फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Offices in dilapidated buildings, life in breath

जर्जर भवनों में दफ्तर,सांसत में जान

Tue, 13 Oct 2020 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 11:18 PM IST
विज्ञापन
Offices in dilapidated buildings, life in breath
ज्ञानपुर। जनपद सृजन के ढाई दशक बाद भी जर्जर भवनों में सरकारी दफ्तर संचालित हो रहे हैं। कर्मचारी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने के लिए मजबूर हैं। विभाग के उच्चाधिकारी से लेकर आला अधिकारी तक ऐसे दफ्तरों की सुधि नहीं ले रहे हैं। ज्ञानपुर नगर के खादी आश्रम गली में एक दशक से संचालित हो रहे अल्पसंख्यक कार्यालय में कर्मचारी जान को जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। किसी न किसी विभागीय कार्यों से पहुंचने वाले अनुदानित मदरसा शिक्षक, छात्र-छात्राओं को खिसकते गर्डरों को देखकर एक बारगी यही अंदाजा लगाते हैं कि दूसरी मंजिल पर पहुंचने से पहले सीढ़ी पर किसी प्रकार अनहोनी हो गई तो वह कहीं के नहीं रहेंगे। यही स्थिति पूर्वोत्तर रेलवे के जंगीगंज स्टेशन स्थित कालोनी की देखी जा रही है जिसमें रहने वाले रेल कर्मियों का परिवार भी अनहोनी को लेकर भयभीत रहता है। आस-पास सफाई का अभाव और बारिश टपकती छतें ही वाराणसी रेल मंडल प्रशासन की उपलब्धियां को दर्शा रही है। इसी क्रम में पुरानी कलेक्ट्री स्थित डीएसओ, सेवायोजन कार्यालय, विपणन, डीएचओ, डूडा कार्यालयों की हालत देखने भर से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदार दफ्तरों, कालोनियों को लेकर कितने चिंतित हैं। प्रभारी अल्पसंख्यक अधिकारी विनोद कुमार जायसवाल ने कहा कि एक दशक से किराए पर चल रहे दफ्तर को बदलने की कवायद की गई, लेकिन जमीन के अभाव में दफ्तर उचि त स्थान पर नहीं पहुंच पा रहा है। डीएम स्तर से भदोही में जमीन उपलब्ध कराने की बात कही गई है। राजस्व विभाग का सहयोग न मिलने से मामला अधर में लटका है। सीढ़ी के ऊपर खिसके गार्डर पर कहा कि मकान स्वामी से जर्जर गार्डर को बदलने के लिए कहा गया है।
विज्ञापन

इनसेट-
दोहरीकरण के नाम पर उपेक्षित पड़ी कालोनियां
ज्ञानपुर। मडुआडीह-प्रयागराज रेल खंड के रेलवे स्टेशन जंगीगंज, ज्ञानपुररोड, अहिमनपुर आदि स्टेशनों पर कर्मचारियों के लिए बनाई कालोनियों की खराब दशा दोहरीकरण कार्य में हो रही लेटलतीफी के कारण देखी जा रही है। जब तक दोहरीकरण का कार्य पूरा नहीं होगा कालोनियों का नवनिर्माण हो पाना संभव नहीं है। सूत्रों की मानें तो विस्तारीकरण योजना में कालोनियों को भी सुधारने का एजेंडा है, लेकिन जब तक दोहरीकरण होगा तब तक कालोनी में समय काट पाना रेल कर्मियों के लिए मुसीबत ही बनी रहेगी। सवालों में घिरे वाराणसी मंडल प्रशासन का स्वच्छता पखवारा तो चला बावजूद इसके उक्त खंड पर संसाधनों का अभाव दूर नहीं हो पा रहा है जबकि बलिया, छपरा, मडुआडीह के कालोनियों को पुरस्कार के लिए भी चयनित कर लिया गया है। यह बात भी सामने आई है कि जबसे आईओडब्ल्यू से कालोनियों का प्रभार हटा है तभी उपेक्षित होती आ रही है। पीआरओ वाराणसी अशोक कुमार ने कहा कि जर्जर हो चुकी कालोनियों का स्थलीय निरीक्षण कराकर हालत सुधारने का प्रयास हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed