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राम मंदिर बनने तक नंगे पांव रहने का लिया है संकल्प

Fri, 31 Jul 2020 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2020 10:45 PM IST
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Ramesh Singh of Bhadohi for two years for Ram's sake
ज्ञानपुर। मेरे राम! निश्छल भक्ति के भाव से भरे ये शब्द भदोही जिले के इस रामभक्त की भावनाओं में सटीक परिलक्षित होते हैं। शायद यही वजह है कि अपने भगवान को कष्ट में देखकर मन इतना खिन्न हो गया कि उन्होंने अपनी सामान्य जिंदगी को भी सहर्ष कष्टकारी बना दिया। जी हां! बात हो रही है एक ऐसे रामभक्त की, जिन्होंने अयोध्या में रामलला को तिरपाल में देखकर अपने जूते उतारकर फेंक दिए और संकल्प लिया कि जब तक अयोध्या में राममंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक नंगे पांव रहूंगा। लिहाजा दो वर्ष से वह बिना जूते-चप्पल पहने जिंदगी गुजार रहे हैं।
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भदोही जिले के डीघ ब्लॉक के गोलखरा गांव निवासी रमेश सिंह वर्ष 2018 के कार्तिक महीने में पंचक्रोशी यात्रा में अयोध्या गए थे। वहां रामलला को टेंट में देखकर उनका मन द्रवित हो गया। भाव उमड़ा कि जब भगवान ही तिरपाल में हैं तो भक्त को भौतिक सुख लेने का क्या औचित्य। उसी समय ठान लिया कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक अपने पैर में जूते या चप्पल नहीं डालूंगा। पैर के जूतों को उसी समय निकालकर फेंक दिया और घर लौट आए। उसके बाद दो वर्षों से उन्होंने जूते या चप्पल नहीं पहने। ज्यादातर समय पूजा-पाठ में व्यतीत करने वाले रमेश सिंह ने गांव में रहकर खेती-किसानी के कार्य के अलावा घर-परिवार में पड़ने वाले शादी-विवाह या अन्य किसी खास आयोजन के वक्त भी पांव में चप्पलें नहीं पहनी। गत दिनों अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास की घोषणा हुई तो मन में अपने भगवान के मंदिर का निर्माण शुभारंभ देखने की उत्कंठा जाग उठी। इसलिए दो दिन पूर्व अपने चचेरे भाई सुरेश सिंह के साथ नंगे पांव साइकल से ही अयोध्या चले गए। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि वहां रामलला का दर्शन करने का सौभाग्य तो मिला, लेकिन सुरक्षा की सख्ती के चलते शिलान्यास कार्यक्रम देखने के लिए अयोध्या में रुकने की अनुमति नहीं मिली। लिहाजा वापस लौट आए। मंदिर शिलान्यास की घोषणा के बाद गांव वालों ने जूते और चप्पल न पहनने के संकल्प को पूर्ण होने की बात कहते हुए कहा कि अब जूते पहन लीजिए, लेकिन हमने उन्हें बताया कि जब तक मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक जूते-चप्पल नहीं पहनूंगा।
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