{"_id":"6a8df3bf8cbe89d24e03d584","slug":"digital-x-ray-or-ultrasound-tests-will-not-be-prescribed-for-general-patients-bhadohi-news-c-191-1-gyn1003-147725-2026-08-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: सामान्य मरीजों की नहीं लिखी जाएगी डिजिटल एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: सामान्य मरीजों की नहीं लिखी जाएगी डिजिटल एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जांच
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला अस्पताल में सामान्य मरीजों को एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच लिखने से जांच केंद्रों पर भीड़ बढ़ती जा रही है। सीएमओ डॉ.एसके चक ने अस्पताल के सीएमएस को पत्र लिखकर जरूरत पड़ने पर ही एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच लिखने का निर्देश दिया है। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां हर दिन 900 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा 45 से 50 मरीजों की अल्ट्रासाउंड और 70 से 80 मरीजों की एक्स-रे जांच लिखी जाती है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की तो सुविधा है, लेकिन अस्पताल में मैनुअल एक्स-रे की व्यवस्था है। इसकी वजह से यहां के मरीजों को सौ शय्या अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे के लिए भेजा जाता है। सौ शय्या अस्पताल में भी रोजाना 25 से 30 एक्स-रे लिखी जाती है। इस लिहाज से देखा जाए तो हर दिन 100 से 110 मरीजों को डिजिटल एक्स-रे दोनों अस्पताल में लिखा जाता है। एक दिन में औसतन 25 से 30 अल्ट्रासाउंड और 70 से 80 के आसपास डिजिटल एक्स-रे किया जाता है। ऐसे में हर दिन 15 से 20 अल्ट्रासाउंड और 35 से 40 डिजिटल एक्स-रे लंबित रह जाते हैं। इससे उन्हें या तो निजी जांच केंद्र या फिर अगले दिन का इंतजार करना पड़ता था।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
पैरवी कर जांच लिखवाते हैं मरीज
चिकित्सकों का कहना है कि जिसे जरूरत होता है। उसे ही डिजिटल एक्स-रे या फिर अल्ट्रासाउंड लिखा जाता है। बताया कि अल्ट्रासाउंड पेट दर्द, गर्भावस्था की निगरानी या आंतरिक अंगों की जांच में ही लिखा जाता है। वहीं हड्डियों की चोट के मामले में एक्स-रे लिखा जाता है, लेकिन कई मरीज ऐसे आते हैं, जो न लिखे जाने पर पैरवी के फोन कराते हैं। जिससे मजबूरी में लिखा जाता है। ऐसा हर दिन चार से पांच मामलों में होता है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
अस्पतालों में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें तमाम लोग बेवजह ही सामान्य बीमारियों में करा रहे हैं। इससे कई बार जरुरतमंद लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में अस्पतालों में पत्र जारी कर चिकित्सकों को आवश्यक होने पर ही एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच लिखने का निर्देश दिया गया है।
- डॉ. एसके चक, सीएमओ, भदोही।
विज्ञापन
विज्ञापन
पैरवी कर जांच लिखवाते हैं मरीज
चिकित्सकों का कहना है कि जिसे जरूरत होता है। उसे ही डिजिटल एक्स-रे या फिर अल्ट्रासाउंड लिखा जाता है। बताया कि अल्ट्रासाउंड पेट दर्द, गर्भावस्था की निगरानी या आंतरिक अंगों की जांच में ही लिखा जाता है। वहीं हड्डियों की चोट के मामले में एक्स-रे लिखा जाता है, लेकिन कई मरीज ऐसे आते हैं, जो न लिखे जाने पर पैरवी के फोन कराते हैं। जिससे मजबूरी में लिखा जाता है। ऐसा हर दिन चार से पांच मामलों में होता है।
विज्ञापन
अस्पतालों में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें तमाम लोग बेवजह ही सामान्य बीमारियों में करा रहे हैं। इससे कई बार जरुरतमंद लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में अस्पतालों में पत्र जारी कर चिकित्सकों को आवश्यक होने पर ही एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच लिखने का निर्देश दिया गया है।
- डॉ. एसके चक, सीएमओ, भदोही।