विज्ञान भवन, राष्ट्रपति भवन में चमक बिखेर चुका विंध्य क्षेत्र यानी मिर्जापुर और भदोही का कालीन अब देश के सर्वोच्च पंचायत यानी नव निर्मित सेंट्रल विस्टा में चमक बिखेरेगा। न्यूजीलैंड के ऊल से निर्मित मखमली कालीन पर यहां के बुनकरों का हुनर स्पष्ट तौर पर दिखेगा। इससे दोनों जिलों के एक जिला एक उत्पाद में शामिल कालीन उद्योग को बढ़ावा देने में काफी मदद मिलेगी। करीब 44 सौ वर्गमीटर के 290 पीस कालीन तैयार करने की जिम्मेदारी जिले की एक कंपनी को मिली है।
इस कंपनी के कारखाने भदोही और मिर्जापुर दोनों जनपदों में हैं। समय से काम पूर्ण हो इसके लिए दो-दो पाली में काम पर जोर दिया गया। ओटीटी के इस जमाने में 'कालीन भैया' एक बेहद चर्चित नाम है। मिर्जापुर नामक वेब सीरीज में प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी कालीन भैया बने थे। इस वेब सीरीज में मिर्जापुर और कालीन उद्योग को दिखाया गया था।
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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट
- फोटो : पीटीआई
जर्मनी, अमेरिका जैसे देशों में भदोही का नाम कार्पेट सिटी के नाम से प्रसिद्ध कराने वाले कालीन उद्योग को बढ़ाने, कालीन से जुड़े निर्यातकों, बुनकरों को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर अलग-अलग योजनाएं लांच की जाती है। अब जब देश की सर्वोच्च पंचायत में यहां का कालीन लगना है तो स्वाभाविक है कि इसे यहां कालीन से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ेगा।
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कालीन की प्रदर्शनी
- फोटो : फाइल
कालीन बनाने वाली कंपनी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यहां से 290 पीस कालीन जानी है। इसमें करीब 250 से कुछ ज्यादा राज्यसभा के लिए और शेष लोकसभा के लिए मांग की गई है। करीब छह माह पहले टाटा कंपनी के माध्यम से सेंट्रल एजेंसी ने कंपनी के कालीन को परखा भी था।
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कालीन की प्रदर्शनी
- फोटो : फाइल
न्यूजीलैंड के वूल से तैयार हो रहे कालीन
नए संसद भवन यानी सेंट्रल विस्टा में सांसदों के स्वागत के लिए कंपनी ने न्यूजीलैंड से वूल (ऊन-धागे) मंगाए। इनकी कई स्तरों पर जांच की गई। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि सबसे बड़ा सेट 40-25 फीट के बनाए गए। अगर कहीं थोड़ी भी भी खराबी आ जाए तो पूरा सेट बेकार हो जाता है। ऐसे में हैंडलूमों में प्रतिदिन निगरानी की जाती है।
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नरेंद्र मोदी-शिंजो आबे
- फोटो : फाइल
पीएम मोदी ने शिंजो आबे को भेंट की थी कालीन-दरी
करीब चार वर्ष पहले 28 अक्तूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान पहुंचकर वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को मिर्जापुर में बनी कलात्मक कालीन-दरी भेंट किया। उस समय मिर्जापुर की शान बढ़ी। अब एक मौका और जब विंध्यनगरी और कालीन नगरी की शान बढ़ने जा रही है।