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अब कोटे की दुकानों पर बनेगा आयुष्मान कार्ड
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ज्ञानपुर। आयुष्मान भारत योजना में गोल्डेन कार्ड बनाने में तेजी लाने के लिए अब सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों की सहायता ली जाएगी। अब लाभार्थी को गोल्डेन कार्ड बनवाने के लिए अस्पतालों का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। 345 जन सुविधा केंद्रों पर पहले ही सुविधा दी गई थी, लेकिन अब 744 कोटे की दुकानों पर बुधवार से इसका शुभारंभ हो जाएगा। इसके लिए लाभार्थी को आधार कार्ड, प्रधानमंत्री का पत्र और राशन कार्ड लेकर पहुंचना होगा।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को चिकित्सकीय सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े, इसलिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू की है। योजना में जिले में अब तक एक लाख 83 हजार परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। हालांकि गोल्डेन कार्ड बनवाने वालों की संख्या काफी कम है। आयुष्मान कार्ड बनवाने वाले परिवार के सभी सदस्यों को गोल्डेन कार्ड बनवाना जरूरी होता है। उसी के आधार पर अस्पतालों में उनका उपचार होता है। अब तक 345 जन सेवा केंद्रों पर यह सुविधा दी गई थी, लेकिन गोल्डेन कार्ड बनाने में तेजी नहीं आ पा रही थी। इसको देखते हुए शासन ने कोटे की दुकानों पर कार्ड बनाने की पहल शुरू की। अपर मुख्यचिकित्साधिकारी डॉ. जेसी सरोज ने बताया कि गोल्डेन कार्ड बनाने की सुविधा अब जिले के सभी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर होगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक आरोग्य मित्रों, आपूर्ति विभाग के साथ सरकारी सस्ते गल्ले के दुकानदारों को अवगत कराया जा चुका है। आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में लाभार्थियों को राशन की दुकान तक लानेका काम करेगी। जिला कार्यक्रम समन्वयक आशीष ने बताया कि विभाग की सूची सभी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानदारों को भेज दिया गया है। प्रत्येक सरकारी सस्ते गल्ले के दुकानदार एक दिन में लगभग 80 से 85 गोल्डनकार्ड बनाएंगे। यदि एक परिवार में किसी एक मुखिया का कार्ड हैं। उसके अलावा किसी भी व्यक्ति का कार्ड नहीं है और उसका नाम सूची में है तो उसका भी कार्ड बनाया जाएगा। राशन की दुकान पर कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थी को आधार, राशन कार्ड और प्रधानमंत्री का पत्र अवश्य लाना होगा।
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आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को चिकित्सकीय सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े, इसलिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू की है। योजना में जिले में अब तक एक लाख 83 हजार परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। हालांकि गोल्डेन कार्ड बनवाने वालों की संख्या काफी कम है। आयुष्मान कार्ड बनवाने वाले परिवार के सभी सदस्यों को गोल्डेन कार्ड बनवाना जरूरी होता है। उसी के आधार पर अस्पतालों में उनका उपचार होता है। अब तक 345 जन सेवा केंद्रों पर यह सुविधा दी गई थी, लेकिन गोल्डेन कार्ड बनाने में तेजी नहीं आ पा रही थी। इसको देखते हुए शासन ने कोटे की दुकानों पर कार्ड बनाने की पहल शुरू की। अपर मुख्यचिकित्साधिकारी डॉ. जेसी सरोज ने बताया कि गोल्डेन कार्ड बनाने की सुविधा अब जिले के सभी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर होगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक आरोग्य मित्रों, आपूर्ति विभाग के साथ सरकारी सस्ते गल्ले के दुकानदारों को अवगत कराया जा चुका है। आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में लाभार्थियों को राशन की दुकान तक लानेका काम करेगी। जिला कार्यक्रम समन्वयक आशीष ने बताया कि विभाग की सूची सभी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानदारों को भेज दिया गया है। प्रत्येक सरकारी सस्ते गल्ले के दुकानदार एक दिन में लगभग 80 से 85 गोल्डनकार्ड बनाएंगे। यदि एक परिवार में किसी एक मुखिया का कार्ड हैं। उसके अलावा किसी भी व्यक्ति का कार्ड नहीं है और उसका नाम सूची में है तो उसका भी कार्ड बनाया जाएगा। राशन की दुकान पर कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थी को आधार, राशन कार्ड और प्रधानमंत्री का पत्र अवश्य लाना होगा।
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