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इस गणतंत्र भी रोटी की जंग...

Sun, 26 Jan 2020 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jan 2020 01:12 AM IST
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The Republic is also ... in bhadohi
ज्ञानपुर। 10 साल की सलीशा इस बात से पूरी तरह नावाकिफ है कि वह कूड़े के ढेर के नीचे वह अपने बचपन को दफन कर रही है। चीथड़ों में लिपटा आठ-नौ वर्ष का शंभू भी नन्हीं सी उम्र में प्लास्टिक बीन कर दो जून की रोटी का लक्ष्य पूरा करने के लिए जुटे परिवार की दैनिक गाड़ी का मजबूत पहिया बन चला है। सुबह से देर शाम तक कूड़े बीनने वाले ये बच्चे भूख मिटाने के लिए लोगों से भोजन और कपड़े मांग कर काम चलाते हैं। इन दोनों की तरह तमाम मासूम उस तंत्र को आईना दिखा रहे हैं, जिसका ढोल हम एक बार फिर पीटने जा रहे हैं।
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मतलब साफ है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम संविधान लागू होने के 70 वर्ष पूरे कर चुके होंगे, लेकिन एक बड़ी आबादी अब भी रोटी की जंग लड़ रही है। मासूम पढ़ने-लिखने की उम्र में कूड़ा बीनने को मजबूर हैं और घूम-घूम कर खाना मांग रहे हैं तो आधी आबादी (महिलाएं) अब भी अधिकारों के लिए जूझ रही है। मखमली कालीनों के लिए पूरी दुनिया में पहचाने जाने वाले भदोही जिले में मासूमों और महिलाओं का शोषण चरम पर है। पढ़ने-खेलने की उम्र में बच्चों के कारखानों से लेकर होटल-ढाबों और विभिन्न प्रतिष्ठानों पर हाड़तोड़ मेहनत उद्योग जगत की स्याह हकीकत की तस्वीर बयां करता है। हाल के दिनों में विभिन्न कालीन कारखानों से जिले में 25 से अधिक बालश्रमिक निकल भागे। बिचौलियों के झांसे में आकर वे बंधुआ मजदूरी के दलदल में फंस गए। खास बात यह कि इनमें से ज्यादातर बालश्रमिक खुद ही बंदिशों के अहाते से बाहर निकले। श्रम विभाग और अन्य एजेंसियों का उन्हें मुक्त कराने में खास योगदान नहीं रहा। बाद में श्रेय लेने की होड़ भले ही मच गई। इसी तरह महिलाओं के साथ औसतन हर रोज सामने आने वाली दो-चार आपराधिक वारदातें आधी आबादी की पीड़ा बयां करती रहीं हैं। हैरत की बात यह है कि बुरी तरह शोषित बच्चों और महिला समाज की सिसकियां व्यवस्था के झंडाबरदारों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
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न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. अनिल श्रीवास्तव कहते हैं कि जिले में बालश्रम और बंधुआ मजदूरी की शिकायतें आए दिन सामने आ रहीं हैं। इसके लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों को समय-समय पर न्यायपीठ अपने स्तर पर ताकीद करती रहती है। श्रम विभाग को बालश्रम की समस्या पर खास ध्यान देना चाहिए।
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