप्राइज राखी बांधने वाली है, जिसमें उन्होंने ऑनलाइन राखी का ऑर्डर किया है. जो उन्हें रक्षाबंधन के दिन ही उनके घर पर कोरियर से मिलेगा। लवली शर्मा ने कहा कि भाई को राखी बांधने के साथ गिफ्ट में घड़ी देने वाली हैं। कहा मैं हर बार भैया से गिफ्ट लेती थी, इस बार उन्हें गिफ्ट देकर इस पर्व को खास बनाना चाहती हूं।
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चंद्रगहण लगने से राखी बांधने का शुभ समय इस बार थोड़े समय के लिए ही होगा।
सावन मास के पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व की तैयारी वैसे तो एक सप्ताह से चल रही है। जो बहनें अपने भाइयों से दूर रह रही हैं वह डाक के माध्यम से राखियां भेज चुकी हैं । रविवार को ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, जंगीगंज, सुरियावां, मोढ़, चौरी समेत अन्य बाजारों में खरीदारी को लेकर भीड़ रही। वैसे इस त्यौहार को लेकर कई कथानक हैं। लेकिन वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है। कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में निहित होती है।
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आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ला का कहना है कि च्रदग्रहण के चलते इस बार राखी बांधने का समय सुबह 11:04 से शुरू होकर दोपहर 01:28 बजे तक ही है। उसके बाद चंद्रग्रहण शुरू हो जाएगा। हिंदू पंचांग के मुताबिक, श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाले इस त्योहार पर बहन अपने भाई की कलाई पर अपना संपूर्ण प्यार रक्षा (राखी) के रूप में बांध कर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती है, जिसके बाद भाई कुछ उपहार देकर भविष्य में संकट के समय सहायता और रक्षा देने का वचन देता है।
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रक्षाबंधन को लेकर बहनों में उत्साह
लालानगर। रक्षाबंधन पर्व को लेकर बहनों में खासा उत्साह है। बहनें भाई की कलाई में राखी बांधने के लिए आकर्षक राखियां खरीद रही हैं। छात्रा माला दुबे बताती हैं कि इस बार वो अपने भाई को सरप्राइज राखी बांधने वाली है, जिसमें उन्होंने ऑनलाइन राखी का ऑर्डर किया है. जो उन्हें रक्षाबंधन के दिन ही उनके घर पर कोरियर से मिलेगा। लवली शर्मा ने कहा कि भाई को राखी बांधने के साथ गिफ्ट में घड़ी देने वाली हैं। कहा मैं हर बार भैया से गिफ्ट लेती थी, इस बार उन्हें गिफ्ट देकर इस पर्व को खास बनाना चाहती हूं।