{"_id":"6862dd94a66e95a5600e6a84","slug":"teachers-and-parents-are-vocal-in-opposition-to-the-merger-of-schools-gave-a-leaflet-bhadohi-news-c-191-1-svns1015-128162-2025-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: स्कूलों के विलय के विरोध में शिक्षक और अभिभावक मुखर, दिया पत्रक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: स्कूलों के विलय के विरोध में शिक्षक और अभिभावक मुखर, दिया पत्रक
विज्ञापन
औराई। परिषदीय स्कूलों के विलय को लेकर विरोध तेज हो गया है। शिक्षक संगठन और अभिभावक मुखर हो गए हैं। सोमवार को बीआरसी घोसियां पर प्राथमिक शिक्षक संघ के साथ अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन बीईओ को सौंपा।
ब्लॉक अध्यक्ष सूबेदार यादव ने कहा कि स्कूलों के विलय से शिक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। स्कूल चलो अभियान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, शिक्षा सबका अधिकार का नारा देने वाली सरकार छात्र संख्या कम होने का बहाना बनाकर स्कूलों को बंद करने जैसी शिक्षा विरोधी नीति अपना रही है।
सरकार प्रत्येक गांव के विद्यालय को सजाने- संवारने की जगह उसे बंद कर उसकी जगह हर गांव में मधुशाला खोल रही है। प्राथमिक शिक्षा सभी बच्चों का मौलिक अधिकार है।
विज्ञापन
सरकार को प्रत्येक स्थिति में इसकी रक्षा करनी चाहिए ना की उसे बंद करना चाहिए। गांव का विद्यालय केवल बच्चों की शिक्षा का केंद्र नहीं होता बल्कि वह पूरे गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र होता है। इस मौके पर वीरेंद्र कुमार सिंह, मोहन यादव, ओम प्रकाश पटेल, सौरभ यादव, अदनान खां, रवि शंकर गौतम, विजय भाष्कर, राजीव यादव, शिवकुमार वर्मा, दिनेश कुमार प्रजापति, अशोक सिंह, राकेश कुमार मौर्य आदि रहे।
विज्ञापन
ब्लॉक अध्यक्ष सूबेदार यादव ने कहा कि स्कूलों के विलय से शिक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। स्कूल चलो अभियान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, शिक्षा सबका अधिकार का नारा देने वाली सरकार छात्र संख्या कम होने का बहाना बनाकर स्कूलों को बंद करने जैसी शिक्षा विरोधी नीति अपना रही है।
विज्ञापन
सरकार प्रत्येक गांव के विद्यालय को सजाने- संवारने की जगह उसे बंद कर उसकी जगह हर गांव में मधुशाला खोल रही है। प्राथमिक शिक्षा सभी बच्चों का मौलिक अधिकार है।
विज्ञापन
सरकार को प्रत्येक स्थिति में इसकी रक्षा करनी चाहिए ना की उसे बंद करना चाहिए। गांव का विद्यालय केवल बच्चों की शिक्षा का केंद्र नहीं होता बल्कि वह पूरे गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र होता है। इस मौके पर वीरेंद्र कुमार सिंह, मोहन यादव, ओम प्रकाश पटेल, सौरभ यादव, अदनान खां, रवि शंकर गौतम, विजय भाष्कर, राजीव यादव, शिवकुमार वर्मा, दिनेश कुमार प्रजापति, अशोक सिंह, राकेश कुमार मौर्य आदि रहे।