ज्ञानपुर। दो अक्तूबर तक चलने वाले रेल स्वच्छता अभियान का कोई असर नहीं है। तीसरे दिन शनिवार तक नोडल टीम मात्र ए और बी श्रेणी के जंक्शनों के आगे न बढ़ने से यात्रियों की नाराजगी किसी भी दिन अभियान के विरोध में उग्र रुप ले सकती है। यात्री निर्भय सिंह, आनंद सिंह, सुशील सिंह, दिनकर, दयाशंकर आदि ने कहा कि प्रति वर्ष रेल मंत्रालय की पहल पर उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन लखनऊ-वाराणसी मंडल से अभियान का शुभारंभ तो कर देता हैं लेेकिन लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाता। यहीं कारण है कि डी श्रेणी में रखे गए स्टेशन, हाल्ट परिसर, आवासीय कालोनी, खाली पड़ी जमीन, मुख्य ट्रैक से लेकर लूप ट्रैक पर गंदगियों का अंबार लगा रह जाता है। लगभग तीन वर्ष से पूर्वोत्तर रेलवे के मडुआडीह-रामबाग रेल खंड पर लगभग 800 करोड़ की परियोजना को गति देकर ज्ञानपुर रोड स्टेशन दोहरीकरण-विद्युतीकरणयुक्त ट्रैक पर ट्रेने भी चलाई जा रही है। तीसरे चरण में कार्य की गति इतनी धीमी कर दी गई है कि जब तक स्वच्छता अभियान अपने मुख्य उद्देश्य तक पहुंचेगा तब तक गंदगी से उपजने वाली बीमारियां यात्रियों समेत कर्मचारियों को अपने आगोश में ले लेंगी। स्टेशन और हाल्ट तक पहुंचने वाले मार्ग खराब हो चुके हैं। स्टेशन भवन के आस-पास भारी जलजमाव कीचड़ को बढ़ावा देता जा रहा है। प्लेटफार्म पर फैली गंदगी सफाई कर्मचारियों की कमी के कारण दूर होने पर महीने लग जाते हैं। यही स्थिति उत्तर रेलवे के जंघई-वाराणसी रेल रूट पर है। स्टेशन सुरियावां, सरायकंसराय, परसीपुर, मोढ़ के आमने-सामने की स्थिति मंडलीय अधिकारी नहीं भांपते। इस रेल खंड पर चलने वाली विशेष ट्रेनों से यात्रा करने वाले सतीश, आलोक, नंदूराम ने कहा कि मंडलीय अधिकारी यहां से लगभग 300 किलोमीटर दूर लखनऊ में बैठते हैं जिससे न गंदगी दूर हो पाती है न सुविधाओं का अभाव। महामारी के तीसरे चरण को प्रभावी होने से पहले अभियान का असर हर हालत में दिखना चाहिए। स्वच्छता अभियान के नोडल अधिकारी दुष्यंत सिंह ने बताया कि 16 सितंबर से दो अक्तूबर तक चलने वाले अभियान से सभी छोटे-बड़े स्टेशन, हाल्ट परिसर को साफ-सुथरा बनाया जाएगा।