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Bhadohi News: भारतीय जीवन बीमा निगम को 3.31 लाख रुपये देने का आदेश
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ज्ञानपुर। जिला उपभोक्ता आयोग ने शुक्रवार को भारतीय जीवन बीमा निगम के ज्ञानपुर शाखा प्रबंधक को उपभोक्ता के बीमा क्लेम की राशि 3 लाख 31 हजार 775 रुपये छह फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से देने का आदेश दिया है।
आयोग ने चेताया कि अगर दो माह के भीतर अगर बीमा क्लेम की राशि नहीं दी गई तो पूरी धनराशि नौ फीसदी ब्याज के साथ चुकानी होगी। उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि तहसील ज्ञानपुर के हरदेवपुर निवासी गुलेन्द्र कुमार पांडेय की पत्नी हीरादेवी पांडेय ने भारतीय जीवन बीमा निगम से पॉलिसी खरीदी थी।
इसका उन्होंने वार्षिक प्रीमियम 29 हजार 645 रुपये अदा किया था। पॉलिसी अवधि के बीच नामिनी की मौत होने पर उन्हें पांच लाख रुपये मिलना था। उन्होंने पांच किश्ते जमा की थी। इस बीच 30 जुलाई 2023 को अचानक हीरादेवी के सीने में दर्द उठने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
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प्रयागराज के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने बीमा क्लेम दाखिल किया। 31 मार्च, 2024 को उनके मोबाइल पर मैसेज आया। इसमें बीमा क्लेम 1,48,225 रुपये प्राप्त हुआ था।
इस पर आपत्ति जताया गया तो बीमा कंपनी ने कहा कि इससे अधिक धनराशि किसी भी हाल में नहीं मिलेगी।
इसके बाद पीड़ित ने 15 जनवरी, 2025 को भारतीय जीवन बीमा के ज्ञानपुर शाखा प्रबंधक और कोलकाता ब्रांच मैनेजर के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। जिस पर सुनवाई करते हुए चेयरमैन संजय कुमार डे व सदस्य दिप्ती श्रीवास्तव ने माना किया क्लेम न देकर बीमा कंपनी ने उपभोक्ता की सेवा में कमी की है।
आयोग दो माह के भीतर क्लेम की पूरी धनराशि तीन लाख 31 हजार 725 रूपये छह फीसदी ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। कहा कि दो माह में न देने पर नौ फीसदी ब्याज के साथ पूरी धनराशि देनी होगी। आयोग ने वाद व्यय का पांच हजार रुपये भी देने का आदेश दिया।
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आयोग ने चेताया कि अगर दो माह के भीतर अगर बीमा क्लेम की राशि नहीं दी गई तो पूरी धनराशि नौ फीसदी ब्याज के साथ चुकानी होगी। उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि तहसील ज्ञानपुर के हरदेवपुर निवासी गुलेन्द्र कुमार पांडेय की पत्नी हीरादेवी पांडेय ने भारतीय जीवन बीमा निगम से पॉलिसी खरीदी थी।
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इसका उन्होंने वार्षिक प्रीमियम 29 हजार 645 रुपये अदा किया था। पॉलिसी अवधि के बीच नामिनी की मौत होने पर उन्हें पांच लाख रुपये मिलना था। उन्होंने पांच किश्ते जमा की थी। इस बीच 30 जुलाई 2023 को अचानक हीरादेवी के सीने में दर्द उठने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
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प्रयागराज के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने बीमा क्लेम दाखिल किया। 31 मार्च, 2024 को उनके मोबाइल पर मैसेज आया। इसमें बीमा क्लेम 1,48,225 रुपये प्राप्त हुआ था।
इस पर आपत्ति जताया गया तो बीमा कंपनी ने कहा कि इससे अधिक धनराशि किसी भी हाल में नहीं मिलेगी।
इसके बाद पीड़ित ने 15 जनवरी, 2025 को भारतीय जीवन बीमा के ज्ञानपुर शाखा प्रबंधक और कोलकाता ब्रांच मैनेजर के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। जिस पर सुनवाई करते हुए चेयरमैन संजय कुमार डे व सदस्य दिप्ती श्रीवास्तव ने माना किया क्लेम न देकर बीमा कंपनी ने उपभोक्ता की सेवा में कमी की है।
आयोग दो माह के भीतर क्लेम की पूरी धनराशि तीन लाख 31 हजार 725 रूपये छह फीसदी ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। कहा कि दो माह में न देने पर नौ फीसदी ब्याज के साथ पूरी धनराशि देनी होगी। आयोग ने वाद व्यय का पांच हजार रुपये भी देने का आदेश दिया।