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Bhadohi News: अभियान खत्म, स्कूली वाहनों में बच्चों को ठूंसकर ढोने का सिलसिला शुरू
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स्कूल की छुट्टी के बाद टेंपों में कुछ इस तरह से जाते बच्चेें। संवाद
स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग की ओर से दो सप्ताह से चल रहा मिशन सेफ फ्यूचर बुधवार को समाप्त हो गया लेकिन सड़क पर हालात अब भी जस के तस हैं। शहर और कस्बों की सड़कों पर क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंसकर स्कूली ऑटो और ई-रिक्शा आते-जाते दिखे। जिस मार्ग से अधिकारियों आते-जाते है उस मार्ग पर भी ऐसे वाहन दिखे। एक से 15 जुलाई तक चले अभियान के पहले सप्ताह में परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधकों और वाहन चालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया। दूसरे सप्ताह में प्रवर्तन अभियान चलाया गया। इस दौरान 37 स्कूली वाहन सीज, 57 वाहनों का चालान किया गया। यातायात नियमों के उल्लंघन पर 28.20 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया। इसके बावजूद ऑटो और ई-रिक्शा में बच्चों को ठूंसकर ढोने का सिलसिला जारी है।
स्थिति यह है कि कई निजी स्कूलों ने कार्रवाई से बचने के लिए अभिभावकों से एक घोषणा-पत्र भरवाना शुरू कर दिया है, जिसमें बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की बताई जाती है। इससे किसी दुर्घटना की स्थिति में स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करता है। दूसरी ओर, अभिभावक प्रति बच्चे 1200 से 1500 रुपये तक मासिक किराया चुकाने के बावजूद सुरक्षित परिवहन की गारंटी नहीं ले पा रहे हैं।-- मोना, नियाजी मोहल्ला ने कहा कि हर रोज ऑटो में 12-15 बच्चे बैठे दिखाई देते हैं। डर तो लगता है, लेकिन स्कूल की बस हमारे इलाके में नहीं आती, इसलिए मजबूरी है।
प्रिया शुक्ला, रौजा ने कहा कि हम हर महीने किराया देते हैं, फिर भी बच्चों को सुरक्षित सीट तक नहीं मिलती। प्रशासन को रोजाना अभियान चलाना चाहिए।
सतीश उपाध्याय, रायगंज ने कहा कि जब अभियान चलता है तो कुछ दिन नियमों का पालन होता है, लेकिन उसके बाद फिर वही हाल हो जाता है। स्थायी निगरानी जरूरी है।
धनवीर यादव,एआरटीओ ने कहा कि बिना पंजीकृत अथवा नियमों के विपरीत संचालित वाहनों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विभाग की तीन टीमें निगरानी कर रही हैं और ऑटो से स्कूली बच्चों का परिवहन करते पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रकाश सिंह, डीआईओएस ने कहा कि इस संबंध में संबंधित बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा, जिसमें एक निर्धारित छात्र संख्या के आधार पर स्कूली वाहनों का संचालन करने अनिवार्यता करने की बात कही जाएगी ताकि बच्चे सुरक्षित रुप से स्कूल आ जा सकें।
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स्थिति यह है कि कई निजी स्कूलों ने कार्रवाई से बचने के लिए अभिभावकों से एक घोषणा-पत्र भरवाना शुरू कर दिया है, जिसमें बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की बताई जाती है। इससे किसी दुर्घटना की स्थिति में स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करता है। दूसरी ओर, अभिभावक प्रति बच्चे 1200 से 1500 रुपये तक मासिक किराया चुकाने के बावजूद सुरक्षित परिवहन की गारंटी नहीं ले पा रहे हैं।
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प्रिया शुक्ला, रौजा ने कहा कि हम हर महीने किराया देते हैं, फिर भी बच्चों को सुरक्षित सीट तक नहीं मिलती। प्रशासन को रोजाना अभियान चलाना चाहिए।
सतीश उपाध्याय, रायगंज ने कहा कि जब अभियान चलता है तो कुछ दिन नियमों का पालन होता है, लेकिन उसके बाद फिर वही हाल हो जाता है। स्थायी निगरानी जरूरी है।
धनवीर यादव,एआरटीओ ने कहा कि बिना पंजीकृत अथवा नियमों के विपरीत संचालित वाहनों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विभाग की तीन टीमें निगरानी कर रही हैं और ऑटो से स्कूली बच्चों का परिवहन करते पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रकाश सिंह, डीआईओएस ने कहा कि इस संबंध में संबंधित बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा, जिसमें एक निर्धारित छात्र संख्या के आधार पर स्कूली वाहनों का संचालन करने अनिवार्यता करने की बात कही जाएगी ताकि बच्चे सुरक्षित रुप से स्कूल आ जा सकें।
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