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Bhadohi News: फर्जी प्रमाणपत्र से लिया टेंडर, निरस्त करने की संस्तुति
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संवाद न्यूज एजेंसी ज्ञानपुर। घोसिया में फर्जी हैसियत और चरित्र प्रमाण पत्र से फर्म ने एक करोड़ का टेंडर ले लिया। एडीएम वित्त एवं राजस्व कुंवर वीरेंद्र मौर्य की जांच में यह बात सामने आई है। डीएम ने टेंडर को निरस्त करने, फर्म को काली सूची में डालने और मुकदमा कराने का निर्देश दिया है।
भदोही नगर निवासी दिलीप जायसवाल ने पूर्व जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर घोसिया नगर पंचायत में आदर्श नगर योजना के तहत स्ट्रीट लाइट, बिजली संबंधित कार्य के लिए टेंडर आवंटित किया। आरोप लगाया गया कि ठेकेदार फर्म ने हैसियत, चरित्र और जीएसटी प्रमाणपत्र फर्जी लगाया है। तत्कालीन डीएम गौरांग राठी ने इसकी जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व को सौंपी। एडीएम की जांच में पाया गया कि हैसियत प्रमाणपत्र दूसरे के नाम का था। जीएसटी प्रमाणपत्र भी गलत लगाया गया था। असिस्टेंट कमिश्नर आयकर ने रिपोर्ट दी कि टर्नओवर प्रमाणपत्र निविदा जारी होने से बाद का है। वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में फर्म का रजिस्ट्रेशन ही नहीं किया गया था।
जांच आख्या पर डीएम ने उक्त निविदा को निरस्त कर फर्म को काली सूची में डालने, फर्म पर केस दर्ज कराने और किसी अन्य क्षेत्र में लिया गया टेंडर भी निरस्त करने की संस्तुति की गई, लेकिन अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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इनसेट
पांच करोड़ की निविदा में भी लगा था फर्जी एफडीआर
भदोही नगर पालिका ने पांच करोड़ के 61 कार्यों का आठ जनवरी को टेंडर जारी किया था। इसमें इंटरलॉकिंग, भूमिगत नाला और नाली, कंपोजिट विद्यालय की चहारदीवारी, पेयजल पाइप लाइन का विस्तार आदि कार्य कराने थे। यूनाइटेड ग्रांट, टाइड ग्रांट, अवस्थापना निधि और राज्य वित्त के इन कार्यों को तीन महीने के अंदर कराया जाना था। तीन फरवरी को कलेक्ट्रेट में निविदा निकाली गई। 61 कार्यों के लिए 61 कार्यदायी संस्थाओं ने निविदा डाली थी। सबको कार्य आवंटित हो गए। उसके बाद शिकायत मिली कि ठेकदारों ने फर्जी एफडीआर लगाए हैं। बैंकों ने भी फर्जी एफडीआर की पुष्टि की। भदोही और घोसिया ही नहीं सातों नगर निकायों में यह खेल काफी समय से चल रहा है। चहेती फर्माें को लाभ देने के लिए ईओ से लेकर चेयरमैन तक ठेकेदारों से साठगांठ कर लेते हैं।
इनसेट
वर्जन
घोसिया में निविदा प्राप्त करने के मामले में फर्जीवाड़ा करने वाली फर्म पर कार्रवाई की जा चुकी है। संबंधित फर्म ने कोर्ट से स्थगन आदेश लिया है। उसके खिलाफ प्रशासन की तरफ से काउंटर दाखिल किया गया है। -कुंवर वीरेंद्र मौर्य, एडीएम
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भदोही नगर निवासी दिलीप जायसवाल ने पूर्व जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर घोसिया नगर पंचायत में आदर्श नगर योजना के तहत स्ट्रीट लाइट, बिजली संबंधित कार्य के लिए टेंडर आवंटित किया। आरोप लगाया गया कि ठेकेदार फर्म ने हैसियत, चरित्र और जीएसटी प्रमाणपत्र फर्जी लगाया है। तत्कालीन डीएम गौरांग राठी ने इसकी जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व को सौंपी। एडीएम की जांच में पाया गया कि हैसियत प्रमाणपत्र दूसरे के नाम का था। जीएसटी प्रमाणपत्र भी गलत लगाया गया था। असिस्टेंट कमिश्नर आयकर ने रिपोर्ट दी कि टर्नओवर प्रमाणपत्र निविदा जारी होने से बाद का है। वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में फर्म का रजिस्ट्रेशन ही नहीं किया गया था।
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जांच आख्या पर डीएम ने उक्त निविदा को निरस्त कर फर्म को काली सूची में डालने, फर्म पर केस दर्ज कराने और किसी अन्य क्षेत्र में लिया गया टेंडर भी निरस्त करने की संस्तुति की गई, लेकिन अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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पांच करोड़ की निविदा में भी लगा था फर्जी एफडीआर
भदोही नगर पालिका ने पांच करोड़ के 61 कार्यों का आठ जनवरी को टेंडर जारी किया था। इसमें इंटरलॉकिंग, भूमिगत नाला और नाली, कंपोजिट विद्यालय की चहारदीवारी, पेयजल पाइप लाइन का विस्तार आदि कार्य कराने थे। यूनाइटेड ग्रांट, टाइड ग्रांट, अवस्थापना निधि और राज्य वित्त के इन कार्यों को तीन महीने के अंदर कराया जाना था। तीन फरवरी को कलेक्ट्रेट में निविदा निकाली गई। 61 कार्यों के लिए 61 कार्यदायी संस्थाओं ने निविदा डाली थी। सबको कार्य आवंटित हो गए। उसके बाद शिकायत मिली कि ठेकदारों ने फर्जी एफडीआर लगाए हैं। बैंकों ने भी फर्जी एफडीआर की पुष्टि की। भदोही और घोसिया ही नहीं सातों नगर निकायों में यह खेल काफी समय से चल रहा है। चहेती फर्माें को लाभ देने के लिए ईओ से लेकर चेयरमैन तक ठेकेदारों से साठगांठ कर लेते हैं।
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वर्जन
घोसिया में निविदा प्राप्त करने के मामले में फर्जीवाड़ा करने वाली फर्म पर कार्रवाई की जा चुकी है। संबंधित फर्म ने कोर्ट से स्थगन आदेश लिया है। उसके खिलाफ प्रशासन की तरफ से काउंटर दाखिल किया गया है। -कुंवर वीरेंद्र मौर्य, एडीएम