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रमजान के चांद का दीदार, घरों में पढ़ी जाएगी नमाज
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भदोही। मुकद्दस रमजान के चांद का दीदार शुक्रवार की शाम हो गया। चांद के दीदार को लेकर नगर के मुसलमानों में जहां भारी उत्साह था, वहीं लॉकडाउन के चलते नमाज और तरावीह मस्जिदों में अदा न कर पाने की मायूसी भी चेहरों पर साफ दिखी। मगरिब के वक्त चांद देखते ही लोगों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी। भदोही के साथ-साथ गोपीगंज, ज्ञानपुर, खमरिया, नईबाजार, सुरियावां में भी चांद दिखने का खासा उत्साह रहा। हालांकि बाजार सूनसान दिखे। लॉकडाउन के चलते घरों में नमाज पढ़ी जाएगी।
मुसलमानों के लिए मुकद्दस रमजान 12 महीनों में सबसे फलदायी होता है। इस महीने अल्लाह की रहमतें बरसती हैं। एक एक नेकी के बदले अल्लाह अपने बंदों को 70 नेकियों का बदला देता है। रमजान के चांद के दिदार के लिए जुमे को मगरिब की नमाज के वक्त से ही लोगों की निगाहें आसमान पर टिक गई थीं। मौसम साफ होने से चांद का दीदार होने में खास परेशानी नहीं हुई। लोग चांद देखने के लिए अपने अपने छतों पर तो थे ही लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए कुछ लोगों ने मस्जिदों की छतों से चांद का दीदार और इस्तकबाल किया।
लॉकडाउन के चलते बाजार बंद रहने से इस बार रोजे की शुरुआत फीकी फीकी रही। पूर्व में जहां चांद देखते ही लोग बाजार में सेवईं, खजूर, सूजी, फल, पापड़, स्नैक्स आदि खरीदने उमड़ पड़ते थे। इस बार ऐसा दृश्य नहीं दिखा। लोग अपने ही घरों पर ही रहे और इबादत में लग गए। इस बारे में पीरखांपुर मोहल्ले के हाफिज रेहान अंसारी ने कहा कि इंशाअल्लाह इस बार रमजान में कौम की दुआओं से कोरोना हारेगा। कहा कि मुसलमान अपने घरों पर अल्लाह की इबादत में कोरोना के कहर से बचाने के लिए दुआ करेंगे तो अल्लाह जरूर दुआ कुबूल फरमाएगा।
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मुसलमानों के लिए मुकद्दस रमजान 12 महीनों में सबसे फलदायी होता है। इस महीने अल्लाह की रहमतें बरसती हैं। एक एक नेकी के बदले अल्लाह अपने बंदों को 70 नेकियों का बदला देता है। रमजान के चांद के दिदार के लिए जुमे को मगरिब की नमाज के वक्त से ही लोगों की निगाहें आसमान पर टिक गई थीं। मौसम साफ होने से चांद का दीदार होने में खास परेशानी नहीं हुई। लोग चांद देखने के लिए अपने अपने छतों पर तो थे ही लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए कुछ लोगों ने मस्जिदों की छतों से चांद का दीदार और इस्तकबाल किया।
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लॉकडाउन के चलते बाजार बंद रहने से इस बार रोजे की शुरुआत फीकी फीकी रही। पूर्व में जहां चांद देखते ही लोग बाजार में सेवईं, खजूर, सूजी, फल, पापड़, स्नैक्स आदि खरीदने उमड़ पड़ते थे। इस बार ऐसा दृश्य नहीं दिखा। लोग अपने ही घरों पर ही रहे और इबादत में लग गए। इस बारे में पीरखांपुर मोहल्ले के हाफिज रेहान अंसारी ने कहा कि इंशाअल्लाह इस बार रमजान में कौम की दुआओं से कोरोना हारेगा। कहा कि मुसलमान अपने घरों पर अल्लाह की इबादत में कोरोना के कहर से बचाने के लिए दुआ करेंगे तो अल्लाह जरूर दुआ कुबूल फरमाएगा।
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