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दलहनी फसल उगाकर नुकसान की भरपाई
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Thu, 28 May 2015 02:20 AM IST
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इलाके के रइयापुर गांव निवासी किसान पं. श्यामधर मिश्र प्राकृतिक आपदा के बाद हुए नुकसान के बाद दोबारा उम्दा खेती कर किसानों के लिए नजीर बन गए हैं।
पिछले दिनों आए हुदहुद तूफान के असर के चलते गेहूं और चने की फसल नष्ट हो गई थी। ऐसे में उनका बुवाई पर किया गया हजारों रुपये खर्च बेकार चला गया। लेकिन, उन्होंने सूझबूझ का परिचय दिया और नुकसान की भरपाई के लिए उसी जमीन पर एक पखवारे बाद ही दलहनी फसल मूंग की बुवाई कर दी। इससे उन्हें दो माह बाद ही रिटर्न मिलने लगा। फसल तैयार होने पर उसमें से दो बार फली की तोड़ाई कर चुके हैं।
अब तीसरी बार की तैयारी में हैं। धान की खेती से पूर्व ही वे एक बार मूंग से तीन बार पैदावार का फायदा ले लेंगे। दूसरी बार फली की तोड़ाई करने पहुंचे श्री मिश्र ने बताया कि खेती बारी उनके खून में है।
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इसलिए इसे पूरे मन से करते हैं। कहा कि फरवरी में आए तूफान के दौरान नुकसान से परेशान हो गए थे। कृषि से जुड़े़ कुछ साथियों की सलाह पर उन्होंने मूंग की खेती की। इसके बाद इसका उन्हें लाभ भी मिल रहा है, जितने का नुकसान हुआ था।
वह पूरा हो चुका है, अब जो मिलेगा वह मुनाफा ही होगा। किसान श्री मिश्र ने अन्य लोगों को भी इसी तरह की खेती करने का सुझाव दिया है, जिससे मेहनत पर पानी फिरने न पाए और उसका लाभ भी मिले।
है।
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पिछले दिनों आए हुदहुद तूफान के असर के चलते गेहूं और चने की फसल नष्ट हो गई थी। ऐसे में उनका बुवाई पर किया गया हजारों रुपये खर्च बेकार चला गया। लेकिन, उन्होंने सूझबूझ का परिचय दिया और नुकसान की भरपाई के लिए उसी जमीन पर एक पखवारे बाद ही दलहनी फसल मूंग की बुवाई कर दी। इससे उन्हें दो माह बाद ही रिटर्न मिलने लगा। फसल तैयार होने पर उसमें से दो बार फली की तोड़ाई कर चुके हैं।
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अब तीसरी बार की तैयारी में हैं। धान की खेती से पूर्व ही वे एक बार मूंग से तीन बार पैदावार का फायदा ले लेंगे। दूसरी बार फली की तोड़ाई करने पहुंचे श्री मिश्र ने बताया कि खेती बारी उनके खून में है।
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इसलिए इसे पूरे मन से करते हैं। कहा कि फरवरी में आए तूफान के दौरान नुकसान से परेशान हो गए थे। कृषि से जुड़े़ कुछ साथियों की सलाह पर उन्होंने मूंग की खेती की। इसके बाद इसका उन्हें लाभ भी मिल रहा है, जितने का नुकसान हुआ था।
वह पूरा हो चुका है, अब जो मिलेगा वह मुनाफा ही होगा। किसान श्री मिश्र ने अन्य लोगों को भी इसी तरह की खेती करने का सुझाव दिया है, जिससे मेहनत पर पानी फिरने न पाए और उसका लाभ भी मिले।
है।