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बूंदाबांदी और बादलों से पारा लुढ़का, बढ़ी गलन
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हाइवे पर कोहरे के बीच जाती कार।
- फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी दिखने लगा है। जिले में मंगलवार को मौसम अचानक खराब हो गया। सुबह से ही काली घटनाएं छाई रहीं। बूंदाबांदी भी हुई जिससे अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से लुढ़क कर 21 डिग्री सेल्सियस पर जा पहुंचा। इससे गलन बढ़ गई और लोग ठिठुरे नजर आए। पूरे दिन धूप नहीं हुई। ठंड की वजह से अभी तक हाफ स्वेटर और जैकेट से काम चलाने वाले लोग फुल जैकेट और स्वेटर पहने नजर आए।
महीने के शुरूआती दिनों में सामान्य से अधिक तापमान होने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी थी, लेकिन सोमवार से मौसम बदलना शुरू हुआ। मंगलवार को आंख खुली तो आसमान में काली घटाएं छाई मिलीं। हल्की पछुआ हवाओं से न्यूनतम तापमान करीब दो डिग्री लुढ़क कर 10 और अधिकतम 25 से 21 तक पहुंच गया। इससे सुबह से ही लोग गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकले। सुबह सात बजे तक कोहरा छाया रहा जिससे वाहनों का आवागमन प्रभावित रहा।
दोपहर में ज्ञानपुर समेत अन्य क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने और पहाड़ों में बर्फबारी से बदली छाई है। बादलों की उपस्थिति से बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर पश्चिमी सर्द हवाओं के प्रभावी रहने से पारा गिरेगा। उन्होंने बताया कि रात में न्यूनतम तापमान 12 से घटकर 10 डिग्री पहुंच गया जबकि अधिकतम 25 से 21 तक पहुंच गया है। आने वाले चार से पांच दिनों में न्यूनतम तापमान छह से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने के आसार हैं। बताया कि न्यूनतम तापमान में गिरावट रबी फसलों, गेहूं, चना, मटर आदि के लिए लाभप्रद है। गेहूं की 21 से 25 दिन की हो चुकी फसल में पहली सिंचाई करनी चाहिए।
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किसान फसल की करें निगरानी
ज्ञानपुर। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि बादल युक्त मौसम लगातार बना रहेगा तो दलहनी-तिलहनी और सब्जी वाली फसलों में कीट संग रोग लगने की आशंका बढ़ जाएगी। ऐसे में किसान अपनी फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। यह मौसम आलू में झुलसा रोग की स्थिति उत्पन्न करती है। ऐसे में मैनकोजेब दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। तापमान गिरने से मटर की फसल में गेरुई, अंग मारी रोग की आशंका रहती है। इससे पत्तियां पीली होने के साथ ही पाउडर जैसा हो जाती हैं। ऐसे में किसान प्रॉपिकॉनाजोल दो मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
पशुओं को ठंडी हवाओं से बचाएं
ज्ञानपुर। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गोविंद चौधरी ने कहा कि मवेशियों को भी ठंड से बचाने की जरूरत है। उनके आराम वाले स्थान पर धान का पुआल बिछावन के रूप में प्रयोग करें। ठंडी हवाओं को रोकने के लिए तिरपाल और प्रवेश मार्ग को बंद करें। हरे चारे में सूखा चारा अवश्य मिलाएं।
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महीने के शुरूआती दिनों में सामान्य से अधिक तापमान होने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी थी, लेकिन सोमवार से मौसम बदलना शुरू हुआ। मंगलवार को आंख खुली तो आसमान में काली घटाएं छाई मिलीं। हल्की पछुआ हवाओं से न्यूनतम तापमान करीब दो डिग्री लुढ़क कर 10 और अधिकतम 25 से 21 तक पहुंच गया। इससे सुबह से ही लोग गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकले। सुबह सात बजे तक कोहरा छाया रहा जिससे वाहनों का आवागमन प्रभावित रहा।
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दोपहर में ज्ञानपुर समेत अन्य क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने और पहाड़ों में बर्फबारी से बदली छाई है। बादलों की उपस्थिति से बूंदाबांदी से लेकर हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर पश्चिमी सर्द हवाओं के प्रभावी रहने से पारा गिरेगा। उन्होंने बताया कि रात में न्यूनतम तापमान 12 से घटकर 10 डिग्री पहुंच गया जबकि अधिकतम 25 से 21 तक पहुंच गया है। आने वाले चार से पांच दिनों में न्यूनतम तापमान छह से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने के आसार हैं। बताया कि न्यूनतम तापमान में गिरावट रबी फसलों, गेहूं, चना, मटर आदि के लिए लाभप्रद है। गेहूं की 21 से 25 दिन की हो चुकी फसल में पहली सिंचाई करनी चाहिए।
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किसान फसल की करें निगरानी
ज्ञानपुर। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि बादल युक्त मौसम लगातार बना रहेगा तो दलहनी-तिलहनी और सब्जी वाली फसलों में कीट संग रोग लगने की आशंका बढ़ जाएगी। ऐसे में किसान अपनी फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। यह मौसम आलू में झुलसा रोग की स्थिति उत्पन्न करती है। ऐसे में मैनकोजेब दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। तापमान गिरने से मटर की फसल में गेरुई, अंग मारी रोग की आशंका रहती है। इससे पत्तियां पीली होने के साथ ही पाउडर जैसा हो जाती हैं। ऐसे में किसान प्रॉपिकॉनाजोल दो मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
पशुओं को ठंडी हवाओं से बचाएं
ज्ञानपुर। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गोविंद चौधरी ने कहा कि मवेशियों को भी ठंड से बचाने की जरूरत है। उनके आराम वाले स्थान पर धान का पुआल बिछावन के रूप में प्रयोग करें। ठंडी हवाओं को रोकने के लिए तिरपाल और प्रवेश मार्ग को बंद करें। हरे चारे में सूखा चारा अवश्य मिलाएं।