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ठंड में ठिठुरे बेजुबान, कई बीमार

Sat, 04 Dec 2021 12:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 12:24 AM IST
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The voiceless chilled in the cold, many sick
जिले में गो संरक्षण के लिए खुले 23 आश्रय स्थलों में कई स्थानों पर अव्यवस्था बेजुबानों के लिए मुसीबत बन गई है। ठंड में संचालकों की लापरवाही से पांच आश्रय स्थलों पर कई मवेशी बीमार हो गए हैं। समय से उपचार न मिला तो उनकी जान भी जा सकती है।
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शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने डीघ के मीनापुर, अभोली के असईपुर पशु आश्रय स्थलों की पड़ताल की। जहां पर ठंड से बचाव का कोई इंतजाम नहीं मिला। अभोली ब्लॉक के असईपुर अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल राम भरोसे चल रहा है। यहां ठंड से बचाव के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इस आश्रय स्थल में 50 पशुओं की रखने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान 111 पशु रखे गए है। ठंड की व्यवस्था नहीं होने से पशुओं के ठंड से दम तोड़ने की आशंका बनी हुई है। आश्रय स्थल के संचालक ग्राम प्रधान श्रीराम यादव ने बताया कि यहां 50 निराश्रित पशुओं को रखने क्षमता है, लेकिन इस समय 111 पशु संरक्षित किए गए हैं। चार लाख से अधिक चारा पानी में खर्च कर चुके हैं, लेकिन अब भी बजट नहीं मिलने से पशुओं को चारा पानी समेत ठंड से बचाव का इंतजाम करना भारी पड़ रहा है। डूडवा में स्थित गो वंश आश्रय स्थल के संचालक आशीष शुक्ला ने बताया है कि पशुओं के लिए भूषा कुट्टी की व्यवस्था अपने खर्च पर किए हैं। ठंड से बचाव के लिए ग्राउंड के चारों ओर हवा रोधी त्रिपाल लगाएं हैं। वर्तमान में 670 गो वंश रखे गए हैं लेकिन चार माह से बजट न होने से चारा पानी का संकट है। डीघ के मीनापुर स्थित आश्रय स्थल पर भी काफी अव्यवस्था है। जल निकासी की सुविधा न होने से परिसर में जगह-जगह जलभराव है। इससे ठंड से मवेशियों को दिक्कत हो रही है। यहां के कर्मचारी कुल्लूर और कपूर का कहना है कि 10 मवेशी बीमार हैं। ज्ञात हो, जिले में पशुओं को संरक्षित करने के लिए 23 आश्रय स्थल बनाए गए हैं, इनमें पशुओं को रखने की क्षमता 3,500 है जबकि 4,544 पशु रखे गए हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी जय सिंह का कहना है कि पशुओं को ठंड से बचाव के लिए ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए गए हैं। जिन आश्रय स्थलों का भुगतान नहीं हुआ है, उन्हें जल्द ही कर दिया जाएगा। कुछ पशु आश्रय स्थलों में क्षमता से ज्यादा मवेशी हैं। इसको देखते हुए दो आश्रय स्थल और बनाए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर मवेेेशी बीमार हैं। जिनके उपचार के लिए संबंधित पशु चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं।
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