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Bhadohi News: ऑनलाइन हाजिरी का दावा फेल, चिकित्सक नहीं, कर्मचारियों की हाजिरी

Thu, 18 Dec 2025 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 Dec 2025 01:00 AM IST
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Online attendance claim fails, attendance of employees, not doctors
भदोही एमबीएस में लगी बायोमैट्रिक मशीन। संवाद
ज्ञानपुर। जिले के अस्पतालों में ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था फेल नजर आ रही है। सौ शय्या अस्पताल में लगी पंचिंग मशीन जिसकी मॉनीटरिंग शासन स्तर से होती है, उसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की हाजिरी तो लगती है लेकिन चिकित्सक रजिस्टर पर हाजिरी भरते हैं। वहीं महाराजा चेतसिंह राजकीय चिकित्सालय व महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय (एमबीएस) में पंचिंग मशीन तो लगी है लेकिन इस पर कम ही चिकित्सक हाजिरी लगाते हैं। इन दोनों मशीनों की मॉनीटरिंग जिले स्तर से की जाती है। जिले में तीन बड़े अस्पताल हैं। इनमें जिला अस्पताल ज्ञानपुर और एमबीएस अस्पताल भदोही में हर दिन औसतन 800 से 1000 की ओपीडी होती हैं। वहीं सौ शय्या अस्पताल की ओपीडी 200 से 250 के बीच है। अस्पतालों की ओपीडी में चिकित्सकों की लेटलतीफी जगजाहिर है। मरीज भले ही आठ बजे आ जाते हैं लेकिन चिकित्सकों का समय साढ़े नौ से 10 बजे के बीच है। कई-कई चिकित्सक तो 10 बजे तक ओपीडी में नहीं पहुंचते हैं। इससे दूरदराज से आने वाले मरीजों को परेशानी होती है। चिकित्सकों की अस्पताल में समय से मौजूदगी हो, इसे लेकर ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था शुरू की गई है। सौ शय्या अस्पताल में आठ महीने पहले ही मशीन लगा दी गई लेकिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ऑनलाइन हाजिरी लगती है। वहीं चिकित्सक रजिस्टर पर हाजिरी भरते हैं। वहीं जिला अस्पताल में ढाई साल पहले पंचिंग मशीन लगाई गई है लेकिन वह केवल शोपीस बनी है। कम ही चिकित्सक ऐसे हैं, जो ऑनलाइन हाजिरी भरते हैं। एमबीएस में भी दो साल से पंचिंग मशीन लगी है। यहां मशीन तो चालू रखने का दावा तो किया जाता है लेकिन चिकित्सक इसका उपयोग कितना करते हैं। यह कोई नहीं बताता। चिकित्सकों की मनमानी ड्यूटी का खामियाजा मरीज भुगतते हैं। सौ शय्या अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ऑनलाइन हाजिरी भरते हैं। अस्पताल में एक सीएमएस, चार ईएमओ व छह चिकित्सकों की तैनाती है। इन लोगों की हाजिरी ऑफलाइन लगती है। बताया जाता है कि इनके थंब का अब तक मशीन से मिलान नहीं किया गया है। इसका फायदा उठाते हुए वे अस्पताल में अल्टरनेट ड्यूटी करते हैं। जो चिकित्सक एक दिन आते हैं, उसके अगले दिन वे नहीं आते। इसी तरह अस्पताल की व्यवस्था चल रही है। अस्पतालों में आए दिन चिकित्सकों के ओपीडी में न बैठने का मामला सामने आता है। दो से ढाई सालों से लगी मशीनों का अगर उपयोग किया जाता तो निश्चित तौर पर चिकित्सक ओपीडी में समय पर बैठते। पंचिंग मशीनों की नियमित निगरानी न होने से चिकित्सकों की मनमानी देखने को मिलती है। दूसरी तरफ सीएचसी पर भी लगी पंचिंग मशीनें शोपीस बनी हैं।
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