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Bhadohi News: फरियादी से रिश्वत लेना पड़ा भारी, कानूनगो निलंबित
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ज्ञानपुर। तहसीलों में रिश्वतखोरी रुक नहीं रही है। फरियादी से सुविधा शुल्क लेना राजस्व निरीक्षक को भारी पड़ गया। एसडीएम बरखा सिंह की संस्तुति पर डीएम विशाल सिंह ने राजस्व निरीक्षक राजेश सिंह को बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिया। मामले में जांच का निर्देश दिया।
औराई के डेरवां भवानीपुर गांव निवासी शिकायकर्ता नंदलाल ने औराइ तहसील में प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें बताया कि वह क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक राजेश सिंह को काम कराने के लिए पैसा दिया, लेकिन अधिक मांग होने पर उसका काम नहीं किया गया।
उसने शिकायत के बाद ही तीन काॅल रिकार्डिंग और यूपीआई के माध्यम से भेजे गए पैसे का स्क्रीन शॉट को भी दिया। एसडीएम बरखा सिंह की जांच में साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया राजस्व निरीक्षक राजेश सिंह दोषी मिले। एसडीएम की संस्तुति पर डीएम ने निलंबित कर दिया। इससे तहसील में खलबली मच गई। यह कोई पहला मामला नहीं है।
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भदोही और औराई तहसील में पहले भी कई लेखपाल एवं निरीक्षक रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके हैं। इसमें कई के खिलाफ एंटी करप्शन मुकदमा भी दर्ज करा चुकी है। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पांच लेखपाल जेल जा चुके हैं, हालांकि अफसरों की कृपा से वह जेल से बाहर आए तो दोबारा उन्हीं मलाईदार हल्का में तैनात किया गया।
कई लेखपाल ऐसे भी हैं जिनका रिश्वत मांगते हुए वीडियो और ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी चुका है। वह तहसील के अधिकारियों के खास बने हुए हैं। गत दिनों कमिश्नर डॉ. बी मुथुस्वामी ने दागदार लेखपालों को हटाने का भी निर्देश दिया था, लेकिन उसका पालन अभी तक नहीं हो सका है।
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औराई के डेरवां भवानीपुर गांव निवासी शिकायकर्ता नंदलाल ने औराइ तहसील में प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें बताया कि वह क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक राजेश सिंह को काम कराने के लिए पैसा दिया, लेकिन अधिक मांग होने पर उसका काम नहीं किया गया।
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उसने शिकायत के बाद ही तीन काॅल रिकार्डिंग और यूपीआई के माध्यम से भेजे गए पैसे का स्क्रीन शॉट को भी दिया। एसडीएम बरखा सिंह की जांच में साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया राजस्व निरीक्षक राजेश सिंह दोषी मिले। एसडीएम की संस्तुति पर डीएम ने निलंबित कर दिया। इससे तहसील में खलबली मच गई। यह कोई पहला मामला नहीं है।
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भदोही और औराई तहसील में पहले भी कई लेखपाल एवं निरीक्षक रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके हैं। इसमें कई के खिलाफ एंटी करप्शन मुकदमा भी दर्ज करा चुकी है। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पांच लेखपाल जेल जा चुके हैं, हालांकि अफसरों की कृपा से वह जेल से बाहर आए तो दोबारा उन्हीं मलाईदार हल्का में तैनात किया गया।
कई लेखपाल ऐसे भी हैं जिनका रिश्वत मांगते हुए वीडियो और ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी चुका है। वह तहसील के अधिकारियों के खास बने हुए हैं। गत दिनों कमिश्नर डॉ. बी मुथुस्वामी ने दागदार लेखपालों को हटाने का भी निर्देश दिया था, लेकिन उसका पालन अभी तक नहीं हो सका है।