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Bhadohi News: निभाई जाएगी महिलाओं के प्रतीकात्मक झगड़े की अनूठी परंपरा
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सुरियावां। भोरी-महजूदा गांव में दशकों से चली आ रही ऐतिहासिक कजरी मेले की परंपरा इस वर्ष भी सोमवार को निभाई जाएगी। मेले के आयोजन के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेले में नाले के उत्तर और दक्षिण तरफ की महिलाएं आमने-सामने होकर कजरी गीत गाते हुए आपस में झगड़ा करेंगी। कुछ दूरी पर पुरुष मौजूद रहेंगे, लेकिन परंपरा के तहत वे महिलाओं के बीच नहीं जाएंगे।
पुलिस, महिला पुलिसकर्मी और पीएसी के जवान भी मौके पर मौजूद रहेंगे, लेकिन इस पारंपरिक आयोजन में महिलाओं के बीच होने वाले प्रतीकात्मक झगड़े में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। गांव के बुजुर्गों के अनुसार भोरी-महजूदा का कजरी मेला तेरहवीं सदी से चला आ रहा है। इस मेले ने समय के साथ कई ऐतिहासिक घटनाओं और लोक परंपराओं को अपने में समेटे रखा है। मेले में महिलाओं द्वारा कजरी गीत गाने और उसके बाद नाले के दोनों ओर से महिलाओं के बीच प्रतीकात्मक रूप से झगड़ा करने की परंपरा आज भी कायम है। इसी अनूठी परंपरा को देखने के लिए पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ग्रामीण बुजुर्गों के मुताबिक काफी समय पहले एक नाई अपने ससुराल आया था। गांव की लड़कियों ने उससे कजरी गाने का आग्रह किया, लेकिन उसने गाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद लड़कियां उसे गुदगुदाने लगीं। अत्यधिक गुदगुदी के कारण उसकी मौत हो गई। घटना के बाद प्रायश्चित स्वरूप महिलाओं द्वारा कजरी गाने और प्रतीकात्मक झगड़े की परंपरा शुरू हुई, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। इस आयोजन में गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से हिस्सा लेती हैं। मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रविवार को सुरियावां थाने के प्रभारी निरीक्षक अश्वनी त्रिपाठी ने पुलिस बल के साथ मेला स्थल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहेंगे। भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।
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पुलिस, महिला पुलिसकर्मी और पीएसी के जवान भी मौके पर मौजूद रहेंगे, लेकिन इस पारंपरिक आयोजन में महिलाओं के बीच होने वाले प्रतीकात्मक झगड़े में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। गांव के बुजुर्गों के अनुसार भोरी-महजूदा का कजरी मेला तेरहवीं सदी से चला आ रहा है। इस मेले ने समय के साथ कई ऐतिहासिक घटनाओं और लोक परंपराओं को अपने में समेटे रखा है। मेले में महिलाओं द्वारा कजरी गीत गाने और उसके बाद नाले के दोनों ओर से महिलाओं के बीच प्रतीकात्मक रूप से झगड़ा करने की परंपरा आज भी कायम है। इसी अनूठी परंपरा को देखने के लिए पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ग्रामीण बुजुर्गों के मुताबिक काफी समय पहले एक नाई अपने ससुराल आया था। गांव की लड़कियों ने उससे कजरी गाने का आग्रह किया, लेकिन उसने गाने से इन्कार कर दिया। इसके बाद लड़कियां उसे गुदगुदाने लगीं। अत्यधिक गुदगुदी के कारण उसकी मौत हो गई। घटना के बाद प्रायश्चित स्वरूप महिलाओं द्वारा कजरी गाने और प्रतीकात्मक झगड़े की परंपरा शुरू हुई, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। इस आयोजन में गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से हिस्सा लेती हैं। मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रविवार को सुरियावां थाने के प्रभारी निरीक्षक अश्वनी त्रिपाठी ने पुलिस बल के साथ मेला स्थल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहेंगे। भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।
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