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बुजुर्गों की इज्जत अफजाई जरूरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
Updated Mon, 30 Nov 2015 01:48 AM IST
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यही वजह है कि आज दुनियां भर में कौम के खिलाफ साजिशें बढ़ रही हैं। ये बातें बीती रात मदरसा जामिया शमसिया तेगिया के छात्रों द्वारा आयोजित जश्ने इमाम अहमद रजा कांफ्रेस में मधुबनी (बिहार) के मौ.नूरआलम ने कही।
मौलाना ने कहा कि नमाज में हर दर्द और परेशानी की दवा है। उस पर तफ़सील से रौशनी डालते हुए कहा कि नमाज में कुछ मिनट लगते हैं।
तमाम वलियों ने अल्लाह की रजा के लिए नमाज की पाबंदी कर दीने हक का झंडा बुलंद किया। आला हजरत की सीरत बयान करते हुए मौलाना ने बताया कि, एक बार किसी ने आपके नाम के आगे हाफिज लगाकर दावतनामा भेजा।
जिसे पढ कर उन्हें लगा कि अगर वे हाफिज नहीं होंगे तो यह शख्स गुनाहगार हो जाएगा। यह सोच कर आपने केवल 26 दिन में कुरआन के तीसो पारे याद कर हाफिजे कुरआन कर लिया।
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मदरसे के प्रिंसिपल मौ. फैसल अशर्फी ने कहा कि मौलाना अहमद रजा ने बरेली में होश संभालते ही पाया कि लोगो के जेहन से इश्के नबी निकालने की कोशिशें हो रही है।
इस पर आपने लोगों को बताया कि इश्के रसूल सल्ल. को छोड कर इमान मुकम्मल नहीं हो सकता।कांफ्रेंस की सदारत मुफ्ती इस्माइलुल कादरी और निजामत शाहिद रजा ने की।
मौ. कुतुबुद्दीन रिजवी झारखण्ड, मौ.अब्दुस्समद जेयाई, मौ. अफराद हुसैन, कारी आफताब आलम, कारी अरमान ने भी खिताब की। रईस कौसर झारखण्ड, उस्मान रजा धनवाद, मकबूल भदोहवी ने नाते पाक पेश किया। हाजी मुनीर अहमद, अब्दुल सलाम, हाफिज तबरेज, हाजी नुरुलहक, जमील अंसारी नेता, इस्तीयक डायर, खुर्शीद आदि रहे।
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मौलाना ने कहा कि नमाज में हर दर्द और परेशानी की दवा है। उस पर तफ़सील से रौशनी डालते हुए कहा कि नमाज में कुछ मिनट लगते हैं।
तमाम वलियों ने अल्लाह की रजा के लिए नमाज की पाबंदी कर दीने हक का झंडा बुलंद किया। आला हजरत की सीरत बयान करते हुए मौलाना ने बताया कि, एक बार किसी ने आपके नाम के आगे हाफिज लगाकर दावतनामा भेजा।
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जिसे पढ कर उन्हें लगा कि अगर वे हाफिज नहीं होंगे तो यह शख्स गुनाहगार हो जाएगा। यह सोच कर आपने केवल 26 दिन में कुरआन के तीसो पारे याद कर हाफिजे कुरआन कर लिया।
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मदरसे के प्रिंसिपल मौ. फैसल अशर्फी ने कहा कि मौलाना अहमद रजा ने बरेली में होश संभालते ही पाया कि लोगो के जेहन से इश्के नबी निकालने की कोशिशें हो रही है।
इस पर आपने लोगों को बताया कि इश्के रसूल सल्ल. को छोड कर इमान मुकम्मल नहीं हो सकता।कांफ्रेंस की सदारत मुफ्ती इस्माइलुल कादरी और निजामत शाहिद रजा ने की।
मौ. कुतुबुद्दीन रिजवी झारखण्ड, मौ.अब्दुस्समद जेयाई, मौ. अफराद हुसैन, कारी आफताब आलम, कारी अरमान ने भी खिताब की। रईस कौसर झारखण्ड, उस्मान रजा धनवाद, मकबूल भदोहवी ने नाते पाक पेश किया। हाजी मुनीर अहमद, अब्दुल सलाम, हाफिज तबरेज, हाजी नुरुलहक, जमील अंसारी नेता, इस्तीयक डायर, खुर्शीद आदि रहे।