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रबीउल अव्वल का चांद दिखा
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भदोही। ईद-ए मिलाद जिसे मिलाद-उन-नबी भी कहते हैं इस वर्ष 10 नवंबर को मनाया जाएगा। यह त्योहार पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्ल. के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। यह इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल की 12 तारीख को होता है। मंगलवार को रबी-उल अव्वल चांद नजर आने के बाद मुस्लिम बहुल मोहल्लों में खुशी की लहर दौड़ गई। मर्यादपट्टी मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौ.फैसल अशर्फी ने कहा कि हर मुसलमान को हजरत की सुन्नतों पर अमल करना चाहिए।
प्रिंसिपल ने बताया कि हजरत मोहम्मद सल्ल. का जन्म मक्का शहर में 571 ईसवी को हुआ था। इसी याद में ईद मिलाद उन्नबी पर्व मनाया जाता है। हजरत मुहम्मद सल्ल. हमारे आखिरी नबी हैं। कहा कि उनका जन्मदिन हम सबके दिलों में ऊंचा मुकाम रखता है। उनके जन्मदिन मनाने के लिए मिलाद की महफिल, कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी, नात ख्वानी आदि पहली रबी-उल अव्वल से शुरू हो चुका है।
मौलाना ने कहा कि उनका जन्मदिन मनाने के साथ साथ हर मुसलमान को चाहिए कि उनकी जीवनी पढ़े और उनकी सुन्नतों पर अमल करे। हजरत मोहम्मद सल्ल. ने गरीबों, दीन दुखियों से लिए जीवन जिया। अब हमारी बारी है कि अब उनके बताए रास्ते पर चलें। हजरत मोहम्मद सल्ल. की सच्ची घटना का जिक्र करते हुए मौलाना ने बताया कि रास्ते से गुजरते हर रोज एक महिला हजरत पर कूड़ा फेंकती थी। एक दिन बिमारी के चलते वह महिला उन पर कूड़ा नहीं फेंक सकी तो हजरत को बड़ा अचरज हुआ। और वे उस महिला की खैरियत लेने पहुंच गए।
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प्रिंसिपल ने बताया कि हजरत मोहम्मद सल्ल. का जन्म मक्का शहर में 571 ईसवी को हुआ था। इसी याद में ईद मिलाद उन्नबी पर्व मनाया जाता है। हजरत मुहम्मद सल्ल. हमारे आखिरी नबी हैं। कहा कि उनका जन्मदिन हम सबके दिलों में ऊंचा मुकाम रखता है। उनके जन्मदिन मनाने के लिए मिलाद की महफिल, कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी, नात ख्वानी आदि पहली रबी-उल अव्वल से शुरू हो चुका है।
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मौलाना ने कहा कि उनका जन्मदिन मनाने के साथ साथ हर मुसलमान को चाहिए कि उनकी जीवनी पढ़े और उनकी सुन्नतों पर अमल करे। हजरत मोहम्मद सल्ल. ने गरीबों, दीन दुखियों से लिए जीवन जिया। अब हमारी बारी है कि अब उनके बताए रास्ते पर चलें। हजरत मोहम्मद सल्ल. की सच्ची घटना का जिक्र करते हुए मौलाना ने बताया कि रास्ते से गुजरते हर रोज एक महिला हजरत पर कूड़ा फेंकती थी। एक दिन बिमारी के चलते वह महिला उन पर कूड़ा नहीं फेंक सकी तो हजरत को बड़ा अचरज हुआ। और वे उस महिला की खैरियत लेने पहुंच गए।
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