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10 साल की उम्र में घर छोड़ दिए थे महंथ कल्पवृक्ष

Tue, 21 Apr 2020 09:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2020 09:00 PM IST
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Krishnachandra became a monk at the age of 10
ज्ञानपुर। महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ हिंसा का शिकार बने एक संत महंत कल्पवृक्ष गिरी भदोही जिले के वेदपुर गांव के रहने वाले थे। करीब छह दशक पूर्व घर-बार छोड़कर संन्यासी बने कल्पवृक्ष गिरी की नृशंस हत्या का समाचार मिलने के बाद यहां परिजन दुखी हो गए हैं। लॉक डाउन के कारण यहां से कोई महाराष्ट्र नहीं जा पाया। लेकिन, पालघर में रहने वाले उनके भाई दिनेश चंद्र ने पोस्टमार्टम के बाद उनके शव को नाशिक के त्र्यंबकेश्वर नाथ में समाधि दिलाई।
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ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के वेदपुर गांव निवासी चिंतामणि तिवारी के छह पुत्रों में चौथे नंबर के पुत्र संत कल्पवृक्ष बचपन से ही वैरागी प्रवृत्ति के थे। यहां प्राथमिक विद्यालय भुसौला में कक्षा तीन में पढ़ रहे थे। उसी समय मन विरक्त हुआ और घर छोड़कर महाराष्ट्र चले गए। बचपन में उनका नाम कृष्णचंद्र तिवारी था। वहां मुंबई के वनदेवी मंदिर में गुरु ओंकारेश्वर नाथ का सानिध्य प्राप्त कर संत जीवन में रम गए। घरवालों ने कई बार उनसे घर आने के लिए अनुनय किया, लेकिन वह नहीं लौटे। यहां गांव में उनके छोटे भाई राकेश चंद्र तिवारी ने बताया कि चार भाई मुंबई में ही रहते हैं। एक भाई दिनेश चंद्र ने संत के शव का अंतिम संस्कार कराया। 65 वर्षीय संत की इतने लंबे समय बाद इस तरह से मौत की सूचना मिलने के बाद यहां घरवाले स्तब्ध हैं। मंगलवार को जब अमर उजाला टीम वेदपुर उनके घर पहुंची तो घर पर सांत्वना देने वालों का मजमा लगा था। घरवालों का कहना था कि उनकी विवशता यह है कि लॉक डाउन के कारण वहां कोई पहुंच नहीं पाया। उनके भाई राकेशचंद्र ने बताया कि दस साल की उम्र में वह स्कूल से लौट रहे थे। उस समय माघ मेला चल रहा था। सड़क मार्ग से संतों की टोली गुजर रही थी और वह उनके साथ चले गए।
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भाई को याद कर रोने लगे राकेश चंद्र
ज्ञानपुर। महंत कल्पवृक्ष गिरी के छोटे भाई राकेश चंद्र तिवारी ने बताया कि 30 साल पहले बड़े भाई की खबर मिली तो सभी सदस्य उन्हें घर आने के लिए मनाने लगे। कई बार उन्हें घर लौटने को कहा गया, लेकिन वह हमें समझाते कि अब वे घर नहीं आ पाएंगे। उसके बाद परिवार के सदस्य उनसे आशीर्वाद लेेने के लिए मिलते। पुरानी बातों को बताते-बताते वह रोने लगे। उनके छह भाइयों में लालचंद्र तिवारी, गुलाब चंद्र तिवारी, कृष्ण चंद्र तिवारी, कपूर चंद्र तिवारी, दिनेश चंद्र तिवारी और राकेश तिवारी हैं। जिनमें गुलाब चंद्र तिवारी का पूर्व का पहले ही निधन हो चुका है। कृष्णचंद्र की हत्या हो जाने के बाद अब चार भाई बचे हैं।
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‘कठोर कार्रवाई करे सरकार’
ज्ञानपुर। महाराष्ट्र में भीड़ हिंसा का शिकार संत कल्पवृक्ष गिरी के घरवालों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनके भाई राकेश तिवारी ने कहा कि लॉक डाउन के कारण परिजन और सगे संबंधी महाराष्ट्र नहीं जा पा रहे हैं, वरना वहां जाकर महाराष्ट्र सरकार से गुहार लगाई जाती। यह घटना पूरी तरह से हत्या है। इसकी समुचित जांच कराई जानी चाहिए। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, तभी मन को शांति मिलेगी।
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