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आफत की बारिश में घुल गई बेटी का हाथ पीला कराने की तमन्ना

Sat, 23 Oct 2021 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 Oct 2021 12:15 AM IST
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The desire to make the daughter's hand yellow dissolved in the rain of calamity
ज्ञानपुर। जिले में बीते दिनों हुई आफत की बारिश से किसानों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। जिले के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर लोग खेती से ही अपने घर की गृहस्थी संभालते हैं। बेटी की शादी हो या किसी संबंधी की मदद करनी हो। हर काम में खेती से होने वाली आय ही अहम होती है। इस बार भी किसानों ने बड़ी उम्मीद के साथ खेती किया कि उत्पादन अच्छा होगा और उसे बेचकर बेटी का हाथ पीला कराएंगे, लेकिन बारिश में कई की तमन्ना धुल गई। अब चिंता सता रही है कि आखिर शादी होगी कैसे। या तो कम खर्च में ही करें या फिर कर्ज लेना पड़ेगा।
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अभोली की रहने वाली सुरेखा देवी बताती हैं कि उनकी बेटी की शादी अगले ही महीने 20 नवंबर को है। तीन-चार महीने पहले शादी तय करते समय तिथि इस लिए नवंबर में तय किया कि खेती से मिलने वाला पैसा उसमें खर्च होगा। कहती हैं कि तीन बीघे खेत किराए पर लेकर की हैं। धान की फसल अच्छी थी, लेकिन बारिश के कारण फसल लोट गई। अब किसी से कर्ज लेना पड़ेगा। खेत में पानी भरा होने के कारण गेहूं की खेती भी प्रभावित हो रही है। इसी तरह बौरी बोझ निवासी तीजू राम की तमन्ना थी कि धान होगा तो उसे बेचकर आशियाना मुकम्मल कराएंगे, लेकिन आफत की बारिश ने पानी फेर दिया। अर्जुनपुर की इंद्रावती देवी कहती हैं कि इस साल फसल अच्छी थी। कटने के बाद बेटी की शादी तय करने की तमन्ना थी। अब कुछ कुछ समय आगे बढ़ाना पड़ेगा। खर्च के लिए विकल्प तलाशने होंगे। यहीं हाल रमेश चंद्र को घर को ठीक कराने की इच्छा थी। खेती प्रभावित होने से चिंतित हैं।
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बोले विशेषज्ञ: सरसो की खेती पिछड़ी, उत्पादन पर होगा असर
ज्ञानपुर। कृषि वैज्ञानिक आरपी चौधरी ने बताया कि बारिश के कारण सरसो की खेती पिछड़ रही है। सरसो की अच्छी प्रजातियों में गिनी जाने वाली आरएच 749 व आरएच 725 की बोवाई 25 अक्तूबर तक हर हाल में होनी चाहिए। इसके बाद बोने पर उत्पादन प्रभावित होता है। जिन्होंने बारिश के एक-दो दिन बोया था और बारिश अधिक हुई है उनका जमाव भी प्रभावित होगा। धान की फसलों में जिनकी फसल गिर गई हैं उनकी फसल प्रभावित है। उत्पादन पर असर पड़ेगा।
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सरसो की खेती अभी हाल में ही किया था। बारिश के कारण जमाव कम होने की आशंका है। ऐसे में पुन: जोताई और बीज का पैसा खर्च करना पड़ेगा। पहले की तरह उत्पादन भी नहीं होगा।

- घनश्याम तिवारी, कुरमैचा
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हमने आलू की खेती के लिए तैयारी कर ली थी। खेत की जोताई भी हो गई थी, लेकिन बारिश ने तैयारी पर पानी फेर दिया। अब फिर से जोताई करानी पड़ेगी। खेती विलंब भी होगी।
- सुधीर यादव, ऊंज
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