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पंचायत चुनावःपहले दिन ही सौ से अधिक आपत्तियां
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ज्ञानपुर। जिले में आगामी दिनों में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर मंगलवार को देर रात जारी की गई आरक्षण सूची ने ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी की गई आरक्षण सूची को लेकर लोगों की नाराजगी इस कदर है कि जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय में आपत्तियों की भरमार हो गई ।
बुधवार को डीपीआरओ ऑफिस में लगभग लगभग सौ से अधिक आपत्तियां लोगों ने दर्ज कराकर बीडीओ और निर्वाचन विभाग की कार्यप्रणाली पर तरह-तरह के सवाल खड़े किए हैं। इस दौरान ज्ञानपुर ब्लॉक के भिडिउरा गांव निवासी प्रदीप कुमार पांडेय, अजीत दुबे, शिवम, अंजनी दुबे और गिरीश दुबे आदि ने आपत्ति दर्ज कराकर आरोप लगाया कि गांव में 99 फीसद ब्राह्मण वर्ग, दो फीसद अनुसूचित जाति, 30 से 35 पिछड़े वर्ग के परिवार निवास करते हैं बावजूद इसके यहां की सीट पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई है। जबकि शासन ने फरमान जारी कर अधिक जनसंख्या वाले समुदाय के आधार पर ही आरक्षण तैयार करने का निर्देश दिया है। बताया कि लेकिन दोनों विभागों में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों ने मिलीभगत कर इस सीट को पिछड़े वर्ग के लिए सीट आरक्षित कर दिया गया।
वहीं कसिदहां गांव के कोमलराम ने बताया कि गांव में अनुसूचित जाति की आबादी 2500, पिछड़े वर्ग 2000, ब्राह्मण 500 हैं ।बावजूद इसके जिला प्रशासन की हेराफेरी से इस सीट को सामान्य सीट घोषित करना अनुचित है। कहा कि 1995 में पिछड़ा वर्ग, 2000 में अनुसूचित जाति, 2005 में सामान्य, 2010 में सामान्य, 2015 में पिछड़ा वर्ग की सीट आरक्षित की गई थी। जबकि इस बार 2021 में पिछड़ा या अनुसूचित वर्ग की सीट आरक्षित कराने के लिए कई बार शिकायत की गई लेकिन अधिकारियों की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आपत्ति करने वालों ने कहा कि यदि उनकी आपत्तियों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीण प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। इसी क्रम में अभोली ब्लॉक में 25, भदोही में 30, औराई में 60 गांव के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
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इस संबंध में एडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि आरक्षण की यह अनंतिम सूची है। अभी लोगों की ओर से आने वाली आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद अंतिम आरक्षण सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
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बुधवार को डीपीआरओ ऑफिस में लगभग लगभग सौ से अधिक आपत्तियां लोगों ने दर्ज कराकर बीडीओ और निर्वाचन विभाग की कार्यप्रणाली पर तरह-तरह के सवाल खड़े किए हैं। इस दौरान ज्ञानपुर ब्लॉक के भिडिउरा गांव निवासी प्रदीप कुमार पांडेय, अजीत दुबे, शिवम, अंजनी दुबे और गिरीश दुबे आदि ने आपत्ति दर्ज कराकर आरोप लगाया कि गांव में 99 फीसद ब्राह्मण वर्ग, दो फीसद अनुसूचित जाति, 30 से 35 पिछड़े वर्ग के परिवार निवास करते हैं बावजूद इसके यहां की सीट पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई है। जबकि शासन ने फरमान जारी कर अधिक जनसंख्या वाले समुदाय के आधार पर ही आरक्षण तैयार करने का निर्देश दिया है। बताया कि लेकिन दोनों विभागों में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों ने मिलीभगत कर इस सीट को पिछड़े वर्ग के लिए सीट आरक्षित कर दिया गया।
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वहीं कसिदहां गांव के कोमलराम ने बताया कि गांव में अनुसूचित जाति की आबादी 2500, पिछड़े वर्ग 2000, ब्राह्मण 500 हैं ।बावजूद इसके जिला प्रशासन की हेराफेरी से इस सीट को सामान्य सीट घोषित करना अनुचित है। कहा कि 1995 में पिछड़ा वर्ग, 2000 में अनुसूचित जाति, 2005 में सामान्य, 2010 में सामान्य, 2015 में पिछड़ा वर्ग की सीट आरक्षित की गई थी। जबकि इस बार 2021 में पिछड़ा या अनुसूचित वर्ग की सीट आरक्षित कराने के लिए कई बार शिकायत की गई लेकिन अधिकारियों की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आपत्ति करने वालों ने कहा कि यदि उनकी आपत्तियों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीण प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। इसी क्रम में अभोली ब्लॉक में 25, भदोही में 30, औराई में 60 गांव के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
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इस संबंध में एडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि आरक्षण की यह अनंतिम सूची है। अभी लोगों की ओर से आने वाली आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद अंतिम आरक्षण सूची का प्रकाशन किया जाएगा।