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बिना पंजीकरण के खाद-बीज की दुकान चलाना पड़ेगा महंगा
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ज्ञानपुर। बिना पंजीकरण के अब बाजार में खाद-बीज की दुकान संचालित करना दुकानदारों के लिए महंगा पड़ेगा। किसानों की शिकायत पर कृषि विभाग ने जांच अभियान चलाने के लिए रणनीति भी तैयार कर लिया है।
किसानों ने सवाल उठाया है कि जब खेतीबारी का समय जोर पकड़ता है तब सुदूरवर्ती बाजारों में बिना पंजीकरण की दुकानें सजाकर मिलावटी, नकली खाद, बीज, कीटनाशक की बिक्री करने का मामला सामने आता है। मामला तब सुर्खियों में आता है जब किसान तीन गुने ज्यादा दामों में खाद, बीज, कीटनाशक की खरीदारी करते हैं और परिणाम सिफर हो जाता है। किसान आफताब ने बताया कि राजकीय गोदामों पर कीटनाशकों की कमी होने से नजदीकी बाजार से खरीदारी कर ली जाती है। उस समय यह मान लिया जाता है कि किसान अपनी ओर से फसलों को बचाने के सारे उपाय कर लिए हैं और कीट नहीं भागते। किसान सुशील सिंह ने बताया कि एक ही फर्म के कई-कई बाजारों में बोर्ड मिलते है जिनके संचालकों की कार्यप्रणाली हमेशा से संदिग्ध रही है और विभागीय कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी उस ओर नहीं देखते। कुछ बाजारों में कुछ ऐसी दुकानें होती हैं जहां न कोई बोर्ड लगे होते हैं न विभाग के मानक का पालन होता है। इस तरह की दुकानों पर खेतीबारी के सभी सामानों के मिलने से गुरेज नहीं किया जा सकता। आर्थिक तंगी से परेशान किसान एक सप्ताह की उधारी की बात कह कर सामान पा जाते हैं। किसान शिवकुमार ने बताया कि ब्रांडेड पैकेट में बंद बीज, खाद, कीटनाशक मात्र लुभाने वाले होते हैं काम के नहीं होते हैं। जिला कृषि अधिकारी एके प्रजापति ने कहा कि खेतीबारी के जोर पकड़ने पर कुछ बाजारों में बिना पंजीकरण सजी दुकानों की शिकायत आई है। टीम के साथ हकीकत देखी जाएगी।
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किसानों ने सवाल उठाया है कि जब खेतीबारी का समय जोर पकड़ता है तब सुदूरवर्ती बाजारों में बिना पंजीकरण की दुकानें सजाकर मिलावटी, नकली खाद, बीज, कीटनाशक की बिक्री करने का मामला सामने आता है। मामला तब सुर्खियों में आता है जब किसान तीन गुने ज्यादा दामों में खाद, बीज, कीटनाशक की खरीदारी करते हैं और परिणाम सिफर हो जाता है। किसान आफताब ने बताया कि राजकीय गोदामों पर कीटनाशकों की कमी होने से नजदीकी बाजार से खरीदारी कर ली जाती है। उस समय यह मान लिया जाता है कि किसान अपनी ओर से फसलों को बचाने के सारे उपाय कर लिए हैं और कीट नहीं भागते। किसान सुशील सिंह ने बताया कि एक ही फर्म के कई-कई बाजारों में बोर्ड मिलते है जिनके संचालकों की कार्यप्रणाली हमेशा से संदिग्ध रही है और विभागीय कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी उस ओर नहीं देखते। कुछ बाजारों में कुछ ऐसी दुकानें होती हैं जहां न कोई बोर्ड लगे होते हैं न विभाग के मानक का पालन होता है। इस तरह की दुकानों पर खेतीबारी के सभी सामानों के मिलने से गुरेज नहीं किया जा सकता। आर्थिक तंगी से परेशान किसान एक सप्ताह की उधारी की बात कह कर सामान पा जाते हैं। किसान शिवकुमार ने बताया कि ब्रांडेड पैकेट में बंद बीज, खाद, कीटनाशक मात्र लुभाने वाले होते हैं काम के नहीं होते हैं। जिला कृषि अधिकारी एके प्रजापति ने कहा कि खेतीबारी के जोर पकड़ने पर कुछ बाजारों में बिना पंजीकरण सजी दुकानों की शिकायत आई है। टीम के साथ हकीकत देखी जाएगी।
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